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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला के शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर उसके जन्म प्रमाण पत्र में सुधार के आदेश दिए

LiveLaw News Network
3 Dec 2021 8:20 AM GMT
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला के शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर उसके जन्म प्रमाण पत्र में सुधार के आदेश दिए
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को सीबीएसई द्वारा जारी किए गए शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर एक महिला (अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता) के जन्म प्रमाण पत्र में सुधार करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति राज मोहन सिंह की खंडपीठ का यह निर्देश ज्योति बजाज की याचिका पर आया, जिसने प्रतिवादियों को अपने जन्म प्रमाण पत्र में 19 दिसंबर, 1982 की जगह 17 दिसंबर, 1982 की जन्मतिथि लिखकर सही करने के लिए निर्देश देने की मांग की थी।

पूरा मामला

याचिकाकर्ता की सभी शैक्षिक प्रमाणपत्रों, सेवा पुस्तिका, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एनपीएस कार्ड और हरियाणा परिवार पहचान पत्र में जन्मतिथि 17 दिसंबर, 1982 दर्ज की गई है, जिसे उन्होंने अपनी सही जन्मतिथि बताया है।

चूंकि उनके पति यूएसए में रह रहे हैं, इसलिए जब उन्होंने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन किया, तो यूएसए दूतावास ने जन्म प्रमाण पत्र मांगा।

याचिकाकर्ता ने जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवेदन किया और जन्म प्रमाण पत्र देखने पर पता चला कि याचिकाकर्ता की जन्म तिथि 17 दिसंबर 1982 के बजाय गलत तरीके से 19 दिसंबर 1982 दर्ज की गई थी।

इस आधार पर, यूएसए दूतावास ने याचिकाकर्ता को उसकी जन्म तिथि में उपरोक्त विसंगति के कारण ग्रीन कार्ड जारी करने से मना कर दिया।

इसलिए, याचिकाकर्ता ने अपना जन्मतिथि बदलने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।

अदालत के समक्ष यह प्रस्तुत किया गया कि उसके जन्म प्रमाण पत्र रजिस्टर में प्रविष्टि 21 दिसंबर, 1982 को की गई थी, यानी 19 दिसंबर, 1982 को कथित जन्म के दो दिन बाद।

यहां तक कि कोर्ट ने भी पाया कि कॉलम में सब रजिस्ट्रार के आद्याक्षर न होने के कारण प्रविष्टि संदिग्ध प्रतीत होती है।

याचिकाकर्ता ने इसके अलावा अदालत से आग्रह किया कि स्कूल लिविंग प्रमाण पत्र और अन्य शैक्षिक दस्तावेजों के विवरण के आधार पर उसकी जन्मतिथि को सही किया जाए और तर्क दिया कि सीबीएसई द्वारा उसे जारी किए गए प्रमाण पत्र पर उसके जन्मतिथि में सुधार करने के लिए भरोसा किया जाना चाहिए।

यह भी तर्क दिया गया कि इस तरह के दस्तावेज़ सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति करते हैं और अक्सर अन्य सरकारी पहचान दस्तावेजों के लिए आवेदन करते समय नाम और जन्म तिथि जैसे विवरणों को जांच करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

न्यायालय की टिप्पणियां

कोर्ट ने देखा कि भले ही सीबीएसई प्रमाण पत्र को एक पहचान दस्तावेज के रूप में सख्ती से नहीं माना जाता है, लेकिन एक मूलभूत दस्तावेज के रूप में सभी शैक्षणिक और करियर से संबंधित लेनदेन में पुष्टि के उद्देश्यों के लिए उसी पर भरोसा किया जा रहा है।

अदालत ने कहा,

"वास्तव में, सीबीएसई ने स्वयं प्रतिपादित किया है कि सीबीएसई का प्रमाण पत्र सभी आधिकारिक उद्देश्यों के लिए निर्भर है और मैट्रिक प्रमाण पत्र में जन्म तिथि, विशेष रूप से, एक नागरिक की जन्म तिथि का प्राथमिक प्रमाण है।"

कोर्ट ने देखा कि याचिकाकर्ता ने [जिग्या यादव (नाबालिग) (अभिभावक/पिता हरि सिंह के माध्यम से) बनाम सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) और अन्य, 2021 (4) एएलटी 51] मामले पर भरोसा जताया। इसमें यह माना गया था कि मैट्रिक प्रमाण पत्र में जन्म तिथि एक नागरिक की जन्म तिथि का प्राथमिक प्रमाण है।

कोर्ट ने इसके बाद याचिका की अनुमति देते हुए हरियाणा राज्य को निर्देश दिया गया कि वह याचिकाकर्ता के जन्म प्रमाण पत्र में एक आवश्यक सुधार करें और इसके बाद कानून के अनुसार याचिकाकर्ता को इसकी आपूर्ति करने के संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई करें।

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामला अपने प्रकार का एक अनूठा मामला है और इस विषय पर मिसालों द्वारा कवर नहीं किया गया है।

कोर्ट ने कहा,

"इसे अन्य मामलों में एक मिसाल के रूप में तब तक उद्धृत नहीं किया जा सकता जब तक कि तथ्य पूरी तरह से चीजों के फ्रेम में फिट न हों।"

केस का शीर्षक - ज्योति बजाज बनाम हरियाणा राज्य एंड अन्य

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