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धारा 156 (3) और 202 सीआरपीसी : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व संज्ञान और संज्ञान को बाद के चरण में मजिस्ट्रेट की शक्ति का फर्क समझाया
धारा 156 (3) और 202 सीआरपीसी : सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व संज्ञान और संज्ञान को बाद के चरण में मजिस्ट्रेट की शक्ति का फर्क समझाया

हाल ही के एक फैसले (कैलाश विजयवर्गीय बनाम राजलक्ष्मी चौधरी और अन्य) में, सुप्रीम कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 156 (3) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और अध्याय XV (मजिस्ट्रेट को शिकायत) के तहत संज्ञान लेने के बाद कार्यवाही और पूर्व-संज्ञान चरण में जांच करने के लिए एक मजिस्ट्रेट की शक्ति के बीच अंतर को स्पष्ट किया।सीआरपीसी की धारा 156(3) में कहा गया है कि एक मजिस्ट्रेट जिसे संहिता की धारा 190 के तहत संज्ञान लेने का अधिकार है, संज्ञेय अपराध के लिए जांच का आदेश दे सकता...

एनडीपीएस एक्ट, 1985 भाग 36: एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अवैध औषधियों, पदार्थों, पौधों, वस्तुओं और प्रवहणों का ज़ब्त किया जाना
एनडीपीएस एक्ट, 1985 भाग 36: एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अवैध औषधियों, पदार्थों, पौधों, वस्तुओं और प्रवहणों का ज़ब्त किया जाना

एनडीपीएस एक्ट (The Narcotic Drugs And Psychotropic Substances Act,1985) की धारा 60 अवैध दवाईयों, पदार्थों, पौधों,वस्तुओं और प्रवहणों के ज़ब्त किये जाने के संबंध में उल्लेख करती है। एनडीपीएस एक्ट अत्यंत विस्तृत अधिनियम है, इस अधिनियम के अंतर्गत निकाली गई अधिसूचना के अधीन अनेक पदार्थ,औषधि, पौधों को प्रतिबंधित किया गया है। धारा 60 इन प्रतिबंधित प्रदार्थो को सीज करने का अधिकार पुलिस एवं अन्य अधिकारियों को देती है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 60 पर विवेचना प्रस्तुत की जा रही है।यह अधिनियम में प्रस्तुत...