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कॉलेज में आप कितना ही पढ़ लें, असली सीख तो कोर्टरूम में ही मिलेगी: युवा वकीलों से जस्टिस संजय करोल

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर हो रहे जज जस्टिस संजय करोल ने शुक्रवार को कहा कि न्यायपालिका की ताकत मजबूत 'बार' (वकीलों के संगठन) में है। उन्होंने युवा वकीलों से नियमित रूप से कोर्ट आने, हर मौके का पूरा फायदा उठाने और बार व बेंच के सीनियर सदस्यों के प्रति विनम्र रहने की अपील की।सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा आयोजित अपनी विदाई सभा में जस्टिस करोल ने कहा कि बार "न्याय दिलाने की व्यवस्था का संरक्षक" है क्योंकि जज आते-जाते रहते हैं, जबकि बार बना रहता है।उन्होंने कहा,"बार जितना मजबूत होगा, बेंच...

जस्टिस संजय करोल की विदाई सभा: CJI ने सूर्य कांत ने युवा वकीलों का हौसला बढ़ाने की जज के कार्यकाल की तारीफ़

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने शुक्रवार को जस्टिस संजय करोल की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि जस्टिस करोल अपने सामने पेश होने वाले युवा वकीलों का हौसला बढ़ाते हैं। वे अक्सर सीनियर वकीलों को बताते हैं कि उनके जूनियर ने बेंच के सामने मामले पर कितनी अच्छी बहस की। एक सीनियर जज के ऐसे शब्द युवा वकील के लिए किसी भी आश्वासन से कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं।जस्टिस करोल आज (शनिवार) अपना पद छोड़ रहे हैं। उनके लिए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की विदाई सभा में CJI कांत ने कहा कि जस्टिस करोल ने हमेशा बार...

अगर क्लाइंट विरोधी बन जाए, तब भी वकील उसकी गोपनीय जानकारी ज़ाहिर नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट ने वकील का सस्पेंशन सही ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (21 अगस्त) को वकील के प्रैक्टिस करने के लाइसेंस को दो साल के लिए सस्पेंड करने का फ़ैसला सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक में लगे आरोपों का जवाब देने के नाम पर पुराने क्लाइंट की गोपनीय जानकारी ज़ाहिर करना सही नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा,"वकील का फ़र्ज़ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि क्लाइंट का वकील के प्रति व्यवहार कैसा रहा है। वकील भरोसे में मिली जानकारी का इस्तेमाल अपने क्लाइंट के ख़िलाफ़ नहीं कर...

सुप्रीम कोर्ट ने डेंगू से बच्चे की मौत के बाद माता-पिता की आत्महत्या से जुड़ा 2015 का स्वतः संज्ञान मामला बंद किया

सुप्रीम कोर्ट ने उस स्वतः संज्ञान मामला बंद किया, जो 2015 में डेंगू से अपने 7 साल के बच्चे की दुखद मौत के बाद माता-पिता की आत्महत्या पर शुरू किया गया।आरोप है कि कुछ अस्पतालों द्वारा बेड की कमी का हवाला देते हुए बच्चे को भर्ती करने से इनकार करने के बाद उसकी मौत हो गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने दिल्ली छावनी बोर्ड (Delhi Cantonment Board) के वकील का यह बयान दर्ज करते हुए मामले को बंद कर दिया कि 'की गई कार्रवाई की योजना' (Action Taken...

सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद राष्ट्रपति ने 2003 में दो डकैतों को मारने वाले पूर्व पुलिसकर्मी के लिए वीरता पदक को मंज़ूरी दी

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व पुलिस अधिकारी विवेक कुमार चौहान को 'राष्ट्रपति वीरता पदक' (President's Medal for Gallantry) देने की मंज़ूरी दी। चौहान ने 2003 में मध्य प्रदेश में डकैती-रोधी अभियान के दौरान दो डकैतों को गोली मारकर मार गिराया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच उस मामले की सुनवाई कर रही थी, जो चौहान ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही के तहत शुरू किया।...

मानहानि मामले में सुखबीर सिंह बादल को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की शिकायत रद्द करने की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ मानहानि का मामला रद्द करने से इनकार किया। यह मामला धार्मिक संगठन 'अखंड कीर्तनी जत्था' (AKJ) के प्रवक्ता राजिंदर पाल सिंह ने दर्ज कराया था।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने उनकी 'स्पेशल लीव पिटीशन' (विशेष अनुमति याचिका) खारिज कर दी। बादल की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल पेश हुए।बता दें, पाल सिंह ने 2017 में बादल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 (मानहानि) के तहत शिकायत...

11 साल तक न्यायिक समय बर्बाद करने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, एडवोकेट रिजवान सिद्दीकी और अभिनेत्री रोजलिन खान पर ₹5-₹5 लाख जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के एडवोकेट रिजवान सिद्दीकी और अभिनेत्री रेहाना खान उर्फ रोजलिन खान के कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए दोनों पर ₹5-₹5 लाख का जुर्माना लगाया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों ने करीब 11 वर्षों तक Bar Council of India, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का न्यायिक समय लिया, जबकि दोनों ही पक्षों ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और कोर्ट के सामने पूरी तरह स्पष्टता से पेश नहीं हुए।क्या था मामला?रोजलिन खान ने Advocates Act की धारा 35 के तहत एडवोकेट...

सिविल जज भर्ती में कानून की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री को वकालत के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर कैटगरी) की भर्ती के लिए कानून में स्नातकोत्तर डिग्री को अदालत में वकालत के अनुभव के बराबर मानने की मांग को खारिज किया।अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कानून में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल कर लेना न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए वकालत के व्यावहारिक अनुभव की जगह नहीं ले सकता। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला उन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें 20 मई 2025 के उस फैसले को चुनौती दी गई,...

सुप्रीम कोर्ट ने 2027 तक न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस शर्त हटाई, लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती में तीन साल की प्रैक्टिस अनिवार्यता को लेकर संक्रमणकालीन अवधि में लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं के तहत सभी लॉ ग्रेजुएट्स, तीन साल की प्रैक्टिस के बिना भी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन (असहमति) की पीठ ने कहा कि इस अवधि में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को एक साल की सक्रिय...

अगर सर्विस रूल्स में कहा गया कि PSC का फ़ैसला फ़ाइनल है तो सरकार कैंडिडेट की योग्यता की दोबारा जांच नहीं कर सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां सर्विस रूल्स में साफ़ तौर पर कहा गया कि कैंडिडेट की योग्यता पर पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) का फ़ैसला फ़ाइनल होगा, वहां कमीशन द्वारा व्यक्ति को योग्य पाए जाने और नियुक्ति के लिए उसकी सिफ़ारिश करने के बाद सरकार स्वतंत्र रूप से उस व्यक्ति की योग्यता की दोबारा जांच या पूरी तरह से दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शैलेंद्र कुमार पटेल से जुड़े मामले की सुनवाई की, जिन्हें छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (CGPSC) ने...

अगर एकनाथ शिंदे दल-बदल के दोषी पाए जाते हैं तो ECI की मान्यता का आधार खत्म हो जाएगा: सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना UBT

शिवसेना मामले में उद्धव बालासाहेब ठाकरे (UBT) पार्टी ने आज सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि आधिकारिक 'धनुष-बाण' का चुनाव चिह्न उन्हें दिया जाना चाहिए, या फिर इसे फ्रीज़ कर दिया जाना चाहिए। UBT ने कहा कि अगर यह चिह्न उद्धव गुट को नहीं मिल सकता तो एकनाथ शिंदे गुट को भी नहीं मिलना चाहिए।शिवसेना (UBT) की ओर से सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने तर्क दिया कि एकनाथ शिंदे और उनके समर्थक आधिकारिक चुनाव चिह्न अपने पास रखकर दल-बदल का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि शिंदे गुट को यह चिह्न विधायी बहुमत के...

यूपी गैंगस्टर एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- शुरुआत से ही बेकार, यह कानून निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986' को "शुरुआत से ही बेकार" (Stillborn) करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह कानून कोई अलग आपराधिक अपराध नहीं बनाता है और किसी व्यक्ति को सिर्फ़ "गैंगस्टर" का लेबल लगाकर उस पर मुकदमा चलाने या सज़ा देने का आधार नहीं बन सकता।एक कड़े फैसले में कोर्ट ने कहा कि हिंसा और संगठित आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए बनाया गया यह कानून असल में बेखबर नागरिकों के खिलाफ ही काम कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून, "हिंसा को...

झारखंड सर्विस परीक्षा में गड़बड़ियों की CBI जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सोशल एक्टिविस्ट हरिशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की CBI (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन) से स्वतंत्र और तय समय-सीमा में जांच की मांग की।वकील सत्यम सिंह राजपूत के ज़रिए दायर इस याचिका में सरकारी अधिकारियों और परीक्षा एजेंसियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच को राज्य से CBI को सौंपने की मांग की गई। यह जांच इसलिए मांगी गई, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा परीक्षा रद्द करने के बावजूद "सिस्टमैटिक करप्शन"...

छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच करेगी 5 सदस्य कमेटी: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में किया गठन

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने नई दिल्ली के जंतर-मंतर और देश भर की अन्य जगहों पर छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करने के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का गठन किया।कमेटी से कहा गया कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स द्वारा ज़रूरत से ज़्यादा और अनुपातहीन बल प्रयोग के आरोपों, और साथ ही सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित हिंसा और उन्हें लगी चोटों की जांच करे।HPEC की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के...