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टेलीग्राम एप पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, केरल हाईकोर्ट में बैन की मांग पर याचिका

LiveLaw News Network
2 Oct 2019 8:37 AM GMT
टेलीग्राम एप पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप, केरल हाईकोर्ट में बैन की मांग पर याचिका
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केरल हाईकोर्ट में यह कहते हुए कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'टेलीग्राम'अनियंत्रित है और चाइल्ड पोर्नोग्राफी और आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है, इसे प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई है।

नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु की एल.एल.एम की छात्रा एथेना सोलोमन द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि टेलीग्राम गुमनाम संदेशों की पोस्टिंग की अनुमति देता है। याचिका में कहा गया है कि इस सुविधा का व्यापक रूप से दुरुपयोग महिलाओं और बच्चों पर बनाई गई अश्लील और अशिष्ट सामग्री को प्रसारित करने के लिए किया जा रहा है। वर्ष 2013 में इस ऐप को रूस में लॉन्च किया गया था।

इसके तहत 'बेनामी बॉट्स'की अनुमति होती है, जिसके इस्तेमाल से गुप्त संदेशों को प्रसारित किया जा सकता है और इन संदेश को भेजने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गुप्त रहती है।

यह है कानून

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79 (3) के अनुसार एक मध्यस्थ उपयुक्त अधिकारियों के निर्देश पर सामग्री को हटाने या ब्लॉक करने के लिए बाध्य है। याचिकाकर्ता ने कहा कि चूंकि टेलीग्राम का भारत में कोई भी नोडल अधिकारी या पंजीकृत कार्यालय नहीं है, जैसा कि अन्य सोशल मीडिया मध्यस्थों व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब का है। ऐसे में इस मध्यस्थ या टेलीग्राम की जिम्मेदारी इसके खिलाफ लागू करवाना संभव नहीं है।

इसके अलावा, टेलीग्राम अत्यधिक एन्क्रिप्टेड है, जिस कारण कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए इसके माध्यम से प्रसारित होने वाली आपराधिक सामग्री के प्रवर्तकों का पता लगाना लगभग असंभव हो गया है।

"टेलीग्राम अपने उपयोगकर्ताओं की अलग दुनिया"

याचिकाकर्ता ने कई टेलीग्राम चैनलों का हवाला दिया है, जिसमें अश्लील सामग्री को साझा करने की सुविधा है, जिसके हजारों ग्राहक हैं। याचिका में कहा गया है कि केरल पुलिस के साइबरडोम ने एक पीडोफाइल (बाल कामुक समूह) का भंडाफोड़ किया था जो टेलीग्राम के माध्यम से ऐसी सामग्री को बढ़ावा दे रहा था।

याचिका में कहा गया है कि,''टेलीग्राम अपने उपयोगकर्ताओं के लिए एक अलग दुनिया है जिसमें कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है।'' हालांकि, भारत में चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध है, लेकिन टेलीग्राम उस तक पहुंचने के विकल्प के रूप में काम कर रहा है।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि इस ऐप का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। यह व्यापक रूप से आतंकवादियों और देशद्रोहियों द्वारा युवाओं को तैयार करने और प्रशिक्षित करने और उनकी योजनाओं को निष्पादित करने के लिए विशिष्ट निर्देशों को पारित करने के लिए उपयोग की जा रही हैः-

याचिका में कहा गया है कि, ''टेलीग्राम पर संदेशों की गुप्त प्रकृति होने के कारण, इसकी दुनिया भर की सरकारों द्वारा व्यापक रूप से अलोचना की गई है क्योंकि यह आतंकवादियों के लिए संदेशवाहक बन गई है। रूस में ,अप्रैल 2018 में इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि अदालत ने आदेश दिया था कि तब तक इस पर प्रतिबंध लगा दिया जाए जब तक कि इसके उपयोग की व्याख्या नहीं की जाती।

अदालत ने कहा था कि "अपराधियों व आतंकवादियों द्वारा संचार के लिए मुफ्त एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से देश को खतरा है। टेलीग्राम पर इंडोनेशिया में भी प्रतिबंध लगा दिया गया था,हवाला दिया गया था कि इसका उपयोग कट्टरपंथी और आतंकवादी प्रचार फैलाने के लिए किया जा रहा था।''

इसलिए याचिकाकर्ता ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की। कोर्ट गुरुवार को याचिका पर सुनवाई के लिए विचार करेगी।

अदालतों में सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चल रहे हैं मामले

पिछले हफ्ते, सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग के बारे में चिंता व्यक्त की थी और इन्हें विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के संबंध में केंद्र के विचार मांगे थे। मद्रास हाईकोर्ट इस समय व्हाट्सएप, फेसबुक आदि में आपराधिक सामग्री के मूल पहचानकर्ताओं का पता लगाने के तरीकों के मामले में सुनवाई कर रही है। पोर्नोग्राफी का हवाला देते हुए मद्रास हाईकोर्ट द्वारा अप्रैल में वीडियो ऐप 'टिक टोक' पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। टिक टोक द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद यह प्रतिबंध हटा लिया गया था।

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