जानिए हमारा कानून
जब नहीं सुने पुलिस तब क्या करे फरियादी?
किसी भी पीड़ित को फरियादी भी कहा जाता है, ऐसा फरियादी जिसके साथ कोई अपराध कारित किया गया है और जो पुलिस के पास आरोपी को सज़ा दिलवाए जाने की फरियाद लेकर आया है। ऐसा पीड़ित व्यक्ति सबसे पहले अपने साथ होने वाली घटना के संबंध में शिकायत करने उस क्षेत्र के थाने में जाता है जहां पर उसके साथ अपराध हुआ है। जैसा कि हमें यह जानकारी होना चाहिए कोई भी प्रदेश की सभी जगह किसी न किसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंटी होती है। जब किसी व्यक्ति के साथ कोई भी अपराध घटता है तब उसकी शिकायत उस थाने के थाना प्रभारी के समक्ष...
आर्य समाज मैरिज का क्या कानूनी वेलिडेशन है? जानिए
कानून में मैरिज की कई किस्में हैं उनमें एक आर्य समाज मैरिज भी है। स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना की गई। इस समाज के मंदिर होते हैं जहां शादी संपन्न कराई जाती है। भारत में आर्य समाज की शादी के लिए एक एक्ट भी बनाया गया है जिसे आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन एक्ट, 1937 कहा जाता है। यह एक्ट आर्य समाज की शादी की वैधता के संबंध में उल्लेख करता है इसलिए यह प्रश्न तो बनता ही नहीं है कि आर्य समाज की शादी वैध है या अवैध। अधिनियम से ही यह स्पष्ट होता है कि आर्य समाज में की गई शादियां वैध होती...
दहेज मृत्यु और कानूनी प्रावधान: सतबीर सिंह बनाम हरियाणा राज्य का व्यापक विश्लेषण
दहेज मृत्यु की घटना हमारे समाज में फैले गहरे सामाजिक बुराई का प्रतीक है। सतबीर सिंह बनाम हरियाणा राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दहेज मृत्यु से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों, जैसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-B और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 113-B पर विचार किया। इस लेख में हम इस केस का व्यापक विश्लेषण करेंगे, जिसमें आवश्यक तथ्य, कानूनी तर्क, संबंधित प्रावधान और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय शामिल हैं।आवश्यक तथ्य (Essential Facts) सतबीर सिंह का मामला उस दुखद...
पब्लिक सर्वेंट को दस्तावेज़ और सूचना न देने के कानूनी परिणाम: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 210 और 211
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023), जो 1 जुलाई, 2024 से लागू हुई, ने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) को प्रतिस्थापित कर दिया। इसमें धारा 210 और धारा 211 जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो उन स्थितियों को संबोधित करते हैं, जहां कोई व्यक्ति जो कानूनी रूप से बाध्य (Legally Bound) होता है, दस्तावेज़ (Document) या सूचना (Information) प्रदान करने में जानबूझकर चूक करता है।भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 210 और 211 कानूनी प्रक्रिया में सहयोग न करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त...
अपराधों के लिए न्यायालयों की स्थानीय क्षेत्राधिकार प्रक्रिया - धारा 197 से धारा 200, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023), जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई है, ने दंड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) का स्थान लिया है। इस कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आपराधिक न्यायालयों का अपराधों की जाँच और सुनवाई में क्षेत्राधिकार कैसे तय होता है।अध्याय XIV इस संबंध में दिशा-निर्देश प्रदान करता है कि अपराध कहाँ पर जांचा और सुनवाई की जानी चाहिए, विशेष रूप से तब जब यह स्पष्ट नहीं हो कि अपराध किस क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आता है या जब अपराध...
न्यायालय में कार्यवाही की रिपोर्टिंग पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: एक संवैधानिक अधिकार
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech and Expression) लोकतांत्रिक समाज में सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है। जब अदालतों में होने वाली कार्यवाही की रिपोर्टिंग की बात आती है, तो यह अधिकार न्यायपालिका में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व (Accountability), और जनता के विश्वास को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।भारत में, यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (Article 19(1)(a)) के तहत संरक्षित है, और इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्यापक रूप से व्याख्यायित किया गया है, जिसमें न्यायिक कार्यवाही (Court...
प्रॉपर्टी का म्यूटेशन किस तरह होता है?
किसी प्रॉपर्टी को केवल सेल डीड या अन्य कोई डीड के माध्यम से खरीद लेना ही नामांतरण या म्यूटेशन नहीं है बल्कि उसके बाद की शासकीय कार्यवाही के बाद ही किसी भी संपत्ति का म्यूटेशन होता है।केवल सेल डीड से ही नहीं हो जाता है नामांतरणसेल और नामांतरण दो अलग-अलग चीजें हैं। आमतौर पर लोग सेल और नामांतरण को एक ही समझ लेते हैं। ऐसा समझा जाता है कि रजिस्ट्री करवा ली और संपत्ति अपने नाम हो गई जबकि यह ठीक नहीं है। किसी भी संपत्ति को जब तक नामांतरण नहीं किया जाता है तब तक कोई भी व्यक्ति अपनी नहीं मान सकता भले ही...
संपत्ति पर किसी हिस्सेदार द्वारा अपना हिस्सा किस प्रक्रिया से छोड़ा जाता है?
किसी संपत्ति के अनेक मालिक हो सकते हैं कई मौके ऐसे आते हैं जब कुछ हिस्सेदार अपना हिस्सा छोड़ देते हैं और उनका हिस्सा अन्य हिस्सेदारों के नाम पर हो जाता है वह अन्य हिस्सेदार उस हिस्से के स्वामी बन जाते हैंऐसे अपने हिस्से के त्याग को हक़ त्याग कहा जाता है जिसके माध्यम से अन्य हिस्सेदार को मालिक बनाया जाता है और कोई हिस्सेदार अपना हिस्सा छोड़ देता हैकब बनाया जाता है हक़ त्यागऐसी डीड उस स्थिति में बनाई जाती है जब किसी संपत्ति के एक से ज्यादा वारिस हो वहां पर जब दोनों ही वारिसों के बीच किसी प्रकार का...
Tofan Singh बनाम तमिलनाडु राज्य : क्या NDPS Act के अधिकारी पुलिस अधिकारी हैं और उनके सामने दिए गए इकबालिया बयानों का साक्ष्य मूल्य क्या है?
Tofan Singh बनाम तमिलनाडु राज्य के महत्वपूर्ण मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने दो मुख्य मुद्दों पर फैसला दिया। पहला, क्या नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत अधिकारी पारंपरिक पुलिस अधिकारी माने जाएंगे? और दूसरा, ऐसे अधिकारियों के सामने दिए गए इकबालिया बयानों (Confessions) का साक्ष्य मूल्य (Evidentiary Value) क्या होगा? ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण थे क्योंकि NDPS अधिनियम के तहत कड़ी सज़ाएँ होती हैं, और इसलिए इकबालिया बयानों की स्वीकार्यता (Admissibility) सजा तय करने में...
इन्क्वेस्ट रिपोर्ट की जांच में मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ : धारा 196, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड को प्रतिस्थापित किया है और यह 1 जुलाई 2024 से लागू हो गई है। यह कानून देश में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन और प्रक्रियाओं को आधुनिक और सरल बनाने के लिए बनाया गया है। धारा 196 इस संहिता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो मजिस्ट्रेट को मौत के कारण की जांच करने का अधिकार देता है, खासकर उन मामलों में जहां मौत के कारण पर शक हो। धारा 196 को समझने के लिए, पहले धारा 194 का समर्थन समझना ज़रूरी है, जो शक के साथ हुई मौत की जांच का विस्तृत प्रावधान बताती...
क्या न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत केवल सीमित समय के लिए ही दी जा सकती है?
अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) एक कानूनी प्रावधान है जो किसी व्यक्ति को गिरफ्तारी की आशंका होने पर जमानत पाने का अधिकार देता है, ताकि उसे हिरासत (Custody) की प्रक्रिया से बचाया जा सके। Sushila Aggarwal बनाम दिल्ली राज्य (2020) के महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार किया कि क्या अग्रिम जमानत को एक निश्चित अवधि तक सीमित किया जाना चाहिए या इसे मुकदमे के अंत तक जारी रहना चाहिए। साथ ही, यह सवाल भी उठाया गया कि क्या अदालत द्वारा समन (Summoning) जारी करने के बाद अग्रिम जमानत का...
कानूनी समन और घोषणाओं का पालन न करने के परिणाम: भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 208 और 209
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023), जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई, ने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) को प्रतिस्थापित कर दिया। इस नए कानून में विभिन्न कानूनी प्रावधानों को शामिल किया गया है जो न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बनाए गए हैं। इसके धारा 208 और धारा 209 यह सुनिश्चित करती हैं कि व्यक्ति कानूनी समन (Summons), नोटिस (Notice), आदेश (Order) या घोषणाओं (Proclamations) का पालन करें। इन प्रावधानों का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वालों को...
क्या प्रतियोगी परीक्षाओं में साक्षर की सुविधा न देना दिव्यांग अधिकारों का उल्लंघन है? - विकास कुमार बनाम UPSC
सुप्रीम कोर्ट ने विकास कुमार बनाम यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) (2021) के मामले में दिव्यांग अधिकारों (Disability Rights) और प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में समान अवसर के महत्वपूर्ण मुद्दे पर फैसला सुनाया। इस मामले में विकास कुमार, जिन्हें 'राइटर क्रैम्प' (Writer's Cramp) नामक विकार है, सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के लिए साक्षर (Scribe) की सुविधा चाहते थे। UPSC ने उनकी इस मांग को अस्वीकार कर दिया, जिससे उनके साथ आरक्षण नीति के तहत समान अवसरों का उल्लंघन हुआ।इस मामले ने 'राइट्स ऑफ़...
धारा 194 के अंतर्गत इन्क्वेस्ट रिपोर्ट के दौरान लोगों को बुलाने की प्रक्रिया - धारा 195, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) 1 जुलाई 2024 से लागू हुई और इसने दंड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code) को बदल दिया। इस नए कानून का उद्देश्य भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली को सरल और आधुनिक बनाना है। धारा 195 इस संहिता में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो धारा 194 के अंतर्गत मौतों की जांच के दौरान लोगों को बुलाने की प्रक्रिया का वर्णन करता है। इस लेख में हम धारा 195 और धारा 194 को सरल भाषा में समझाएंगे और उदाहरणों के माध्यम से इसे और स्पष्ट...
कानूनी समन, नोटिस या आदेश से बचने के परिणाम: धारा 206, 207, और 208 भारतीय न्याय संहिता, 2023
भारतीय न्याय संहिता, 2023, जो 1 जुलाई, 2024 से लागू हुई, ने भारतीय दंड संहिता को प्रतिस्थापित किया है। यह कानून उन अपराधों को परिभाषित करता है जो कानूनी समन (Summons), नोटिस (Notice), या आदेश (Order) की सेवा से बचने से संबंधित हैं। यह प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि व्यक्ति कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करें। धारा 206, 207, और 208 उन स्थितियों को कवर करती हैं जहां कोई व्यक्ति समन से बचता है, नोटिस की सेवा में बाधा डालता है, या अदालत में उपस्थित होने में असफल होता है। आइए इन धाराओं को विस्तार से...
धारा 498A आईपीसी का दुरुपयोग: धारा 498A मामलों में न्याय और दुरुपयोग रोकथाम के बीच संतुलन
भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 498A का उद्देश्य महिलाओं के प्रति क्रूरता (Cruelty) और दहेज की मांग से जुड़ी हिंसा को रोकना था। हालांकि, समय के साथ इस प्रावधान के दुरुपयोग (Misuse) को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अदालतों ने बार-बार इस धारा के मामलों में सतर्कता की आवश्यकता पर बल दिया है, खासकर वैवाहिक विवादों (Matrimonial Disputes) के संदर्भ में। इस लेख में धारा 498A से संबंधित कानूनी सिद्धांतों (Legal Principles) और इसके दुरुपयोग पर न्यायालयों की टिप्पणियों का विश्लेषण किया गया है,...
सिविल केस में दी जाने वाली डिक्री और जजमेंट
किसी सिविल मुकदमे के अंतर्गत पर फैसला सुनाया जाता है जिसे जजमेंट कहा जाता है और इस ही जजमेंट के साथ डिक्री भी जारी की जाती है। जजमेंट और डिक्री दोनों डिफरेंट चीज़ें हैं और दोनों में काफी अंतर होता है।कोई भी सिविल केस को अदालत के समक्ष चलाए जाने की एक लंबी प्रक्रिया होती है। वाद पत्र के जरिए वादी अदालत ने अपनी बात रखता है। इस पर अदालत प्रतिवादी को बुलाकर उससे जवाब मांगती है। प्रतिवादी जो जवाब प्रस्तुत करता है उन्हें देखने के बाद अदालत वाद प्रश्न बना देती है। इन वाद प्रश्न पर मुकदमा चलता है। इन वाद...
पति या पत्नी के होते हुए बगैर तलाक किये दूसरी शादी करने के नुकसान
विवाह का मामला पर्सनल लॉ से जुड़ा हुआ है। पर्सनल लॉ ऐसा कानून है जो लोगों के व्यक्तिगत मामलों में लागू होता है। यह कानून धर्म या समुदाय का कानून होता है जो लोगों के व्यक्तिगत मामले में उन्हें दिया गया है। भारत में सामान्य रूप से हिंदू, मुसलमान, ईसाई समुदाय के लोग निवास करते हैं। सिख बौद्ध जैन को हिंदू धर्म का ही हिस्सा माना गया है। मुसलमान और ईसाई समाज को अलग धर्म माना गया है। हिंदू धर्म के लिए हिंदू विवाह 1955 है और मुसलमान धर्म के लोगों के लिए उनका अपना पर्सनल लॉ है।क्या है दूसरे विवाह पर...
क्या चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी FIR रद्द किया जा सकता है?
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट को यह शक्ति प्रदान की गई है कि वह एफआईआर (FIR) और आपराधिक कार्यवाही (Criminal Proceedings) को रद्द कर सकता है, जिससे न्याय की रक्षा हो और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग (Abuse of Process) रोका जा सके।सवाल उठता है कि क्या चार्जशीट (Charge Sheet) दाखिल हो जाने के बाद भी एफआईआर को रद्द किया जा सकता है? यह लेख इस सवाल पर चर्चा करेगा और महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों (Judicial Precedents) के आधार पर इस प्रश्न का उत्तर देगा। धारा 482...
क्या सरकार की आलोचना देशद्रोह है? विनोद दुआ बनाम भारत सरकार में सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक दृष्टिकोण
विनोद दुआ बनाम भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) और देशद्रोह (Sedition) से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों का समाधान किया। याचिकाकर्ता, वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ ने संविधान के अनुच्छेद 32 (Article 32) के तहत याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग की थी। इस एफआईआर में उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A (देशद्रोह) सहित अन्य धाराओं के तहत आरोपित किया गया था।यह मामला...