संपादकीय

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 18 : लापरवाही से मृत्यु कारित करना तथा दहेज मृत्यु का अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 18 : लापरवाही से मृत्यु कारित करना तथा दहेज मृत्यु का अपराध

पिछले आलेख में भारतीय दंड संहिता के अध्याय 16 के अंतर्गत जीवन के लिए संकटकारी अपराधों की श्रंखला में अपराधिक मानव वध तथा हत्या के अपराध पर विश्लेषण किया गया था इस आलेख में दंड संहिता के भाग 16 से ही तथा जीवन के लिए संकटकारी अपराधों में से ही अपराध लापरवाही से मृत्यु कारित करना तथा दहेज मृत्यु पर चर्चा की जा रही है। भारतीय दंड संहिता 1860 केवल अपराधिक मानव वध और हत्या के लिए ही दंडित नहीं करती है अपितु उपेक्षा द्वारा मृत्यु कारित करने पर अर्थात लापरवाही से कोई मृत्यु होने पर तथा वर्तमान समाज का...

हर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक अदालत हों, 100 रुपये की नोटबंदी हो : सुप्रीम कोर्ट में याचिका
'हर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक अदालत हों, 100 रुपये की नोटबंदी हो : सुप्रीम कोर्ट में याचिका

भारत के सभी जिलों में एक वर्ष के भीतर प्रत्येक मामले को निपटाने के लिए जनादेश के साथ, भ्रष्टाचार निरोधक अदालतों की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लंबे समय से आर्थिक अपराध और व्यापक भ्रष्टाचार के मामले देश में विकास की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं।दलीलों में कहा गया है, "मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने और कमज़ोर भ्रष्टाचार-विरोधी कानूनों के कारण, कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी विभागों में से...

National Uniform Public Holiday Policy
डेवलपर की ओर से रिफंड की पेशकश करने भर से, कब्जा सौंपने हुई देरी के एवज में मुआवजे का दावा करने का फ्लैट खरीदारों का अधिकार नहीं छ‌िन जाता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फ्लैट खरीदारों को मुआवजे का दावा करने से महज इसलिए मना नहीं किया जाता है क्योंकि डेवलपर ने ब्याज के साथ रिफंड का एक एग्जिट ऑफर पेश किया था। एक वास्तविक फ्लैट खरीदार के लिए, जिसने प्रोजेक्ट में एक निवेशक या फाइनेंसर के रूप में अपार्टमेंट नहीं बुक किया है, बल्क‌ि एक घर खरीदने के उद्देश्य से किया है, रिफंड का एकमात्र प्रस्ताव मुआवजे का दावा करने की पात्रता छीनता नहीं है।उक्त टिप्पणियां जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, इंदु मल्होत्रा ​​और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता...

COVID-19 के कारण लिमिटेशन अवधि बढ़ाने का आदेश अब भी ऑपरेटिव : सुप्रीम कोर्ट ने देरी से फाइल किये गये लिखित बयान को रिकॉर्ड पर लेने का एनसीडीआरसी को निर्देश दिया
'COVID-19 के कारण लिमिटेशन अवधि बढ़ाने का आदेश अब भी ऑपरेटिव' : सुप्रीम कोर्ट ने देरी से फाइल किये गये लिखित बयान को रिकॉर्ड पर लेने का एनसीडीआरसी को निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अदालतों और न्यायाधिकरणों में फाइलिंग के लिए लिमिटेशन अवधि बढाये जाने को लेकर 23 मार्च 2020 का उसका आदेश अब भी प्रभावी है। न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट की खंडपीठ ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) की ओर से जारी उस आदेश को निरस्त करते हुए की, जिसमें आयोग ने लिखित बयान लेने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि उसे शिकायत का जवाब दाखिल करने के लिए 45 दिन से अधिक समय देने का अधिकार नहीं है।कोर्ट ने कहा कि इस मामले में लिखित...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों के खिलाफ 61 आपराधिक मामलों पर कार्रवाई न करने के फैसले पर रोक लगाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के मंत्रियों, विधायकों के खिलाफ 61 आपराधिक मामलों पर कार्रवाई न करने के फैसले पर रोक लगाई

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई वाली सरकार के 31 अगस्त की तारीख वाले सरकारी आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत निर्वाचित प्रतिनिधियों और मंत्रियों के खिलाफ 61 मामलों आपराधिक मामलों में मुकदमा वापस लेने का फैसला किया गया था। मुख्य न्यायाधीश अभय एस ओका और न्यायमूर्ति विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने आदेश दिया: "हम निर्देश देते हैं कि 31 अगस्त, 2020 के आदेश के आधार पर आगे कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।" अदालत 31 अगस्त के आदेश को चुनौती देते हुए पीपुल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज, कर्नाटक...

सरकार ऐसे बर्ताव नहीं कर सकती जैसे समय सीमा कानून उस पर लागू नहीं होता : सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी दाखिल करने में 462 दिनों की देरी के लिए अधिकारियों पर जुर्माना लगाया
सरकार ऐसे बर्ताव नहीं कर सकती जैसे समय सीमा कानून उस पर लागू नहीं होता : सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी दाखिल करने में 462 दिनों की देरी के लिए अधिकारियों पर जुर्माना लगाया

एक बार फिर से मात्र औपचारिकता निभाने के लिए सरकार द्वारा देरी से अपील दाखिल करने पर अनिच्छा जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एसएलपी दाखिल करने में 462 दिनों की देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से वसूले जाने के लिए 15000 रुपये का जुर्माना लगाया। पीठ ने तब याचिका को समय सीमा के कारण खारिज दिया और न्यायिक समय की बर्बादी के लिए याचिकाकर्ता पर 15,000 / - रुपये का जुर्माना लगाया।उन्होंने कहा, "हमने इसे वकील के सामने रखा कि जुर्माना बहुत अधिक होगा लेकिन इस तथ्य के लिए कि एक युवा वकील हमारे...

निविदा के विशेषज्ञ मूल्यांकन पर  रिट कोर्ट द्वारा दूसरा अनुमान नहीं लगाया सकता, जब तक कि निविदा प्राधिकरण की ओर मनमानी या दुर्भावना का आरोप ना लगें : सुप्रीम कोर्ट
निविदा के विशेषज्ञ मूल्यांकन पर रिट कोर्ट द्वारा दूसरा अनुमान नहीं लगाया सकता, जब तक कि निविदा प्राधिकरण की ओर मनमानी या दुर्भावना का आरोप ना लगें : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विशेष निविदा के विशेषज्ञ मूल्यांकन, विशेषकर जब तकनीकी मूल्यांकन की बात आती है, तो रिट कोर्ट द्वारा दूसरा अनुमान नहीं लगाया सकता, जब तक कि निविदा प्राधिकरण की ओर मनमानी या दुर्भावना का आरोप नहीं लगाया जाता है। दरअसल पुलिस महानिरीक्षक, कश्मीर ज़ोन, क्षेत्रीय कश्मीर पुलिस मुख्यालय, श्रीनगर ने सैनिकों के लिए विभिन्न प्रकार के वाणिज्यिक वाहनों (ईंधन के बिना) व उपकरणों की आपूर्ति के लिए प्रतिष्ठित ट्रांसपोर्टरों, पंजीकृत फर्मों / संगठनों से वित्तीय वर्ष 2020-2021 के...

सुप्रीम कोर्ट ने बिना कारण बताए अंतिम फैसला सुनाने की प्रथा के खिलाफ फिर अनिच्छा जताई
सुप्रीम कोर्ट ने बिना कारण बताए अंतिम फैसला सुनाने की प्रथा के खिलाफ फिर अनिच्छा जताई

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बिना कारण बताए अंतिम फैसला सुनाने की प्रथा के खिलाफ अनिच्छा जताई है। यदि किसी निर्णय को उसी तिथि को या उसके तुरंत बाद नहीं दिया जा सकता है, तो तार्किक रूप से निर्णय लिखने के लिए न्यायाधीश को कम से कम आदेश सुरक्षित रख लेना चाहिए, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए बिना कारण वाले आदेश को रद्द करते हुए कहा।इस मामले में, अपीलकर्ताओं ने शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया था कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने केवल ऑपरेटिव भाग...

भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 15 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत लोक सुविधा शिष्टाचार और सदाचार को प्रभावित करने वाले अपराध
भारतीय दंड संहिता (IPC) भाग 15 : भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत लोक सुविधा शिष्टाचार और सदाचार को प्रभावित करने वाले अपराध

पिछले आलेख में भारतीय दंड संहिता के अध्याय 14 के अंतर्गत लोक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले अपराधों के संबंध में चर्चा की गई थी इस आलेख में इस ही अध्याय से संबंधित लोक सुविधा, शिष्टता और सदाचार से संबंधित अपराधों पर सारगर्भित उल्लेख किया जा रहा है। लोक सुविधा को प्रभावित करने वाले अपराधभारतीय दंड संहिता, 1860 के अंतर्गत उन सभी कार्य या लोप को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है जो किसी न किसी प्रकार से लोक सुविधा और शेम को प्रभावित करते हैं। क्षेम का अर्थ है सुरक्षा होता है। भारतीय दंड संहिता की...

अदालत अनुसूचित जनजाति  पर राष्ट्रपति आदेश में बदलाव नहीं कर सकती : सुप्रीम कोर्ट ने  गोवारी जाति को ST में शामिल करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया
अदालत अनुसूचित जनजाति पर राष्ट्रपति आदेश में बदलाव नहीं कर सकती : सुप्रीम कोर्ट ने ' गोवारी' जाति को ST में शामिल करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि उच्च न्यायालय यह पता लगाने और यह तय करने के लिए सबूतों पर गौर नहीं कर सकता है कि एक विशेष जनजाति अनुसूचित जनजाति का हिस्सा है जो संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में शामिल है। जाति 'गोवारी' और 'गोंड गोवारी' दो अलग और अलग जातियां हैं, पीठ जिसमें जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह शामिल हैं, ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा जिसमें कहा गया था कि गोवारी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की स्थिति के लाभ से इनकार नहीं किया जा सकता...

किसी कानून निर्माता द्वारा दोषी करार दिए जाने से पहले उसी दिन डाला वोट अमान्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट
किसी कानून निर्माता द्वारा दोषी करार दिए जाने से पहले उसी दिन डाला वोट अमान्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि एक कानून निर्माता द्वारा किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने से पहले उसी दिन डाले गए वोट को अमान्य नहीं कहा जा सकता। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि दोषी ठहराए जाने से पहले ही एक विधायक/ सांसद को अयोग्य घोषित करना उसके अधिकार का" घोर उल्लंघन करता है कि जब तक कि दोषी साबित नहीं हो जाता, तब तक उसे निर्दोष माना जाएगा।"पीठ ने कहा कि वह "दूरगामी परिणाम का एक दिलचस्प लेकिन महत्वपूर्ण सवाल" तय कर रही है, जो था:"क्या राज्य सभा के लिए एक चुनाव...

सस्ता उपचार, स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार का हिस्सा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा निजी अस्पतालों के फीस की अधिकतम सीमा तय हो
'सस्ता उपचार, स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार का हिस्सा', सुप्रीम कोर्ट ने कहा निजी अस्पतालों के फीस की अधिकतम सीमा तय हो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सस्ता उपचार, स्वास्थ्य के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने कहा, "या तो राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा अधिक से अधिक प्रावधान किए जाने हैं या निजी अस्पतालों द्वारा लिए जाने वाले शुल्क की अध‌िकत सीमा हो, जिसे आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत शक्तियों के प्रयोग से तय किया जा सकती है।"कोर्ट ने यह भी कहा कि यह राज्य कर्तव्य है कि वह सस्ती चिकित्सा के लिए प्रावधान करे और राज्य और / या स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जाने वाले...

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'यह परेशान करने वाला है': आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा आंध्र प्रदेश में 'संवैधानिक टूट' की जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत उसने यह जांच करने का निर्णय लिया था कि क्या आंध्र प्रदेश राज्य में "संवैधानिक टूट" की स्थिति है। भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने उच्च न्यायालय के आदेश पर कहा, "हम इससे परेशान हैं।"पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया। क्रिसमस की छुट्टियों के बाद इस मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा। जस्टिस राकेश कुमार के नेतृत्व वाली उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा उक्त आदेश को वापस लेने के लिए राज्य सरकार द्वारा दायर एक...

सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में किए गए ट्वीट के लिए आपराधिक अवमानना कार्रवाई की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कॉमेडियन कुणाल कामरा को नोटिस जारी किया। नोटिस का 6 सप्ताह के भीतर जवाब देना है। पीठ ने कामरा को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है।जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने अभ्युदय मिश्रा, स्कंद बाजपेयी और श्रीरंग कातनेश्वरकर की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।शीर्ष अदालत और न्यायाधीशों के बारे में किए गए ट्वीट के लिए आपराधिक...

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया हैंडल सेनेटरी पैनल्स में न्यायपालिका के बारे में टिप्पणी करने पर रचिता तनेजा को अवमानना नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया हैंडल 'सेनेटरी पैनल्स' में न्यायपालिका के बारे में टिप्पणी करने पर रचिता तनेजा को अवमानना नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा को नोटिस जारी किया जिसमें न्यायपालिका के बारे में सोशल मीडिया हैंडल 'सेनेटरी पैनल्स' में प्रकाशित करने के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है। नोटिस का 6 सप्ताह के जवाब देना है। पीठ ने तनेजा को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी है।पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने अवमानना कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति दी है। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कानून के छात्र आदित्य कश्यप द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी...