सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 3जी की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 3जी की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 (National Highways Act) की धारा 3जी की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाल रिट याचिका पर नोटिस जारी किया।रिट याचिका एक्ट की धारा 3जी(5) की वैधता पर सवाल उठाती है। यह धारा भूमि अधिग्रहण होने पर भूमि मालिकों को देय मुआवजे की राशि पर विवादों को हल करने के लिए आर्बिट्रेशन को अनिवार्य बनाती है। आर्बिट्रेशन का संचालन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा किया जाना है।याचिकाकर्ता का तर्क है कि एक्ट...

अत्यधिक जुर्माना और ई-फाइलिंग की अनुमति देने से इनकार करने की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने APTEL से रिपोर्ट मांगी
अत्यधिक जुर्माना और ई-फाइलिंग की अनुमति देने से इनकार करने की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने APTEL से रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने (18 जनवरी को) उस मामले में नोटिस जारी किया, जिसमें विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा 20,000/- रुपये से 25,000/- रुपये तक का जुर्माना लगाने के संबंध में चिंता जताई गई, भले ही इसमें एक दिन की देरी हो या उस से भी अधिक।इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि ई-फिलिंग की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद इसकी अनुमति नहीं दी गई। याचिकाकर्ता ने आगे इसे कार्यवाही दाखिल करने में देरी का कारण बताया।जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने...

Bilkis Bano case: आत्मसमर्पण के लिए समय-सीमा बढ़ाने के लिए दोषियों के बताए कारणों पर आज होगी सुनवाई
Bilkis Bano case: आत्मसमर्पण के लिए समय-सीमा बढ़ाने के लिए दोषियों के बताए कारणों पर आज होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट बिलकिस बानो मामले में दोषियों द्वारा जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए समय बढ़ाने की मांग को लेकर दायर कई अर्जियों पर सुनवाई करेगा।पिछले हफ्ते, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात सांप्रदायिक दंगों की पृष्ठभूमि में कई हत्याओं और सामूहिक बलात्कारों के लिए आजीवन कारावास की सजा पाए 11 दोषियों की समयपूर्व रिहाई की अनुमति देने वाले गुजरात सरकार द्वारा पारित छूट के आदेशों को रद्द कर दिया था।1992 की छूट नीति के तहत केवल 14 साल की सजा काटने के बाद अगस्त,...

सवाल यह है कि देश के लिए क्या अच्छा है: सुप्रीम कोर्ट ने जीएम सरसों की रिलीज के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
'सवाल यह है कि देश के लिए क्या अच्छा है': सुप्रीम कोर्ट ने जीएम सरसों की रिलीज के खिलाफ याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) सरसों, जिसे 'एचटी मस्टर्ड डीएमएच-11' नाम दिया गया, उसकी व्यावसायिक रूप से खेती/जारी करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी गई।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने पिछले साल मई में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी के रिटायर्डमेंट के बाद 9 जनवरी को मामले की सुनवाई शुरू की थी, जो मूल रूप से इस मामले की अध्यक्षता करने वाली पीठ का नेतृत्व कर रहे थे।पिछले दो सप्ताहों में पक्षों...

क्या SFIO अधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत पुलिस अधिकारी हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कानून के प्रश्न को खुला छोड़ दिया
क्या SFIO अधिकारी दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत पुलिस अधिकारी हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कानून के प्रश्न को खुला छोड़ दिया

सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा दायर शिकायत रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए कानून का महत्वपूर्ण प्रश्न खुला छोड़ दिया, यानी कि क्या SFIO आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत पुलिस अधिकारी हैं।जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की खंडपीठ के सामने उक्त मामला रखा गया।हाईकोर्ट ने अपने विवादित आदेश में निष्कर्ष निकाला कि सीआरपीसी और कंपनी एक्ट (Company Act) के प्रावधानों के संयुक्त और सामंजस्यपूर्ण अध्ययन से यह नहीं कहा जा सकता कि SFIO को आईपीसी के तहत...

Gujarat Encounters | जस्टिस एचएस बेदी की जांच रिपोर्ट में पहचाने गए पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता
Gujarat Encounters | जस्टिस एचएस बेदी की जांच रिपोर्ट में पहचाने गए पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता

2002-2007 के दौरान गुजरात पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई फर्जी मुठभेड़ हत्याओं से संबंधित याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि जस्टिस एचएस बेदी की अगुवाई वाली निगरानी समिति की रिपोर्ट में कुल 17 में से 3 मामलों में गड़बड़ी पाई गई। इस प्रकार, रिपोर्ट में पहचाने गए पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने दलीलों की संक्षिप्त सुनवाई के बाद मामले को 2 सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।वर्तमान याचिकाएं पत्रकार बीजी वर्गीस (अब...

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को 30 अप्रैल तक कमजोर गवाह बयान केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को 30 अप्रैल तक कमजोर गवाह बयान केंद्र स्थापित करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को सभी जिलों में कमजोर गवाह बयान केंद्र (VWDC) स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया 30 अप्रैल 2024 को या उससे पहले पूरी होनी चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ महाराष्ट्र राज्य बनाम बंदू @ दौलत (2018) 11 एससीसी 163 मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में कमजोर गवाह कोर्ट रूम स्थापित करने की आवश्यकता पर विविध आवेदन पर सुनवाई कर रही थी।सुप्रीम...

Congress MLA सुखपाल सिंह खैरा को सुप्रीम कोर्ट से ड्रग व्यापार मामले में राहत, जमानत के खिलाफ पंजाब राज्य की याचिका खारिज
Congress MLA सुखपाल सिंह खैरा को सुप्रीम कोर्ट से ड्रग व्यापार मामले में राहत, जमानत के खिलाफ पंजाब राज्य की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 जनवरी) को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मामले में Congress MLA सुखपाल सिंह खैरा को दी गई जमानत के खिलाफ पंजाब राज्य द्वारा दायर याचिका खारिज की।जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ पंजाब राज्य द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ड्रग व्यापार मामले में खैरा को जमानत देने के पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 4 जनवरी के आदेश को चुनौती दी गई थी।सुनवाई काफी हद तक...

सीआरपीसी की धारा 197 केवल लोक सेवक के आधिकारिक कर्तव्य पर ही लागू होगी, दस्तावेज गढ़ना आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सीआरपीसी की धारा 197 केवल लोक सेवक के आधिकारिक कर्तव्य पर ही लागू होगी, दस्तावेज गढ़ना आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (17 जनवरी) को एक आपराधिक अपील पर फैसला करते हुए कहा कि फर्जी दस्तावेज बनाने के कृत्य के लिए किसी लोक सेवक पर मुकदमा चलाने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के अनुसार अभियोजन की पूर्व मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि कथित कृत्य उनके आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं हैं।इस मामले में हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 197 के तहत पूर्व अनुमति के अभाव में लोक सेवक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया था।हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस...

जजों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए जेल की सजा पाए वकील द्वारा मांगी गई माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया
जजों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए जेल की सजा पाए वकील द्वारा मांगी गई माफी पर सुप्रीम कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (16 जनवरी) को उस वकील द्वारा मांगी गई माफी की प्रकृति पर असंतोष व्यक्त किया, जिसे अपनी दलील के दौरान ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए हिरासत में रखा गया है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने वकील द्वारा दायर माफी का जिक्र करते हुए कहा,“वह कहते हैं कि मैं यह गलती से कह रहा हूं.. यह माफी नहीं है.. वह कैसे कह सकते हैं कि यह पूरी न्यायपालिका के प्रति अनजाने और सद्भावनापूर्ण है।”सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला...

Bilkis Bano Case: सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के आत्मसमर्पण के लिए समय बढ़ाने के आवेदन को सूचीबद्ध करने के लिए सीजेआई से निर्देश मांगा
Bilkis Bano Case: सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के आत्मसमर्पण के लिए समय बढ़ाने के आवेदन को सूचीबद्ध करने के लिए सीजेआई से निर्देश मांगा

सुप्रीम कोर्ट गुरुवार (18 जनवरी) को बिलकिस बानो मामले में जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करने वाले तीन दोषियों द्वारा दायर आवेदनों पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया।जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली खंडपीठ के समक्ष तीनों दोषियों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट वी चितांबरेश ने मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की, क्योंकि आत्मसमर्पण करने का समय रविवार, 21 जनवरी को समाप्त हो रहा है।जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि बिलकिस बानो मामले में फैसला सुनाने वाली...

जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल जुड़ा हो तो एक दिन की देरी भी मायने रखती है: सुप्रीम कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लंबित रखने के लिए हाईकोर्ट की आलोचना की
जब किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल जुड़ा हो तो एक दिन की देरी भी मायने रखती है: सुप्रीम कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लंबित रखने के लिए हाईकोर्ट की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने अपने माता-पिता द्वारा कस्टडी में ली गई 25 वर्षीय महिला को रिहा करते हुए मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दिखाए गए संवेदनहीन रवैये पर नाराजगी व्यक्त की। महिला के यह कहने के बावजूद कि वह दुबई लौटना चाहती है, जहां से उसके माता-पिता उसे ले गए हैं, हाईकोर्ट ने उसे तत्काल प्रभाव से मुक्त नहीं किया और मामले को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि मामले को हाईकोर्ट ने 14 मौकों पर स्थगित किया और उसके बाद 2025 तक के लिए स्थगित कर...

सुप्रीम कोर्ट का SCBA मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के चुनावों पर रोक लगाने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट का SCBA मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के चुनावों पर रोक लगाने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (17 जनवरी) को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव ग्रुप-हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के 18 जनवरी, 2024 को होने वाले चुनावों पर रोक लगाने से इनकार किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ नेयाचिकाकर्ता के वकील द्वारा याचिका का मौखिक रूप से उल्लेख किए जाने के बाद मामले की तत्काल सुनवाई की।याचिकाकर्ता ने 16 जनवरी के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी, जिसने SCBA मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव ग्रुप-हाउसिंग...

Bhima Koregaon Case | सुप्रीम कोर्ट ने ज्योति जगताप की जमानत याचिका को शोमा सेन की अपील के साथ टैग करने का निर्देश दिया
Bhima Koregaon Case | सुप्रीम कोर्ट ने ज्योति जगताप की जमानत याचिका को शोमा सेन की अपील के साथ टैग करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (17 जनवरी) को कार्यकर्ता और भीमा कोरेगांव की आरोपी ज्योति जगताप की जमानत याचिका को सह-आरोपी शोमा कांति सेन की अपील के साथ टैग करने और एक साथ सुनवाई करने का निर्देश दिया।जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ जगताप की जमानत याचिका खारिज करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पुणे के भीमा कोरेगांव में 2018 में हुई जाति-आधारित हिंसा और प्रतिबंधित लोगों के साथ कथित संबंध रखने के सिलसिले में गिरफ्तार होने के बाद वह...

सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप नेता सत्येन्द्र जैन की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया
सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप नेता सत्येन्द्र जैन की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया

चार दिन की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (17 जनवरी) को आम आदमी पार्टी (AAP) नेता और पीएमएलए के आरोपी सत्येन्द्र जैन की जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।जैन को केंद्रीय एजेंसी ने मई 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन पर अन्य लोगों के साथ 2010-12 और 2015-16 के दौरान तीन कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया।जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मित्तल की खंडपीठ ने उन्हें जमानत देने से इनकार करने के अप्रैल 2023 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के...

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर स्थगन पत्र प्रसारित करने की परंपरा फिर से शुरू करने की मांग की
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर स्थगन पत्र प्रसारित करने की परंपरा फिर से शुरू करने की मांग की

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को 281 वकीलों ने पत्र लिखकर किसी मामले को सूचीबद्ध होने से एक दिन पहले स्थगन पत्र या पर्चियां प्रसारित करने की परंपरा को अगले आदेश तक बंद करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई।पिछले साल, वार्षिक शीतकालीन अवकाश से पहले सुप्रीम कोर्ट ने "मुकदमदारों के हित में" स्थगन मांगने की प्रक्रिया में बदलाव को अधिसूचित किया। 5 दिसंबर को जारी सर्कुलर ने वर्ष के अंतिम कार्य दिवस तक स्थगन पत्र या पर्चियां प्रसारित करने की मौजूदा परंपरा पर रोक लगा दी।सुप्रीम...

Chandrababu Naidu Case: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट के जजों में मतभेद क्यों?
Chandrababu Naidu Case: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट के जजों में मतभेद क्यों?

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नदी द्वारा दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 संशोधन से पहले मौजूद अपराधों के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention Of Corruption Act (PC ACt)) की धारा 17ए के पूर्वव्यापी आवेदन पर बंटा हुआ फैसला सुनाया।जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने कहा कि एक्ट की धारा 17ए के तहत पिछली मंजूरी पूर्वव्यापी रूप से लागू होगी।जस्टिस बेला त्रिवेदी ने असहमति जताई।एक्ट की धारा 17ए को 26 जुलाई, 2018 से संशोधन द्वारा पेश किया गया और प्रावधान पुलिस अधिकारी के लिए किसी भी...