सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (26 अक्टूबर, 2026 से 30 अक्टूबर, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

महाराष्ट्र में बिना लाइसेंस साहूकार नहीं चला सकेंगे चेक बाउंस का मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शुरुआत में ही पेश करना होगा लाइसेंस

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में बिना लाइसेंस के कर्ज देने वाले साहूकार चेक बाउंस के मामलों में कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में उन्हें मुकदमे की शुरुआत में ही अपना साहूकारी लाइसेंस पेश करना होगा। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र में प्रॉमिसरी नोट के आधार पर दिए गए कर्ज की वसूली के लिए चेक बाउंस या दीवानी मुकदमा दायर करने पर संबंधित कानून के प्रावधान लागू होंगे।

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने गुरुवार (29 अक्टूबर) को एक विविध आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। यह आवेदन व्योमेश महीपात्राय शाह ने दायर किया था। आवेदक को आशंका थी कि सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले का हवाला देकर महाराष्ट्र में बिना लाइसेंस वाले साहूकार भी चेक बाउंस के मुकदमे चला सकते हैं।

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बैंक की लापरवाही से 'साइबर फ्रॉड' या 'डिजिटल अरेस्ट' का शिकार होने वालों को बैंक देगा मुआवजा: सुप्रीम कोर्ट

'डिजिटल अरेस्ट' के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई क्लाइंट 'डिजिटल अरेस्ट' या साइबर फ्रॉड का शिकार होता है, और इसमें बैंक या उसके अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो बैंक को इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम की बढ़ती घटनाओं पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेकर सुनवाई कर रही थी।

Case Details : In Re: Victims of Digital Arrest Related to Forged Documents, SMW (Crl.) 3/2025

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Income Tax | अगर धारा 143(2) के तहत नोटिस जारी नहीं किया गया तो पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आयकर विभाग (Revenue) किसी करदाता को आयकर अधिनियम की धारा 143(2) के तहत नोटिस नहीं भेजता है, तो पुनर्मूल्यांकन की पूरी कार्यवाही अमान्य हो जाएगी।

कोर्ट ने कहा, "अधिनियम की धारा 143(2) के तहत नोटिस देना अनिवार्य है, क्योंकि यह करदाता को ऐसे सबूत या जानकारी पेश करने का मौका देता है, जिसके आधार पर वह राहत का दावा कर रहा है। धारा 147 के तहत पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही शुरू करने के लिए धारा 143(2) का नोटिस होना एक अनिवार्य शर्त है। अगर धारा 143(2) के तहत नोटिस नहीं दिया गया तो आयकर विभाग आगे कोई कार्यवाही नहीं कर सकता।"

Case Title : PRINCIPAL COMMISSIONER OF INCOME TAX, BHUBANESHWAR VERSUS ORISSA MINING CORPORATION LTD. (with connected matters)

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पीड़िता और आरोपी के बीच केवल 'समझौते' के आधार पर रेप केस रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश खारिज किया। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर रेप केस रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों को केवल एक समझौते के आधार पर रद्द करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वे आरोपी को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे रहे थे और मामले में ट्रायल (मुकदमा) आगे बढ़ाने का निर्देश दे रहे थे। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कैसे पैसों के लालच में झूठी शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं, या फिर दबाव डालकर समझौते किए जाते हैं।

Case Title : Gopal Lodhi v State of MP & Anr

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कारगिल में तैनात सैनिक को 'युद्ध चोट पेंशन' देने का फैसला बक़रार, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की केंद्र सरकार की आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (28 अक्टूबर) को पूर्व सैनिक को 'युद्ध चोट पेंशन' (War Injury Pension) देने के फैसले को बरकरार रखा। यह पेंशन उन्हें उस बीमारी के लिए दी गई है, जो 'ऑपरेशन रक्षक' के तहत कारगिल में उनकी तैनाती के दौरान हुई थी।

जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने केंद्र सरकार की उस अपील को खारिज किया, जिसमें हाईकोर्ट और आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत पूर्व सैनिक को 'विकलांगता पेंशन' (Disability Pension) की जगह 'युद्ध चोट पेंशन' देने का फैसला लिया गया था।

Case Title : UNION OF INDIA & ORS. VERSUS NARENDER KUMAR

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अलग-अलग अपराधों में उम्रकैद की सजा लगातार नहीं चल सकती, एक मामले में छूट से दूसरे की सजा खत्म नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अलग-अलग अपराधों में दी गई उम्रकैद की सजाएं लगातार यानी एक के बाद एक नहीं चल सकतीं। हालांकि, दोनों सजाओं को इस तरह एक-दूसरे के ऊपर लागू किया जा सकता है कि एक अपराध में सजा में छूट या उसे कम किए जाने से दूसरे अपराध की उम्रकैद अपने आप समाप्त न हो।

जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने 2016 में संविधान पीठ द्वारा दिए गए मुथुरामलिंगम एवं अन्य बनाम राज्य फैसले पर भरोसा करते हुए यह टिप्पणी की।

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UAPA | सिर्फ विदेशी नागरिक होने के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता, भारत में अवैध प्रवेश साबित करना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (27 अक्टूबर) को कहा कि 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) के तहत किसी विदेशी नागरिक को जमानत देने पर कोई रोक नहीं है। भारत सरकार की अपील खारिज करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें श्रीलंका का नागरिक होने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दी गई थी।

Case Title : UNION OF INDIA VERSUS MOHAMED RIFAS @ MOHAMED RIGBAS

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