ताज़ा खबरे
संपत्ति में रुचि रखने वाले पक्ष को पंजीकरण तिथि से सेल डीड के बारे में पता होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने 45 वर्ष बाद दायर बंटवारा मुकदमा खारिज किया
यह देखते हुए कि परिसीमा अवधि सेल डीड के रजिस्ट्रेशन की तिथि से शुरू होती है, जो रचनात्मक सूचना का गठन करती है, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को सेल डीड रजिस्ट्रेशन के 45 वर्ष बाद दायर बंटवारा मुकदमे में डिक्री बरकरार रखने का हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।सूरज लैंप इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड बनाम हरियाणा राज्य और अन्य (2012) 1 एससीसी 656 का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि सेल डीड का रजिस्ट्रेशन सार्वजनिक सूचना का गठन करता है। 12 वर्ष (सीमा अधिनियम, 1963 की धारा 65) के बाद दायर बंटवारा...
जस्टिस यशवंत वर्मा को शपथ दिलाने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर, उनके तबादले के आदेश को रद्द करने की मांग
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिसमें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को न्यायाधीश यशवंत वर्मा को पद की शपथ दिलाने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई है, जो वर्तमान में अपने आधिकारिक आवासीय परिसर में अवैध नकदी रखने के आरोपों पर इन-हाउस जांच का सामना कर रहे हैं। अधिवक्ता विकास चतुर्वेदी द्वारा दायर की गई जनहित याचिका में कहा गया है कि न्यायमूर्ति वर्मा का स्थानांतरण और प्रस्तावित शपथ संविधान का उल्लंघन है।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि यह स्पष्ट नहीं है कि "वह कौन...
एमपी हाईकोर्ट ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र दाखिल करने पर मलेरिया तकनीकी पर्यवेक्षक को हटाने का आदेश दिया
शिवपुरी में मलेरिया तकनीकी पर्यवेक्षक को तत्काल हटाने का आदेश देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी सेवा की चयन प्रक्रिया में चयन समिति में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज दाखिल करने पर चिंता व्यक्त की और इसे एक गंभीर मुद्दा बताया, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।ऐसा करते हुए न्यायालय ने मलेरिया तकनीकी पर्यवेक्षक के पद पर उम्मीदवार के चयन को यह पाते हुए रद्द कर दिया कि उसने "जाली अनुभव प्रमाण पत्र" दाखिल किया था।जस्टिस गुरपाल सिंह आहलूवालिया ने अपने आदेश में कहा,"चयन समिति में धोखाधड़ी करना या जाली...
विसंगतियों को दूर करने के लिए बायोमेट्रिक्स आवश्यक, लेकिन मशीन द्वारा किसी व्यक्ति को पहचानने में विफलता उसके मौलिक अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति के कानूनी और मौलिक अधिकारों को केवल बायोमेट्रिक मशीन द्वारा उसे पहचानने में विफलता के कारण सीमित नहीं किया जा सकता।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने कहा,"इस संबंध में इस न्यायालय का विचार है कि यद्यपि यह सत्य है कि रिकॉर्ड में किसी भी विसंगति को दूर करने और चयन की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आजकल बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया आवश्यक है। तथापि, यह भी सत्य है कि बायोमेट्रिक सत्यापन हमेशा विसंगतियों को दूर करने में...
कोई सार्वभौमिक नियम नहीं कि पद के लिए मूल पात्रता से अधिक योग्य उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अति-योग्यता अपने आप में अयोग्यता नहीं है, हालांकि ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है कि किसी पद के लिए आवश्यक बुनियादी योग्यता से अधिक योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सीधा-सादा नियम नहीं है कि बुनियादी योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों के बजाय उच्च योग्यता प्राप्त उम्मीदवारों को चुना जाना चाहिए। प्रत्येक मामला उसके तथ्यों, चयन प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले नियमों, किए जाने वाले कर्तव्य की प्रकृति आदि पर निर्भर करेगा।कोर्ट ने कहा,...
सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ शराब दुकानों के आवंटन पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की अंतरिम रोक को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार ( एक अप्रैल) को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें चंडीगढ़ आबकारी नीति 2025-2026 के तहत शराब की दुकानों के आवंटन पर रोक लगाई गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते समय कोई कारण दर्ज नहीं किया था।कोर्ट ने कहा,“यदि वास्तव में हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला पाया था और अन्य शर्तें, जैसे सुविधा/असुविधा का संतुलन और अपूरणीय क्षति और चोट को झेलना, भी इस...
Delhi LG वीके सक्सेना द्वारा दायर मानहानि मामले में मेधा पाटकर की दोषसिद्धि बरकरार
दिल्ली कोर्ट ने बुधवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने 2001 में विनय कुमार सक्सेना द्वारा उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती दी।वीके सक्सेना वर्तमान में दिल्ली के उपराज्यपाल (Delhi LG) हैं।साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशन जज विशाल सिंह ने पाटकर की याचिका खारिज की और मामले में उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी।अदालत ने कहा,“मुकदमे के दौरान प्रतिवादी द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों से यह संदेह से परे साबित हो गया कि...
सुप्रीम कोर्ट ने गांवों में पब्लिक लाइब्रेरी स्थापित करने का निर्देश देने से मना किया, कहा- साफ पानी, भोजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छता ज्यादा जरूरी चिंताएं
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (2 अप्रैल) को राज्य सरकारों को ग्रामीण क्षेत्रों में पब्लिक लाइब्रेरी स्थापित करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ जल, भोजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दे ग्रामीण विकास के लिए अधिक आवश्यक चिंता बने हुए हैं और न्यायालय यह निर्देश नहीं दे सकता कि संसाधनों का आवंटन कैसे किया जाना चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने राज्य सरकारों से ग्रामीण क्षेत्रों में पब्लिक लाइब्रेरियों की कमी के लिए संभावित समाधान तलाशने का आग्रह किया और सुझाव...
प्लास्टिक के फूल प्रतिबंधित वस्तु नहीं: प्लास्टिक के फूलों पर प्रतिबंध लगाने की याचिका में केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया
महाराष्ट्र में प्लास्टिक के फूलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका में केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि प्लास्टिक के फूलों के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्हें एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के रूप में प्रतिबंधित नहीं किया गया।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 11 सितंबर 2023 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) को लिखे गए पत्र के मद्देनजर भारत संघ (UOI) ने यह दलील दी है, CPCB ने प्रतिबंधित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं की सूची में प्लास्टिक...
BREAKING | 12 घंटे लंबी बहस के बाद Waqf (Amendment) Bill, 2025 लोकसभा में पारित
लगभग 12 घंटे तक चली गहन बहस के बाद वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 (Waqf (Amendment) Bill) को आधी रात के बाद लगभग 2 बजे लोकसभा में पारित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कल (2 अप्रैल) को लोकसभा में विधेयक पेश किया। विधेयक के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 मत पड़े।वक्फ किसी भी व्यक्ति द्वारा मुस्लिम कानून द्वारा पवित्र, धार्मिक या धर्मार्थ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी भी उद्देश्य के लिए स्थायी समर्पण है। वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को पिछले साल 8 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था।...
BRS MLAs' Defection | 'स्पीकर अगर वर्षों तक अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय नहीं लेते तो क्या अदालत को अपने हाथ बांध लेने चाहिए?' : सुप्रीम कोर्ट
तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में बीआरएस विधायकों के दलबदल और उसके परिणामस्वरूप अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की गई देरी से संबंधित मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने आज मौखिक रूप से टिप्पणी की कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पास एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है, जिसमें स्पीकर को केवल 4 सप्ताह के भीतर अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए समय-सारिणी तय करने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने मामले की सुनवाई...
मुकदमे में मुद्दों के निर्धारण पर अतिरिक्त शुल्क : धारा 12 राजस्थान कोर्ट फीस और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961
न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई बार ऐसे मुद्दे (Issues) उत्पन्न होते हैं, जिनके कारण पक्षकार को अतिरिक्त शुल्क (Additional Fee) जमा करना पड़ता है।राजस्थान कोर्ट फीस और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 (Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961) की धारा 12 (Section 12) में इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। यह धारा कहती है कि यदि मुकदमे के दौरान कोई नया मुद्दा जुड़ता है, जिससे किसी पक्षकार को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता...
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001: अपीलीय किराया न्यायाधिकरण, अपीलऔर उनकी सीमाएं – भाग 1 धारा 19
राजस्थान किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 (Rajasthan Rent Control Act, 2001) के तहत, किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के निर्णयों के विरुद्ध अपील (Appeal) करने के लिए अपीलीय किराया न्यायाधिकरण (Appellate Rent Tribunal) का प्रावधान किया गया है। धारा 19 (धारा 19) यह निर्धारित करता है कि राज्य सरकार (State Government) आवश्यकतानुसार अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन करेगी, उनके अधिकार क्षेत्र को निर्धारित करेगी, और उनकी कार्यवाही से संबंधित नियम बनाएगी।अपीलीय किराया न्यायाधिकरण का गठन (Constitution of...
दंडित व्यक्ति को निर्णय की प्रति देने का अधिकार: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 404
न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) में पारदर्शिता (Transparency) और न्याय के अधिकार (Right to Justice) को सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि अभियुक्त (Accused) को उसके खिलाफ दिए गए निर्णय (Judgment) की जानकारी पूरी तरह से उपलब्ध कराई जाए।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 404 यह प्रावधान करती है कि यदि किसी अभियुक्त को कारावास (Imprisonment) या मृत्युदंड (Death Sentence) दिया जाता है, तो उसे न्यायालय द्वारा पारित निर्णय की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) तुरंत और मुफ्त में प्रदान की...
क्या Homebuyer को Consumer कानून होते हुए भी Arbitration में जाने के लिए मजबूर किया जा सकता है?
Experion Developers बनाम Sushma Ashok Shiroor (2022) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने consumer अधिकारों, arbitration (मध्यस्थता) और real estate agreements (अचल संपत्ति समझौते) में arbitration clauses की वैधता से जुड़े अहम कानूनी मुद्दों पर विचार किया।इस मामले में यह तय किया गया कि क्या एक homebuyer (गृह खरीदार), जिसे Consumer Protection Act, 1986 और 2019 द्वारा सुरक्षा दी गई है, को केवल इसलिए arbitration में जाने के लिए मजबूर किया जा सकता है क्योंकि उसके और developer (विकासकर्ता) के बीच ऐसा agreement...
मोहम्मद जुबैर के खिलाफ POCSO मामले में ट्वीट को लेकर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को सूचित किया कि राज्य पुलिस ने ऑल्ट-न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ दर्ज POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश की, जो 2020 में उनके द्वारा किए गए एक ट्वीट से संबंधित है।राज्य के वकील ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष यह दलील दी, जिसके बाद खंडपीठ ने जुबैर द्वारा दायर याचिका का निपटारा किया, जिसमें उन्होंने IT Act, IPC और POCSO Act के तहत दर्ज FIR रद्द...
अनिवार्य पूर्व-विवाद मध्यस्थता को उचित आधार के बिना तत्काल अंतरिम राहत मांगकर दरकिनार करने का पूर्ण अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि कामर्शियल कोर्ट एक्ट के तहत किसी पक्षकार को यह पूर्ण स्वतंत्रता नहीं है कि वह बिना उचित कारण बताए केवल अंतरिम राहत की मांग कर कानूनी रूप से अनिवार्य पूर्व-विवाद मध्यस्थता की प्रक्रिया को दरकिनार कर सके।अदालत एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिनियम की धारा 12-A के तहत मध्यस्थता प्रक्रिया से छूट की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि प्रतिवादियों ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर धोखाधड़ी से उसे अनुबंध करने के लिए मजबूर किया था और प्रतिवादियों द्वारा...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने लाॅ प्रोफेसर से अभद्रता के आरोप में एडवोकेट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही पर लगाई रोक
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश के माध्यम से कर्नाटक राज्य बार काउंसिल द्वारा एक एडवोकेट के खिलाफ पेशेवर कदाचार के आरोप में शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी। यह कार्रवाई एक विधि प्रोफेसर की शिकायत के बाद की गई थी, जिसमें कहा गया था कि एडवोकेट ने उन्हें 'बंदर और गधा' कहा था। एडवोकेट ने न्यायालय का रुख कर पूरी कार्यवाही, जारी किए गए नोटिस और लाॅ प्रोफेसर द्वारा दर्ज की गई शिकायत को रद्द करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि उत्तरदाता संख्या 2...
"पुलिस सीमाएं नहीं लांघ सकती" : सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों/यूटी के डीजीपी को निर्देश भेजे, सख्त कार्रवाई की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक आदेश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस कर्मियों को गिरफ्तारी के नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो अधिकारी गिरफ्तारी संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि हरियाणा पुलिस ने उन्हें अर्नेश कुमार दिशानिर्देशों का...
'CBI ने सबूत गढ़े': चंडीगढ़ कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में जस्टिस निर्मल यादव को इसलिए बरी किया!
पिछले हफ़्ते चंडीगढ़ के स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 2008 के भ्रष्टाचार मामले में जस्टिस निर्मल यादव को बरी कर दिया। 89 पन्नों के फ़ैसले में विशेष अदालत ने CBI के इस दावे को खारिज कर दिया कि जज ने 2008 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सेवा करते हुए 15 लाख रुपए नकद प्राप्त किए थे।गौरतलब है कि एजेंसी ने शुरू में मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, तत्कालीन CBI जज ने इसे स्वीकार नहीं किया और मामले में आगे की जांच के आदेश दिए।इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने जस्टिस यादव के ख़िलाफ़ 78 गवाह पेश...




















