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साक्ष्य दर्ज करने में भाषा की भूमिका: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 312
भारत में न्याय प्रक्रिया में साक्ष्य (Evidence) का दर्ज होना एक महत्वपूर्ण चरण है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bhartiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 312 यह सुनिश्चित करती है कि गवाही दर्ज करते समय भाषा से संबंधित कोई बाधा न्याय प्रक्रिया को प्रभावित न करे। इस लेख में हम सरल हिंदी में धारा 312 और इससे संबंधित प्रावधानों को समझेंगे। साथ ही, इसे समझने के लिए धारा 310 और 311 का भी उल्लेख करेंगे।भाषा और साक्ष्य दर्ज करने की आवश्यकता भारत जैसे बहुभाषी (Multilingual) देश में...
प्रतिवादी को मुकदमे में साक्ष्य आरंभ करने के लिए कब कहा जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने आदेश XVIII नियम 1 CPC की व्याख्या की
हाल ही में दिए गए एक निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने उन परिस्थितियों की व्याख्या की, जिनके अंतर्गत प्रतिवादी को सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश XVIII नियम 1 के अनुसार मुकदमे की सुनवाई आरंभ करने का अधिकार प्राप्त होता है।CPC के अनुसार, वादी को आरंभ करने का अधिकार है। हालांकि, यदि प्रतिवादी वादी द्वारा आरोपित तथ्यों को स्वीकार करता है और तर्क देता है कि वादी कुछ अतिरिक्त तथ्य या कानून के किसी बिंदु के कारण राहत का हकदार नहीं है, तो प्रतिवादी को आरंभ करने का अधिकार प्राप्त होता है।जस्टिस जे.बी....
जहाज में मौजूद संपत्ति की चोरी करना या उसका अनुचित उपयोग करना : धारा 328, भारतीय न्याय संहिता, 2023
Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023, में कई प्रकार के mischief (दुर्व्यवहार) को रोकने के लिए प्रावधान किए गए हैं जो संपत्ति, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।Section 328 विशेष रूप से उस अपराध को संबोधित करता है, जिसमें जानबूझकर किसी जहाज या vessel (नौका) को जमीन पर ले जाया जाता है या किनारे लगाया जाता है, जिसका उद्देश्य जहाज में मौजूद संपत्ति की चोरी करना या उसका अनुचित उपयोग करना होता है। यह प्रावधान समुद्री सुरक्षा और संपत्ति अधिकारों की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ...
धारा 18, आर्म्स अधिनियम, 1959 के तहत अपील का अधिकार
आर्म्स अधिनियम, 1959 (Arms Act, 1959) यह सुनिश्चित करता है कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण (Licensing Authority) के निर्णयों से प्रभावित व्यक्ति अपनी शिकायतों के समाधान के लिए अपील कर सकें। धारा 18 में अपील से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। यह प्रावधान न केवल प्रभावित व्यक्तियों को न्याय दिलाने का अवसर देता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण के फैसले पारदर्शी और निष्पक्ष हों।अपील का अधिकार: कौन और किन आदेशों के खिलाफ अपील कर सकता है?धारा 18 के तहत, किसी भी व्यक्ति को, जिसे...
क्या बिना अपराध दर्ज किए पुलिस किसी को बुला सकती है और हिरासत में ले सकती है?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल पर विचार किया: क्या पुलिस बिना अपराध दर्ज किए किसी व्यक्ति को पुलिस स्टेशन में बुला सकती है और हिरासत में रख सकती है?यह मामला M.A. Khaliq & Ors. बनाम Ashok Kumar & Anr. अवैध हिरासत (Illegal Detention) और काउंसलिंग (Counseling) के नाम पर अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा था। इसने पुलिस की जवाबदेही (Accountability) और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों (Constitutional Rights) को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया। कानूनी प्रावधान और...
सेशन कोर्ट में साक्ष्य रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 311
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita), 2023, ने न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य (Evidence) रिकॉर्डिंग की एक स्पष्ट व्यवस्था दी है।जहां धारा 307 से 310 तक साक्ष्य रिकॉर्डिंग के अन्य पहलुओं को शामिल किया गया है, वहीं धारा 311 विशेष रूप से सेशन कोर्ट (Court of Session) में होने वाले ट्रायल के दौरान साक्ष्य रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया पर केंद्रित है। सेशन कोर्ट में गंभीर अपराधों की सुनवाई होती है, इसलिए साक्ष्य रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया को सटीक और निष्पक्ष बनाए रखना अत्यंत...
Constitution में विधानसभा के सत्र के प्रावधान
कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में जिस तरह भारत की संसद के लिए सत्र की व्यवस्था की है इसी तरह राज्यों के विधान मंडल के लिए सत्र की व्यवस्था की है। आर्टिकल 174 के अनुसार राज्य विधान मंडल के प्रत्येक सदन को ऐसे समय तथा ऐसे स्थान पर जैसा वह उचित समझे अधिवेशन के लिए आहूत करेगा किंतु शर्त यह है कि गत सत्र के अंतिम दिन तथा अगले सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तिथि के बीच 6 माह से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि असेंबली कम से कम साल में दो बैठकें अवश्य करें तथा इसके मध्य का अंतर 6 महीने से...
Constitution में विधानसभा का उल्लेख
कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में संघ और राज्यों के बीच सामंजस के साथ बंटवारा किया है। भारत का संविधान एक संघीय संविधान है जिसके अंतर्गत भारत के राज्यों के लिए अलग व्यवस्था है और भारत के संघ के लिए अलग व्यवस्था है। भारत राज्यों का एक संघ है जिस प्रकार भारत के संघ को विधि निर्माण के संबंध में अधिकार कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया द्वारा दिए गए हैं इसी प्रकार भारत के राज्य को भी अपनी विधायी शक्ति दी गई है जिसके अंतर्गत राज्य के विधान मंडल राज्यों के लिए विधि निर्माण करते हैं। संविधान प्रत्येक राज्य के लिए एक...
रेलवे, विमान और बड़े जहाजों को नुकसान पहुंचाने वाली Mischief: भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 327
भारतीय न्याय संहिता 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) में Mischief से जुड़े अपराधों को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं। इनमें से धारा 327 विशेष रूप से रेलवे, विमान (Aircraft) और बड़े जहाजों जैसे महत्वपूर्ण परिवहन साधनों को नुकसान पहुंचाने से संबंधित है।इन अपराधों को गंभीर माना गया है क्योंकि यह सार्वजनिक सुरक्षा और संपत्ति को बड़ा खतरा पहुंचा सकते हैं। यह लेख धारा 327 के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाएगा और इसके संबंध में उदाहरणों के माध्यम से इसकी व्याख्या करेगा। धारा 327...
वारंट-प्रकरणों में साक्ष्य दर्ज और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का उपयोग करने के नियम : धारा 310 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों में साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है। जहां धारा 307 से 309 सामान्य प्रावधानों और समन-प्रकरणों (Summons-Cases) में साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया को कवर करती हैं, वहीं धारा 310 विशेष रूप से वारंट-प्रकरणों में साक्ष्य दर्ज करने के नियमों पर केंद्रित है। वारंट-प्रकरण गंभीर अपराधों (Serious Offences) से जुड़े होते हैं, इसलिए इन मामलों में साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया अधिक सावधानी और पारदर्शिता (Transparency) की मांग करती...
लाइसेंस के निलंबन, रद्दीकरण और अपील का विस्तार : आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 17
आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत लाइसेंसधारकों (Licence Holders) की जिम्मेदारी तय करने और सार्वजनिक सुरक्षा (Public Safety) बनाए रखने के लिए लाइसेंस के निलंबन (Suspension) और रद्दीकरण (Revocation) की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है। धारा 17 के पहले भाग में लाइसेंस निलंबित या रद्द करने के कारण बताए गए थे। इसके बाद के उपखंड (Sub-sections) 5 से 10 में प्रक्रिया (Procedure) और अधिकार (Powers) को और स्पष्ट किया गया है।लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण के कारणों को दर्ज करना (Recording of Reasons)धारा 17 के...
क्या केंद्र सरकार Enforcement Director के कार्यकाल का विस्तार कर सकती है?
सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण फैसले में यह सवाल उठाया गया कि क्या केंद्र सरकार Central Vigilance Commission Act, 2003 (CVC Act) के तहत Enforcement Directorate के Director का कार्यकाल (Tenure) बढ़ा सकती है, विशेषकर तब जब वह सेवानिवृत्ति (Superannuation) की आयु पार कर चुके हों। इस मामले में यह भी तय किया गया कि कार्यकाल का विस्तार कानून की मंशा (Legislative Intent) और संवैधानिक सिद्धांतों (Constitutional Principles) के अनुरूप है या नहीं। CVC Act के प्रावधान और Fundamental Rule 56 Central...
Constitution में गवर्नर की शक्तियां
कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में जिस तरह राष्ट्रपति को शक्तियां दी है उसी प्रकार गवर्नर को भी शक्तियां दी गई है। राष्ट्रपति की शक्तियों की तरह ही गवर्नर की शक्तियों को भी विभिन्न भागों में बांटा जा सकता है। जैसे कार्यपालिका शक्ति, वित्तीय शक्ति, विधायी शक्ति और न्यायिक शक्तियां।राज्य की कार्यपालिका शक्ति गवर्नर में निहित है जिसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा करता है। राज्य के समस्त कार्यपालिका कार्य गवर्नर के नाम पर ही किए जाते हैं। समस्त आज्ञा एवं लिखित गवर्नर के नाम विधिवत...
Constitution में स्टेट एग्जीक्यूटिव
भारत का कांस्टीट्यूशन एक संसदीय कांस्टीट्यूशन है जिसके अंतर्गत भारत को राज्यों का एक संघ घोषित किया गया है। संघ के पास अपनी शक्तियां अलग है और भारत के पृथक पृथक प्रांतों के पास अपनी शक्तियां अलग है।संघ और राज्यों के बीच शक्तियों को लेकर कोई विवाद न हो इस संबंध में कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में स्पष्ट उपबंध किए गए हैं। शक्तियों के संबंध में सभी राज्य और संघ के बीच कोई विवाद होता है तो उसका निपटारा संघ की न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जाता है। जिस प्रकार कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में संघ...
क्या नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पास स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति है?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भारत के पर्यावरण न्याय (Environmental Justice) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह तय किया गया कि क्या NGT को पर्यावरण से संबंधित मामलों में स्वत: संज्ञान (Suo Motu Powers) लेने का अधिकार है।यह फैसला यह निर्धारित करता है कि NGT बिना किसी औपचारिक आवेदन या याचिका (Petition) के पर्यावरणीय क्षति (Environmental Degradation) के मामलों में कार्रवाई कर सकता है या नहीं। NGT की भूमिका और अधिकार (Role and Mandate of NGT) NGT का...
साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 307 से 309
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अध्याय 25 में जांच (Inquiry) और ट्रायल के दौरान साक्ष्य (Evidence) दर्ज करने के तरीके को विस्तार से समझाया गया है। इसमें प्रक्रियात्मक (Procedural) स्पष्टता और न्याय के साथ अभियुक्त (Accused) के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है। यहां हम धारा 307 से 309 तक की सभी प्रावधानों को सरल भाषा में उदाहरण सहित समझाएंगे।धारा 307: अदालत की भाषा का निर्धारण (Determination of Court Language) धारा 307 राज्य सरकार को अधिकार देती है कि वह अपनी सीमा में सभी अदालतों, हाई...
जानवरों और सार्वजनिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाने के लिए Mischief : धारा 325 और 326 भारतीय न्याय संहिता 2023
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 325 और 326 उन शरारती कृत्यों (Mischief Acts) से संबंधित हैं जो जानवरों, सार्वजनिक संसाधनों या बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।इन प्रावधानों में जानबूझकर किए गए नुकसान और इसके परिणामस्वरूप मिलने वाली सजा का विवरण दिया गया है। इन धाराओं के तहत अपराध की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग दंड निर्धारित किए गए हैं। इस लेख में इन धाराओं को सरल भाषा में समझाया गया है, साथ ही प्रत्येक उपधारा के उदाहरण भी दिए गए हैं। धारा 325: जानवरों को नुकसान पहुंचाने की Mischief...
लाइसेंस की अवधि, शर्तों में बदलाव और रद्दीकरण के नियम : आर्म्स अधिनियम की धारा 16 और 17
धारा 16 के अंतर्गत, आर्म्स लाइसेंस (Licence) की फीस, शर्तें, और आवेदन के फॉर्म से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। लाइसेंस जारी करने या नवीनीकरण (Renewal) के लिए आवश्यक फीस और शर्तें कानून के तहत तय की जाती हैं। अलग-अलग प्रकार के लाइसेंस के लिए अलग-अलग फीस और शर्तें हो सकती हैं।उदाहरण के तौर पर, धारा 3 के तहत एक साधारण बंदूक (Smooth Bore Gun) के लाइसेंस की फीस, धारा 5 के तहत प्रतिबंधित हथियारों (Prohibited Arms) के लाइसेंस की फीस से अलग हो सकती है। इसके अतिरिक्त, लाइसेंसिंग अथॉरिटी (Licensing...
Constitution में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया का जज होने की योग्यता
भारत के सुप्रीम कोर्ट के जज पद पर नियुक्त होने के लिए किसी व्यक्ति के पास में कुछ योग्यताएं होना चाहिए। जैसे कि वह भारत का नागरिक होना चाहिए किसी हाई कोर्ट का लगातार कम से कम 5 वर्षों तक जज का होना चाहिए। किसी हाई कोर्ट में लगातार 10 वर्षों तक अधिवक्ता रहा होना चाहिए। राष्ट्रपति की राय में अच्छा विधिवेत्ता होना चाहिए।भारत के सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रह सकते हैं। जजों की आयु ऐसे अधिकारी द्वारा वृत्ति से आधारित की जाएगी जैसा कि संसद द्वारा उपबंध करें। कोई जज राष्ट्रपति...
Constitution में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की उत्पत्ति कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया से हुई है। कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया एक यूनियनीय यह कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया है। भारत को राज्यों का यूनियन कहा गया है और इस राज्यों के यूनियन के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। सरकारों की शक्तियों का विभाजन एक लिखित कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के द्वारा किया गया है ताकि भविष्य में सरकारों के बीच किसी प्रकार का शक्तियों को लेकर कोई विवाद न हो। इस प्रकार का कोई विवाद होता है तो कांस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया में उसके लिए एक स्वतंत्र संस्था...




















