चुनाव में गलत हलफनामा देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ RP Act की धारा 125A के तहत निजी शिकायत दर्ज करा सकते हैं मतदाता: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
19 Oct 2026 11:45 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिक, चुने गए उम्मीदवारों के खिलाफ 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act, 1951) की धारा 125A के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें यह आरोप लगाया जा सकता है कि उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी दी है या कोई जानकारी छिपाई है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि ऐसी शिकायतों पर 'दंड प्रक्रिया संहिता, 1973' (CrPC) की धारा 195(1) के तहत लगी पाबंदियां लागू नहीं होतीं। धारा 195(1) के तहत कुछ खास अपराधों के लिए केवल संबंधित लोक सेवक (Public Servant) द्वारा ही शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 195(1) में 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' की धारा 125A शामिल नहीं है। धारा 125A उन उम्मीदवारों को सजा देने का प्रावधान करती है, जो जानबूझकर अपने नामांकन पत्रों या हलफनामों में गलत जानकारी देते हैं या कोई जानकारी छिपाते हैं।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
"अगर विधायिका का इरादा यह होता कि चुनाव जीतने के मकसद से हलफनामे में गलत जानकारी देने के अपराध पर केवल तभी संज्ञान लिया जा सकता है, जब शिकायतकर्ता कोई लोक सेवक हो, तो इसे CrPC की धारा 195 में संशोधन करके स्पष्ट किया जा सकता था।"
फैसला लिखने वाले जस्टिस दत्ता ने बताया कि धारा 125A को 2002 में जोड़ा गया, जबकि CrPC की धारा 195 में 2006 में संशोधन किया गया। कोर्ट ने कहा कि विधायिका ने धारा 195 के तहत आने वाले अपराधों की सूची में धारा 125A को शामिल नहीं किया। इसे जानबूझकर छोड़ा गया माना जाना चाहिए।
कोर्ट ने आगे कहा कि किसी भी कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो यह कहे कि धारा 125A के तहत अपराध की शिकायत केवल कोई लोक सेवक ही दर्ज करा सकता है। कोर्ट ने धारा 125A के उस प्रावधान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि इसमें तय की गई सजा "उस समय लागू किसी अन्य कानून में दी गई किसी भी बात के बावजूद" लागू होगी। यह फैसला राजकुमार मडकी द्वारा दायर एक अपील पर आया है। मडकी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें डॉ. शैलेंद्र बेलडाले के खिलाफ उनकी आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया गया था। डॉ. बेलडाले कर्नाटक विधानसभा के सदस्य हैं, जो 2023 में बीदर निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए।
मडकी ने आरोप लगाया कि बेलडाले ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दिए गए हलफनामे में अपने आवासीय पते के बारे में गलत जानकारी दी थी। उन्होंने बेंगलुरु में अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष CrPC की धारा 200 के तहत शिकायत दर्ज कराई, जिसमें 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' (Representation of the People Act) की धारा 125A के तहत अपराध का आरोप लगाया गया।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस शिकायत को खारिज कर दिया। अदालत का मानना था कि CrPC की धारा 195(1) के तहत प्रतिबंध लागू होते हैं। ऐसी शिकायत केवल भारत निर्वाचन आयोग या संबंधित लोक सेवक द्वारा ही दर्ज की जा सकती है, न कि किसी निजी व्यक्ति द्वारा।
सुप्रीम कोर्ट में बेलडाले के वकील ने तर्क दिया कि अगर निजी शिकायतों को अनुमति दी जाती है तो इससे चुने गए उम्मीदवारों के खिलाफ बेबुनियाद आपराधिक मामले दर्ज करने को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे धारा 125A का मूल उद्देश्य ही खत्म हो सकता है। वकील ने जून 2020 में जारी निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि आयोग उम्मीदवारों के हलफनामों में गंभीर कमियों से जुड़ी शिकायतों पर संज्ञान लेगा और उन्हें हर मामले की गंभीरता के आधार पर जांच एजेंसियों को सौंपेगा।
हाईकोर्ट द्वारा अपनाए गए कानूनी आधार खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रावधानों की व्याख्या करने के मामले में निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देश और प्रेस नोट अदालतों पर बाध्यकारी नहीं हैं।
खंडपीठ ने टिप्पणी की,
"कानूनों की व्याख्या करना मुख्य रूप से अदालतों का काम है।"
हालांकि, अदालत ने बेलडाले के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को फिर से शुरू नहीं किया। अदालत ने पाया कि उनके आवासीय पते से जुड़े आरोपों को रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया (prima facie) गलत साबित किया जा चुका है। इसमें सजा मिलने की संभावना बहुत कम है। अदालत ने कहा कि इस कार्यवाही को जारी रखने से केवल न्यायिक समय ही बर्बाद होगा।
इस प्रकार, खंडपीठ ने शिकायत खारिज करने का हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। हालांकि इसके कारण अलग थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेटों के पास यह अधिकार है कि वे बेबुनियाद शिकायतों या चुने गए उम्मीदवारों को परेशान करने के लिए शुरू की गई कार्यवाहियों से उचित तरीके से निपट सकें; यह हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अपील का निपटारा इन शर्तों पर किया गया, और पक्षों को अपना-अपना खर्च स्वयं उठाने का निर्देश दिया गया।
Case Title : Rajkumar Madki v. Dr. Shailendra Beldale

