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हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

LiveLaw News Network
5 Dec 2021 5:30 AM GMT
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
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देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (29 नवंबर, 2021 से 3 दिंसबर, 2021) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

बैंक गारंटी के नकदीकरण के लिए आदेश पारित नहीं कर सकते जो आज तक जीवित नहीं हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने आज वर्ष 2013 में जारी बैंक गारंटियों को भुनाने की मांग वाली एक अपील खारिज कर दिया, जो 2016 में समाप्त हो गई थी।

चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीट ने मौखिक रूप से कहा, " बैंक गारंटी जो आज जीवित नहीं हैं, उन्हें भुनाया नहीं जा सकता है। यह एक साधारण कागज का टुकड़ा है, बस। बेहतर यह है कि पीड़ित पक्ष वसूली या नुकसान के लिए मुकदमा दायर कर सकता है। "

केस शीर्षक: एनक्यूबेट इंडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड बनाम यूनियन ऑफ इंडिया

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गांजा बरामदगी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में दुर्भावनापूर्ण तरीके से मुकदमा चलाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस कर्मियों को 29 किलोग्राम गांजा (भांग) बरामद मामले में एक व्यक्ति को आधी रात को उसके घर से उठाने और एनडीपीएस मामले में दुर्भावनापूर्ण रूप से मुकदमा चलाने के लिए भारी फटकार लगाई।

न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की खंडपीठ ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।

केस का शीर्षक - ललित गुप्ता बनाम यू.पी. राज्य

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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला के शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर उसके जन्म प्रमाण पत्र में सुधार के आदेश दिए

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को सीबीएसई द्वारा जारी किए गए शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर एक महिला (अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता) के जन्म प्रमाण पत्र में सुधार करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति राज मोहन सिंह की खंडपीठ का यह निर्देश ज्योति बजाज की याचिका पर आया, जिसने प्रतिवादियों को अपने जन्म प्रमाण पत्र में 19 दिसंबर, 1982 की जगह 17 दिसंबर, 1982 की जन्मतिथि लिखकर सही करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी।

केस का शीर्षक - ज्योति बजाज बनाम हरियाणा राज्य एंड अन्य

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पीड़ितों को त्वरित निवारण प्रदान करने के लिए जीरो एफआईआर का प्रावधान, यह वारदात की जगह पर ध्यान दिए बगैर किसी भी पुलिस थाने में दर्ज की जा सकती हैः दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में बलात्कार के मामले में एफआईआर दर्ज करने में दिल्ली पुलिस की विफलता और मामले में जांच को अवैध रूप से दूसरे पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित करने पर नाराजगी जाहिर की।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, "इस अदालत को यह दुर्भाग्यपूर्ण लगता है कि आम नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करने वाली संस्थाएं अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए तत्पर हैं। यह इन जांच एजेंसियों पर आम नागरिकों के भरोसे को कमजोर करता है।"

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सिफारिश पर रिश्वत लेने के दोषी जज को सेवा से बर्खास्त किया

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक न्यायिक अधिकारी को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सिफारिश पर सेवा से बर्खास्त कर दिया है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने सिविल जज सह अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) गौरव शर्मा को बर्खास्त करने का आदेश पारित किया। जज को एक स्थानीय निवासी से 40,000 रुपये की रिश्वत लेने का दोषी पाया गया था।

अधिसूचना में कहा गया कि "राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश ने हाईकोर्ट की सिफारिशों पर विचार किया और सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 के नियम 11 के खंड (ix) के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए और इस संबंध में उन्हें सक्षम करने वाली अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री गौरव शर्मा को हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का आदेश दिया जाता है।"

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बी.एड डिग्री धारक आरईईटी-I की परीक्षा देने के पात्र नहीं; एनसीटीई की साल 2018 की अधिसूचना गैरकानूनी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि प्राथमिक स्तर के छात्रों को पढ़ाने के लिए एनसीटीई की अधिसूचना और इस तरह बी.एड डिग्री धारकों को आरईईटी स्तर I [शिक्षक के लिए राजस्थान पात्रता परीक्षा] की परीक्षा देने की अनुमति देना गैरकानूनी है।

मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति सुदेश बंसल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता, जो इस कोर्ट के अंतरिम आदेशों के तहत आरईईटी परीक्षा में उपस्थित हुए, को आगे संसाधित नहीं किया जाएगा।

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दुपट्टा(ओरना) खींचना, हाथ खींचना और पीड़िता को शादी के लिए प्रपोज करना POCSO एक्ट के तहत यौन हमला/उत्पीड़न नहींः कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना है कि 'ओर्ना' (महिला का स्कार्फ) खींचना, पीड़िता का हाथ खींचना और उसे शादी के लिए प्रपोज करना पॉक्सो अधिनियम के तहत 'यौन हमले' या 'यौन उत्पीड़न' की परिभाषा में नहीं आता है।

जस्टिस बिबेक चौधरी की पीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आकलन में ट्रायल कोर्ट की भूमिका पर भी जोर दिया और कहा कि, ''...(भूमिका) इसकी वास्तविक भावना में नहीं हो सकती है परंतु इस पर अधिक जोर दिया जा सकता है क्योंकि ट्रायल कोर्ट न्याय के प्रशासन की बुनियादी संरचना है जिस पर उच्च मंच खड़े हैं। यदि बुनियादी संरचना बिना किसी आधार के है, तो उच्च ढ़ांचा न केवल गिरेगा, बल्कि यह एक निर्दाेष व्यक्ति को न्याय से वंचित करेगा।''

केस का शीर्षक - नूराई एसके उर्फ नुरुल एसके बनाम पश्चिम बंगाल राज्य

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"छात्रों को यह कहने का अधिकार नहीं है कि परीक्षा न आयोजित न की जाए" : कर्नाटक हाईकोर्ट ने केएसएलयू को एलएलबी परीक्षा आयोजित करने के आदेश को संशोधित करने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को 24 नवंबर के अपने आदेश को संशोधित करने से इनकार कर दिया, जिसके द्वारा उसने कर्नाटक स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी (KSLU) को एलएलबी छात्रों के लिए इंटरमीडिएट सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी थी। हालांकि, परीक्षाओं के परिणाम अदालत के अगले आदेश के अधीन होंगे।

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पशुओं के अवैध वध रोकने का निर्देश दिया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य के किसी भी जिले में जानवरों का कोई भी अवैध वध नहीं किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि तत्काल उपचारात्मक उपाय किए जाए ताकि ऐसी कोई भी अवैध गतिविधियां न हों।

मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने गौ ज्ञान फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए कहा, "जवाब देने वाले प्रतिवादियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि राज्य के किसी भी जिले में इस तरह के अवैध वध करने वाले जानवरों को नहीं किया जाए। साथ ही तत्काल यह सुनिश्चित करने के लिए उपचारात्मक उपाय किए जाएंगे कि ऐसी कोई भी अवैध गतिविधियां न हों।"

केस शीर्षक: गौ ज्ञान फाउंडेशन बनाम भारत संघ

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निवास से कार्यस्थल की यात्रा के दौरान दुर्घटना होने पर सरकारी कर्मचारी विशेष विकलांगता अवकाश के हकदार: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि केरल सेवा नियमों के भाग एक के नियम 97 और 98 के तहत, एक सरकारी कर्मचारी जो अपने निवास से कार्यस्थल की यात्रा के दौरान दुर्घटना का शिकार हो जाता है, विशेष विकलांगता अवकाश का हकदार है।

जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास सीपी की खंडपीठ ने कहा "... वाक्यांश 'के कारण, या उसके आधिकारिक कर्तव्यों के उचित प्रदर्शन के परिणामस्वरूप या उसकी आधिकारिक स्थिति के परिणामस्वरूप' , जो उपरोक्त दोनों नियमों में प्रकट होता है, को एक संकीर्ण और रुढ़िवादी तरीके से उपयोग नहीं किया जा सकता है, ताकि एक व्यक्ति जो वास्तव में एक कर्मचारी था, जो दुर्घटना के समय अपने निवास से कार्यस्थल की यात्रा कर रहा था, उसे बाहर रखा जा सके।"

केस शीर्षक: केरल राज्य और अन्य बनाम शैलजा के उन्नीथन

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"अपराध के कारण समाज सिस्टम में विश्वास खो रहा": दिल्ली हाईकोर्ट ने डकैती के दौरान 25 साल के युवा लड़के की हत्या करने वाले दो अपराधियों की सजा बरकरार रखी

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक 25 वर्षीय लड़के की मोबाइल फोन लूटने के दौरान हत्या करने वाले दो अपराधियों की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि अपराध के कारण समाज सिस्टम में विश्वास खो रहा है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी ने कहा, "मामले से अलग होने से पहले यह ध्यान देने योग्य होगा कि वर्तमान मामला एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण मामला है, जहां एक युवा लड़का, जिसने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की, समाज के अपराधियों के कारण दुखद रूप से अपनी जान गंवा दी।

केस का शीर्षक: योगेश बनाम राज्य (दिल्ली सरकार)

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'दोषी होने पर भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुरक्षित करने का विचार': दिल्ली हाईकोर्ट ने ज़मानत की शर्त का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जमानत की शर्त का उल्लंघन करने वाले एक व्यक्ति को संजय गांधी पशु देखभाल केंद्र में एक महीने की सामुदायिक सेवा करने का निर्देश देते हुए कहा कि मूल विचार व्यक्तियों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सुरक्षित करने का है, भले ही उन्हें दोषी ठहराया जा रहा हो।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी की पीठ ने एक शाहरुख अली को निर्देश दिया है कि वह हर दिन तीन घंटे यानी दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक केंद्र के प्रमुख द्वारा आवंटित कार्यों को पूरा करे।

केस का शीर्षक- शाहरुख अली बनाम दिल्ली राज्य

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केवल वाहनों पर राजनीतिक दल के झंडे और प्रतीक प्रदर्शित करने पर आईपीसी की धारा 171H लागू नहीं की जा सकती: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से जुड़े तीन व्यक्तियों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 171H जो एक चुनाव के संबंध में अवैध भुगतान से संबंधित है, उसे तब लागू नहीं किया जा सकता जब केवल किसी ने अपने वाहन पर पार्टी के झंडे और प्रतीक का प्रदर्शन किया।

कलबुर्गी बेंच में बैठे जस्टिस एचपी संदेश ने कहा, "मामले में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आरोप यह है कि वे अपने वाहनों में राजनीतिक दल के झंडे लगाकर आए थे और चुनाव के संबंध में अवैध भुगतान के संबंध में कोई आरोप शिकायत में नहीं पाए गए। परिस्थितियों में उनके खिलाफ कार्यवाही की शुरुआत कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।"

केस शीर्षक: हनमगौड़ा बनाम कर्नाटक राज्य

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माता-पिता के प्रतिस्पर्धी अधिकार बच्चे के हित के अधीन : दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित पिता को बच्चे से रोजाना मिलने के आदेश पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैमिली कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें ढाई साल के बच्चे के कथित पिता को रोजाना मुलाकात का अधिकार दिया गया था।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा, "पारित आदेश के तहत अंततः ढाई साल के प्रतिवादी को नाबालिग बच्चे को रोजाना 2 घंटे के लिए घर से बाहर ले जाना पड़ेगा। प्रधान न्यायाधीश स्पष्ट रूप से इससे पड़ने वाले हान‌िकारक प्रभाव पर विचार करने में विफल रहे हैं।"

केस शीर्षक: किनरी धीर बनाम वीर सिंह

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'शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट' के तहत शैक्षणिक संस्थान 'एस्टैब्लिशमेंट' नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक शैक्षणिक संस्थान 'एस्टैब्लिशमेंट' के अर्थ और परिभाषा के दायरे में नहीं आता है, जैसा कि तेलंगाना शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 1988 की धारा 2(10) के तहत परिभाषित किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति बी विजयसेन रेड्डी की खंडपीठ ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को ध्यान में रखा।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस, सीडब्ल्यूसी को POCSO मामलों में पीड़ितों के अधिकारों पर 'जुनैद केस' में दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा है कि पॉक्सो अधिनियम (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) से संबंधित सभी मामलों में, हाईकोर्ट द्वारा (जुनैद बनाम यू.पी. राज्य व अन्य के मामले में) जारी निर्देशों का अनुपालन स्थानीय पुलिस के साथ-साथ संबंधित जिले के सीडब्ल्यूसी ने भी नहीं किया है।

यह ध्यान दिया जा सकता है कि जुनैद के मामले में, हाईकोर्ट ने अन्य बातों के साथ, पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत जमानत आवेदनों के निपटान के लिए निर्देश और समयसीमा जारी की थी। अदालत ने पुलिस और बाल कल्याण समिति को भी निर्देश जारी किया था कि आरोपी के जमानत आवेदन की सूचना मिलने पर पीड़ित/पीड़ित पक्ष को सूचित करें, उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताया जाए और कानूनी सेवाएं प्रदान की जाएं।

केस का शीर्षक - जय हिंद उर्फ बाबू बनाम यूपी राज्य व अन्य

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गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द किया, एक ही परिवार के पांच सदस्यों को घोषित किया था विदेशी

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बुधवार को फॉरेनर्स ट्र‌िब्यूनल के एक आदेश/विचार को रद्द कर दिया, जिसमें उसने आदमी उसके पर‌िवार को विदेश घोषित कर दिया था, क्योंकि परिवार का मुखिया नोटिस दिए जाने के बाद ट्रिब्यूनल के सामने पेश होने में विफल रहा। समय मांगने के बाद वह ‌लिख‌ित बयान दाखिल करने में भी विफल रहा था।

जस्टिस मालाश्री नंदी और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह ट्र‌िब्यूनल के एक तरफा आदेश को रद्द करते हुए कहा कि आदेश का परिवार अन्य सदस्यों यानि उनकी पत्नी और छोटे बच्चों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि परिवार के अन्‍य सदस्य याचिकाकर्ता नंबर एक (जो ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होने में विफल रहा) पर निर्भर हैं।

केस शीर्षक- राजेंद्र दास और अन्य बनाम यून‌ियन ऑफ इंडिया और अन्य

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