पक्की कानूनी सहमति होने से पहले सार्वजनिक संपत्ति की कीमत बढ़ाने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण नीलामी पर फिर से विचार कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
23 Oct 2026 12:50 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सार्वजनिक संपत्ति के मामले में, पक्की कानूनी सहमति (बाइंडिंग कॉन्ट्रैक्ट) होने से पहले, उसकी कीमत अधिकतम करने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण नीलामी पर फिर से विचार कर सकता है।
इसके साथ ही कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन के उस निर्णय को खारिज कर दिया गया था, जिसके तहत बेदी अस्पताल की ₹12.58 करोड़ की बोली (नर्सिंग होम साइट के लिए) को रद्द कर दिया गया था।
कोर्ट ने माना कि अलॉटमेंट लेटर जारी होने और कन्वेयंस डीड (संपत्ति हस्तांतरण दस्तावेज) निष्पादित होने से पहले चंडीगढ़ प्रशासन को नीलामी पर फिर से विचार करने का अधिकार है। ऐसा विशेष रूप से तब और भी जरूरी हो जाता है, जब साइट के लिए लगाई गई बोली, उसी आकार के बगल वाले प्लॉट की कीमत की तुलना में काफी कम हो।
कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया कि वह सेक्टर 33C में स्थित इस साइट के लिए तीन महीने के भीतर एक नई ई-नीलामी कराए। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि बाद में हुई नीलामी में ₹18.30 करोड़ की बोली मिली थी, जो बेदी अस्पताल की मूल बोली से लगभग ₹6 करोड़ अधिक थी।
जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
इसमें चंडीगढ़ प्रशासन ने एक जमीन की ई-नीलामी से पीछे हटने का फैसला लिया था, क्योंकि उनका मानना था कि प्रतिवादी (बेदी अस्पताल) द्वारा लगाई गई सबसे ऊंची बोली भी बाजार के रुझानों के अनुरूप नहीं है।
Case Title : SATINDER PAL SINGH & ORS. VERSUS BEDI HOSPITAL & ORS

