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S. 313 CrPC | आरोपी के बयान का इस्तेमाल हालात की अधूरी कड़ी को पूरा करने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
अपनी छह साल की भांजी के रेप और मर्डर के आरोप में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (1 अक्टूबर) को कहा कि अगर अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध बिना किसी शक के साबित करने में नाकाम रहता है तो सिर्फ़ CrPC की धारा 313 / BNSS की धारा 351 के तहत बचाव पक्ष के बयानों के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।दूसरे शब्दों में, CrPC की धारा 313 के तहत पूछे गए सवालों के जवाब में आरोपी ने जो कहा, उसका इस्तेमाल अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में रह गई कमियों को पूरा करने के लिए...

सुप्रीम कोर्ट जजों का 'एक देश, एक चुनाव' कमेटी से मिलने से इनकार
सूत्रों के मुताबिक, 'एक देश, एक चुनाव' पर बनी संयुक्त संसदीय समिति और सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच प्रस्तावित बैठक नहीं होगी।समिति ने पहले एक साथ चुनाव कराने पर "अनौपचारिक चर्चा" के लिए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के जजों से 6 अक्टूबर को मिलने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने समिति के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।इससे पहले दिन में सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के जजों से मिलने की समिति की पहल की आलोचना करते हुए कहा...

23,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का ट्रैफिक जुर्माना बकाया: सुप्रीम कोर्ट का बिना भुगतान ई-चालान वाले वाहनों को ज़ब्त करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रैफिक का बकाया जुर्माना वसूलने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया। इन कदमों में रैंडम चेकिंग के दौरान बिना भुगतान वाले ई-चालान वाले वाहनों को ज़ब्त करना और बकाया राशि का भुगतान होने तक वाहनों से जुड़ी ऑनलाइन सेवाओं को रोकना शामिल है।कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ हज़ारों ई-चालान जारी करने से कोई खास फ़ायदा नहीं होगा, जब तक कि अधिकारी जुर्माने की वसूली सुनिश्चित न करें। कोर्ट को बताया गया कि देश भर में जारी ई-चालान के तहत लगभग 49,194.05 करोड़...

सुप्रीम कोर्ट ने AG से स्टेट बार काउंसिल की सदस्य संख्या बढ़ाने की याचिका पर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से स्टेट बार काउंसिल (SBC) की कानूनी सीमा बढ़ाने की याचिका पर विचार करने को कहा। अभी एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 3(2)(b) के तहत इसमें अधिकतम 25 सदस्य हो सकते हैं।जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने वकील की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। वकील का तर्क था कि SBC में 25 सदस्यों की कानूनी सीमा 1961 में एक्ट बनने के समय तय की गई। लेकिन समय के साथ वोटर्स की संख्या काफी बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, उन्होंने बताया कि दिल्ली बार...

ज़िला जजों की भर्ती प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक भर्ती की पूरी प्रक्रिया में सुधार की इच्छा जताई
गुजरात हाईकोर्ट की ज़िला जजों की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाले मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि वह न्यायिक परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए पहल करना चाहता है।कोर्ट दो वकीलों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें 2024-25 भर्ती वर्ष के लिए 25% सीधी भर्ती कोटे के तहत ज़िला जजों की गुजरात हाईकोर्ट की भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई। इस प्रक्रिया में विज्ञापित 113 रिक्तियों में से कोई भी नहीं भरी गई, जबकि दो उम्मीदवार वाइवा-वोस (मौखिक परीक्षा)...

सिर्फ़ इसलिए प्राथमिकता नहीं मिल सकती कि आप न्यायिक अधिकारी हैं: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज की जल्द सुनवाई की अर्ज़ी ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व ज़िला जज की मामले की जल्द सुनवाई की मांग को ठुकरा दिया और याद दिलाया कि संविधान हर व्यक्ति को समान मानता है।पूर्व न्यायिक अधिकारी ने नौकरी से बर्खास्तगी के ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित अपनी रिट याचिका के जल्द निपटारे के लिए एक और रिट याचिका दायर की थी। इसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि संविधान किसी को भी प्राथमिकता देने की इजाज़त नहीं देता।संक्षेप में मामलायह रिट याचिका राकेश कुमार नैन ने दायर की, जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST...

कॉपीराइट विवाद में इलैयाराजा को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसले में दखल से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने म्यूजिक कंपोजर इलैयाराजा की चुनौती पर 'एन इनिया पोन निलावे' गाने के रीक्रिएटेड वर्शन के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार किया। इसके बजाय, बेंच ने साफ किया कि हाई कोर्ट की टिप्पणियां शुरुआती तौर पर (prima facie) हैं।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच, म्यूजिक कंपोजर द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ दायर स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) पर सुनवाई कर रही थी।यह विवाद वेल्स फिल्म इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा गाने...

अनुशासनात्मक जांच के दौरान अंतरिम स्तर पर वकीलों को सस्पेंड नहीं कर सकती बार काउंसिल: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पास अनुशासनात्मक जांच लंबित रहने के दौरान अंतरिम स्तर पर वकीलों को सस्पेंड करने का अधिकार नहीं है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 35(3)(c) (दुर्व्यवहार के लिए वकीलों को सज़ा) के तहत सस्पेंशन अंतिम आदेश है, जिसे अनुशासनात्मक कार्यवाही के लंबित रहने के दौरान पारित नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के...

'एक देश, एक चुनाव' कमिटी की सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ प्रस्तावित बैठक पर उठते सवाल
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने बताया कि 'एक साथ चुनाव' कराने में मदद करने वाले 'संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2024' की जांच कर रही जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी, 6 अक्टूबर को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों के साथ चर्चा करने वाली है।सिब्बल ने इस प्रस्तावित बातचीत की आलोचना करते हुए इसे "अभूतपूर्व" और "असंवैधानिक" बताया। उन्होंने तर्क दिया कि इससे शक्तियों के बंटवारे (Separation of Powers) को लेकर...

पश्चिम बंगाल OBC सर्टिफिकेट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
पश्चिम बंगाल में OBC प्रमाणपत्रों को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 12 अगस्त 2026 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने 2025-26 के दौरान जारी किए गए कुछ OBC प्रमाणपत्रों को void ab initio (शुरू से ही अमान्य) घोषित किया था।जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि संबंधित भर्ती में होने वाली नियुक्तियां इस याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि नवनियुक्त उम्मीदवारों को...

2008 Ahmedabad Blasts : सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की फांसी की सज़ा पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहमद बावा उर्फ अब्बू अबूबकर बरेलवी की फांसी की सज़ा पर रोक लगाई। बरेलवी उन 38 दोषियों में से एक है जिन्हें 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने यह आदेश बरेलवी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उसने गुजरात हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसने उसकी सज़ा और मौत की सज़ा बरकरार रखी।बरेलवी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उसे दोषी ठहराने का आधार पूरी तरह...

सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अकाउंट्स फ्रीज़ करने के खिलाफ़ तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज की, हाईकोर्ट से सुनवाई में तेज़ी लाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) को कोई राहत देने से इनकार किया। पार्टी ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उसके इंडियन बैंक के चार अकाउंट्स को फ्रीज़ करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस बी वराले की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत देने से इनकार करने के खिलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई करने से मना किया। यह देखते हुए कि मुख्य मामला हाईकोर्ट में लंबित है, बेंच ने आर्टिकल 136 के तहत अपने अधिकार...

S. 138 NI Act | चेक बाउंस होने पर ड्रॉअर के पते पर भेजा गया नोटिस, परिवार के सदस्य को मिलने पर भी वैध माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (30 सितंबर) को कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत कानूनी डिमांड नोटिस को सिर्फ़ इसलिए अमान्य नहीं माना जा सकता कि वह ड्रॉअर के परिवार के किसी सदस्य को मिला था, जबकि नोटिस ड्रॉअर के सही पते पर रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजा गया।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने केरल हाईकोर्ट का वह फ़ैसला पलट दिया, जिसमें ड्रॉअर की सज़ा को सिर्फ़ इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि कानूनी डिमांड नोटिस उसे व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि उसकी माँ को मिला था,...

क्या PC Act के तहत मंज़ूरी न मिलने के बाद भी IPC के तहत मुक़दमा चल सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने IDBI बैंक के पूर्व अधिकारियों और बैंक बोर्ड में सरकारी नॉमिनी की याचिकाओं के एक समूह पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। इन याचिकाओं में उन्होंने 'प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट, 1988' (PC Act) के तहत मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी न मिलने के बाद भी 'इंडियन पीनल कोड' (IPC, अब 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' या BNS 2023) के तहत अपराधों के लिए अपने ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने को चुनौती दी।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच मद्रास हाईकोर्ट के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर 'स्पेशल लीव...

CAPF अवमानना मामला दूसरी बेंच को सौंपने से 'मास्टर ऑफ़ रोस्टर' की शक्तियों पर सवाल उठे हैं? दुष्यंत दवे
'मास्टर ऑफ़ रोस्टर' यानी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने फिर से ऐसा कदम उठाया है, जो उनकी तय शक्तियों से परे है और जिससे न्याय में बाधा पड़ने का संकेत मिलता है।CJI ने कथित तौर पर 29 सितंबर को एक प्रशासनिक आदेश जारी किया, जिसमें जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की विशेष बेंच बनाई गई। इस बेंच को 30 सितंबर को CA 13106/2024 में अवमानना याचिका 37/2026 पर सुनवाई करनी है।ऐसा करके CJI ने सीधे तौर पर जस्टिस भुइयां और जस्टिस चंदुरकर की बेंच द्वारा 29 सितंबर को ही पारित न्यायिक आदेश में दखल...

ज़रूरी पक्ष को शामिल किए बिना हासिल किया गया समझौता आदेश अमान्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार की संपत्ति (Coparcenary Property) के बंटवारे के मुकदमे में ज़रूरी पक्ष को शामिल किए बिना हासिल किया गया समझौता आदेश अमान्य (Nullity) होता है। इसलिए, जिस ज़रूरी पक्ष को शामिल नहीं किया गया, वह उस कोर्ट में समझौता आदेश के खिलाफ 'रिकॉल एप्लीकेशन' (आदेश को वापस लेने की अर्ज़ी) दायर करने का हकदार है, जिसने वह आदेश पारित किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई की। इसमें अपीलकर्ता संपत्ति के मालिक की दिवंगत बेटी के कानूनी वारिस हैं...

सुप्रीम कोर्ट ने FIR में गड़बड़ी को लेकर UP Police को फटकार लगाई, अधिकारी को तलब किया
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की आलोचना की। मामला मोटरसाइकिल चोरी का है, जिसमें शिकायतकर्ता ने चोर को मौके पर ही पकड़ लिया, फिर भी पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच के सामने आए मामले में शिकायतकर्ता खुद पेश हुईं और आरोप लगाया कि उन्होंने UP Police को उस व्यक्ति के बारे में जानकारी दी थी, जिसने उनकी मोटरसाइकिल चोरी की थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करते समय आरोपी का नाम लिखने वाली जगह खाली छोड़ दी।उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट...

ज़मानत अर्ज़ी या आपराधिक मुक़दमे की सुनवाई के दौरान जजों को नैतिकता पर अपनी निजी राय से बचना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज़मानत अर्ज़ी या आपराधिक मुक़दमे की सुनवाई के दौरान, पीठासीन जज को नैतिकता पर अपनी निजी राय या मूल्यों के आधार पर फ़ैसला देने से बचना चाहिए।जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा,"हमारा मानना है कि ज़मानत या किसी आरोपी के आपराधिक मुक़दमे से जुड़े मामले की सुनवाई करते समय अदालतों को पीठासीन जज की नैतिकता या अन्य मामलों पर निजी राय या मूल्यों के आधार पर फ़ैसला थोपने से बचना चाहिए।" बेंच ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें ज़मानत...

विधायी विशेषाधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट के रेफरेंस में पत्रकार सीमा चिश्ती ने दी दखल देने की अर्ज़ी
'द वायर' की एडिटर और पत्रकार सीमा चिश्ती ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की। इसमें उन्होंने संविधान के आर्टिकल 194(3) के तहत विधायी विशेषाधिकारों के दायरे और आर्टिकल 19(1)(a) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी के मौलिक अधिकार के साथ उनके तालमेल से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में दखल देने की अनुमति मांगी।एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड नेहा राठी के ज़रिए दाखिल अपनी अर्ज़ी में चिश्ती ने कहा कि विधायी विशेषाधिकार असीमित नहीं हैं और उनकी व्याख्या मौलिक अधिकारों - जिसमें आर्टिकल 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत...

पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पटाखों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएगा और न ही उनके बेरोकटोक इस्तेमाल की इजाज़त देगा। कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं और बच्चों, बुज़ुर्गों व बीमार लोगों पर वायु प्रदूषण के बुरे असर के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा,"हम यह बात साफ़ कर देना चाहते हैं। न तो हम पूरी तरह रोक लगाने की आपकी बात मानेंगे और न ही हम उन्हें 24 घंटे पटाखे फोड़ने की इजाज़त देंगे। इसके दो कारण हैं। पहला, पूरी तरह रोक लगाने से लोगों की भावनाओं पर असर पड़ सकता है।...
