संपादकीय
सीआरपीसी 313 के तहत आरोपियों द्वारा सवालों के झूठे स्पष्टीकरण का चेन को पूरा करने के लिए कड़ी के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत अदालत द्वारा पूछे गए सवालों पर अभियुक्तों के झूठे स्पष्टीकरण या गैर-स्पष्टीकरण का चेन को पूरा करने के लिए कड़ी के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है।इसका उपयोग एक केवल तब एक अतिरिक्त परिस्थिति के रूप में किया जा सकता है, जब अभियोजन पक्ष परिस्थितियों की चेन को किसी अन्य निष्कर्ष पर नहीं बल्कि आरोपियों के अपराध को साबित करे, जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस बीआर गवई शामिल पीठ ने कहा।इस मामले में, अभियुक्त को अपनी पत्नी की हत्या के...
'धारा 34' याचिका के लिए सीमा अवधि उस तारीख से शुरू होगी, जिस दिन अवार्ड की हस्ताक्षरित प्रति पक्षकारों को उपलब्ध कराई गई थी : सुप्रीम कोर्ट
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 के तहत याचिका दायर करने के लिए सीमा अवधि उस तारीख से शुरू होगी, जिस दिन अवार्ड की हस्ताक्षरित प्रति पक्षकारों को उपलब्ध कराई गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है।जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि इस पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद अवार्ड की कोई अंतिम स्थिति नहीं हो सकती है।इस मामले में, नवगेंट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण (2: 1) द्वारा पारित 27.04.2018 को मध्यस्थता अवार्ड को चुनौती देने के लिए बिजली...
मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत आवेदन को आईबीसी 14 के तहत मोहलत द्वारा कवर किया गया है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक अवार्ड को रद्द करने के लिए मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 के तहत एक आवेदन इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 14 के तहत मोहलत द्वारा कवर किया गया है।धारा 34 की कार्यवाही कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ अदालत में एक मध्यस्थ अवार्ड के लिए चुनौती से संबंधित कार्यवाही है और इसे उसी तरह से कवर किया जाएगा जिस तरह एक सूट से निकली डिक्री में अपीलीय कार्यवाही को कवर किया जाएगा, न्यायमूर्ति नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने पी मोहनराज और अन्य बनाम एम / एस शाह ब्रदर्स इस्पात...
सुप्रीम कोर्ट ने यतिन ओझा के आचरण की निगरानी के लिए अंतरिम उपाय के रूप में उनकी सीनियर गाउन बहाल करने की संभावना पर विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात हाईकोर्ट से आग्रह किया कि उच्च न्यायालय के खुलने के बाद अधिवक्ता यतिन ओझा के सीनियर गाउन को बहाल करने की पर विचार किया जाए, ताकि इस व्यवस्था को स्थायी बनाने पर फैसला किया जा सके।गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता सी. ए. सुंदरम ने कहा कि"क्या उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री के खिलाफ एक बयान को अवमानना माना जा सकता है? आलोचना की सीमा क्या हो सकती है? बेशक असंयमी भाषा के लिए कोई बहाना नहीं है और मैं मानता हूं कि उन्हें माफी मांगनी चाहिए।...
'पीड़िता की गवाही विश्वसनीय नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 साल जेल में बिताने वाले आरोपी को बलात्कार के मामले में बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट हाल ही में उस व्यक्ति के बचाव में आया है,जिसने झूठे बलात्कार के मामले में बीस साल जेल में बिता दिए हैं। कथित तौर पर एक भूमि विवाद के कारण एक महिला ने उसके खिलाफ झूठा बलात्कार का केस दायर किया था। न्यायमूर्ति डॉ कौशल जयेंद्र ठाकर और न्यायमूर्ति गौतम चैधरी की खंडपीठ ने एक विष्णु की रिहाई का आदेश पारित करते हुए,वर्ष 2003 में एक ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धारा 376 और 506 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक)...
"शिवसेना नेताओं से खतरा " : कंगना रनौत और उनकी बहन ने मुंबई से तीन आपराधिक मामलों को हिमाचल ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की
बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल, जो सोशल मीडिया पर अपनी आलोचनात्मक टिप्पणियों के लिए मुंबई में तीन आपराधिक मामलों में अभियोजन का सामना कर रही हैं, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इन मामलों को हिमाचल प्रदेश में स्थानांतरित करने की मांग की है।"शिवसेना नेताओं की निजी प्रतिशोध की वजह से ट्रायल के मुंबई में आगे बढ़ने पर याचिकाकर्ताओं के लिए जीवन का खतरा है।"अधिवक्ता नीरज शेखर के माध्यम से दायर याचिका निम्नलिखित मामलों को स्थानांतरित करना चाहती है:1. मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट...
'आप अपने पैरों को खींच रहे हैं, ये नागरिकों के अधिकारों से संबंधित है ' : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों में सीसीटीवी ना लगाने पर केंद्र को फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे सीबीआई, एनआईए, एनसीबी आदि के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में और समय मांगने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई।2 दिसंबर, 2020 को, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने हिरासत में यातना की घटनाओं की जांच करने के लिए देश भर के सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश जारी किए थे। केंद्र सरकार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), नारकोटिक्स कंट्रोल...
यदि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है तो अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का आह्वान करते हुए हाईकोर्ट एफआईआर रद्द कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का आह्वान करते हुए, एक एफआईआर को रद्द कर सकता है यदि उसे कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग पाया जाता है।इस मामले में, भारतीय दंड संहिता की धारा 420/406 के तहत दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट को रद्द करने के लिए अभियुक्तों द्वारा एक रिट याचिका को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया था। आरोपी का तर्क यह था कि उसके खिलाफ एफआईआर शिकायतकर्ता के खिलाफ दायर चेक बाउंस शिकायत का बदला है।अपील की अनुमति देते समय,...
अगर कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ समापन कार्यवाही लंबित है तो भी दिवालियापन कार्यवाही सुनवाई योग्य : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड की धारा 7 या धारा 9 के तहत एक याचिका एक स्वतंत्र कार्यवाही है जो एक ही कंपनी के खिलाफ दायर होने वाली कार्यवाही का समापन करने पर भी अप्रभावित रहती है।जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि एक सुरक्षित लेनदार समापन के बाहर खड़ा होता है और कार्यवाही के समापन के दौरान अपनी सुरक्षा को असंबंध रूप से प्राप्त कर सकता है।इस अपील में अपीलकर्ता का तर्क था कि एक समापन याचिका की मंज़ूरी, आईबीसी की धारा 7 के तहत कोई याचिका दायर नहीं की जा...
एनआई एक्ट की धारा 138 की कार्यवाही "आपराधिक भेड़ियों के कपड़ों" में " सिविल भेड़", प्रकृति में "अर्ध-आपराधिक" : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत चेक डिसऑनर के लिए आपराधिक कार्यवाही प्रकृति में "अर्ध-आपराधिक" है।न्यायालय ने एक दिलचस्प टिप्पणी भी की कि धारा 138 की कार्यवाही को "आपराधिक भेड़ियों के कपड़ों" में " सिविल भेड़" कहा जा सकता है। जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने यह टिप्पणी उस फैसले के दौरान दी कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी ) की धारा 14 के तहत मोहलत की घोषणा कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ निगोशिएबल...
'क्या तुम उससे शादी करोगे?' सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी से पूछा; गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया
सुप्रीम कोर्ट ने (सोमवार) एक 23 वर्षीय लड़के, जिस पर एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने का आरोप लगा है, जब वह लगभग 16 वर्ष की थी, से पूछा कि क्या वह (अभियुक्त) उससे (पीड़ित) से शादी करेगा।भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट (औरंगाबाद बेंच) के उस आदेश के खिलाफ, जिसमें महाराष्ट्र के एक सरकारी कर्मचारी की अग्रिम जमानत रद्द कर दी गई थी, अभियुक्त की विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) पर सुनवाई की (केस: मोहित) सुभाष चव्हाण बनाम महाराष्ट्र राज्य)।सीजेआई...
किसी विधान में मौजूद दंड के तहत प्रतिबंधित होने पर एक अनुबंध शून्य होगा, भले ही स्पष्ट घोषणा ना हो कि ऐसा अनुबंध शून्य है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विधान में मौजूद दंड के तहत प्रतिबंधित होने पर एक अनुबंध शून्य होगा, भले ही स्पष्ट घोषणा ना हो कि ऐसा अनुबंध शून्य है।जस्टिस एएम खानविल्कर, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा कि विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 की धारा 31 में भारत में स्थित संपत्ति के किसी व्यक्ति द्वारा, बिक्री या गिरवी के द्वारा ट्रांसफर या निपटान के लिए जो भारत का नागरिक नहीं है, "पूर्व" सामान्य या भारतीय रिज़र्व बैंक की विशेष अनुमति प्राप्त करने की पूर्व निर्धारित...
"हम अभी आगे के घटनाक्रम से चिंतित नहीं हैं, हम ये देखेंगे कि क्या डिवीजन बेंच में कोई अपील टिक सकती है" : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल कोयला घोटाला मामले में कहा
सीबीआई के अनुरोध पर, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 10 मार्च के लिए स्थगित कर दी, जिसके तहत हाईकोर्ट ने राज्य की सहमति ना होने के बावजूद पश्चिम बंगाल में रेलवे के माध्यम से कोयले के अवैध खनन और परिवहन से संबंधित एक मामले की सीबीआई जांच करने की अनुमति दी।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ के समक्ष पेश होकर, एसजी तुषार मेहता ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था।ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, जो शिकायतकर्ता...
सुप्रीम कोर्ट ने IPS अफसरों के ट्रांसफर/ प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार के राज्यों पर अधिकार के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के नियम 6 (1) की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आईपीएस कैडर के अधिकारियों के स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति के मामले में केंद्र सरकार को राज्यों के ऊपर शक्तियां प्रदान की गई हैं।न्यायमूर्ति नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा,"खारिज।" नियम 6 (1) को मुख्य अधिनियम में पेश किया गया था -6. "कैडर अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति: 6 (1) एक कैडर अधिकारी, राज्य सरकार या संबंधित राज्य सरकारों और...
आईबीसी की धारा 14 के तहत मोहलत की घोषणा कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत चेक डिसऑनर के लिए आपराधिक कार्यवाही को शामिल करती है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी ) की धारा 14 के तहत मोहलत की घोषणा कॉरपोरेट देनदार के खिलाफ निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चेक डिसऑनर के लिए आपराधिक कार्यवाही को शामिल करती है।न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन ने फैसले के ऑपरेटिव हिस्से को पढ़ते हुए कहा,"हमने माना है कि आईबीसी की धारा 14 के तहत मोहलत द्वारा एनआई अधिनियम धारा 138/141 की कार्यवाही को कवर किया जाता है।"निर्णय में यह भी गया गया कि मोहलत केवल कॉरपोरेट देनदार के लिए लागू होगी।शीर्ष...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : जानिए सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह
22 फरवरी 2021 से 26 फरवरी 2021 तक सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़रपति के करियर और प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाले पत्नी के आरोप तलाक मांगने के लिए मानसिक क्रूरता के समान हैः सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा लगाए गए ऐसे आरोप,जो पति के करियरऔर प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं,वह तलाक मांगने के लिए उसके खिलाफ की गई मानसिक क्रूरता के समान है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल,न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने कहा कि सहनशीलता का स्तर हर जोड़े में...
कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक शोषण से संरक्षण के लिए कानून
भारतीय महिलाओं के हितों की प्रतिरक्षा हेतु अनेक प्रयास भारत की संसद द्वारा किए गए हैं। भारत के संविधान निर्माताओं ने भी महिलाओं के अधिकारों को स्पष्ट करने हेतु भारत के संविधान में संपूर्ण प्रावधान किए हैं। किसी समय भारतीय महिलाएं घरेलू कार्य करती थी तथा घर की चारदीवारी के भीतर उनका संसार होता था। समय ने प्रगति की भारत को स्वतंत्रता मिली तथा भारत ने अपने संविधान का निर्माण किया। भारत के संविधान में अवसर की समानता दी गई तथा गरिमा और प्रतिष्ठा से भरा हुआ जीवन दिया गया। इस गरिमा और प्रतिष्ठा में...
SCBA चुनाव परिणाम : विकास सिंह अध्यक्ष, अर्धेंदुमूली कुमार प्रसाद सचिव चुने गए
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कार्यकारी समिति 2020-2021 के लिए हुए चुनावों के परिणाम शनिवार को घोषित कर दिए।वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह को अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय को उपाध्यक्ष चुना गया है।परिणामअध्यक्ष, श्री विकास सिंह (सीनियर)उपाध्यक्ष, श्री प्रदीप कुमार राय (सीनियर) सचिव, श्री अर्धेंदुमूली कुमार प्रसाद संयुक्त सचिव, श्री राहुल कौशिक कोषाध्यक्ष, श्री मीनेश कुमार दुबे संयुक्त कोषाध्यक्ष, सुश्री डॉ ऋतु भारद्वाजवरिष्ठ कार्यकारी सदस्य:1. श्री वी शेखर (सीनियर)2. सुश्री महालक्ष्मी...
"संस्थान की भलाई के लिए": एजी केके वेणुगोपाल ने पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति देने से इनकार किया
भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने एक इंटरव्यू के दौरान पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा दिए गए बयानों के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने पर अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह जवाब एक्टिविस्ट साकेत गोखले द्वारा न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के बारे में अपने बयानों के लिए गोगोई के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के बारे में पूछने पर दिया।सहमति देने से इनकार करते हुए एजी वेणुगोपाल ने स्वीकार किया है कि गोगोई ने हाल के एक इंटरव्यू में...
पति के करियर और प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाले पत्नी के आरोप तलाक मांगने के लिए मानसिक क्रूरता के समान हैः सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा लगाए गए ऐसे आरोप,जो पति के करियरऔर प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं,वह तलाक मांगने के लिए उसके खिलाफ की गई मानसिक क्रूरता के समान है।न्यायमूर्ति संजय किशन कौल,न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने कहा कि सहनशीलता का स्तर हर जोड़े में एक दूसरे से भिन्न होता है और अदालत को पक्षकारों की पृष्ठभूमि, शिक्षा के स्तर और स्टे्टस को भी ध्यान में रखना होगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या क्रूरता का आरोप विवाह के विघटन को सही ठहराने...



















