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सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
पीठासीन जज को 433 (2) सीआरपीसी के तहत सजा माफी के आवेदन पर राय देते समय पर्याप्त कारण बताना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा देने वाली अदालत के पीठासीन अधिकारी को सजा माफी के आवेदन पर राय देते समय पर्याप्त कारण बताना चाहिए।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि सजा देने वाली अदालत के पीठासीन अधिकारी की राय में अपर्याप्त कारण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 (2) की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करेंगे। अदालत ने पाया कि धारा 432 (2) सीआरपीसी का उद्देश्य कार्यपालिका को सभी प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए एक सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।इस मामले में आजीवन...

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नए लकड़ी आधारित उद्योगों की स्थापना के खिलाफ एनजीटी के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नए लकड़ी आधारित उद्योगों की स्थापना के खिलाफ एनजीटी के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस आदेश में उत्तर प्रदेश राज्य को लकड़ी की वास्तविक उपलब्धता का आकलन किए जाने तक नए लकड़ी आधारित उद्योगों की स्थापना के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने का निर्देश नहीं दिया गया था।जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बी आर गवई की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया हम ट्रिब्यूनल के साथ सहमत हैं कि नए लकड़ी आधारित उद्योगों को अनुमति देने से पहले राज्य द्वारा डेटा एकत्र किया जाना है।उत्तर प्रदेश राज्य ने मार्च, 2019 में जारी एक...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
"85% नागरिकों की ओर से दायर": सुप्रीम कोर्ट में हलाल उत्पादों पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली जनहित याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट में हलाल प्रमाणित उत्पादों पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने और हलाल प्रमाण पत्र वापस लेने की मांग करते हुए जनहित याचिका दायर की गई है।याचिकाकर्ता एडवोकेट विभोर आनंद ने कहा कि वह "देश के 85% नागरिकों" की ओर से जनहित याचिका दायर कर रहे हैं, जिन्हें हलाल उत्पादों के लिए कथित रूप से मजबूर किया जा रहा है।याचिका में कहा गया,"केवल आबादी का 15% हिस्सा मुस्लिम अल्पसंख्यक 'हलाल' भोजन का सेवन करना चाहता है, इसके लिए बाकी 85% लोगों पर मजबूर किया जा रहा है।"याचिकाकर्ता के अनुसार, यह...

अगर एयरबैग सिस्टम कार खरीदार द्वारा समझे गए सुरक्षा मानकों को पूरा करने में विफल रहता है तो कार कंपनियां दंडात्मक क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी : सुप्रीम कोर्ट
अगर एयरबैग सिस्टम कार खरीदार द्वारा समझे गए सुरक्षा मानकों को पूरा करने में विफल रहता है तो कार कंपनियां दंडात्मक क्षतिपूर्ति के लिए उत्तरदायी : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एयरबैग सिस्टम प्रदान करने में विफलता जो उचित विवेक के एक कार खरीदार द्वारा समझे गए सुरक्षा मानकों को पूरा करेगी, दंडात्मक क्षति के अधीन होनी चाहिए जिसका निवारक प्रभाव हो सकता है।जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा, "कोई उपभोक्ता भौतिकी में विशेषज्ञ होने के लिए गति और बल के सिद्धांतों पर आधार पर टकराव के प्रभाव की गणना करने के लिए नहीं है।"अदालत ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के आदेश के खिलाफ हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर...

बेहतर हलफनामा दाखिल करिए  सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू युवा वाहिनी कार्यक्रम में हेट स्पीच ना देने के दिल्ली पुलिस के रुख पर असंतोष जताया
"बेहतर हलफनामा दाखिल करिए " सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू युवा वाहिनी कार्यक्रम में हेट स्पीच ना देने के दिल्ली पुलिस के रुख पर असंतोष जताया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस द्वारा दायर उस हलफनामे पर अपना असंतोष व्यक्त किया, जिसमें कहा गया था कि दिसंबर 2021 में दिल्ली में आयोजित हिंदू युवा वाहिनी की बैठक में सुदर्शन न्यूज टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके द्वारा दिए गए भाषण किसी विशेष समुदाय के खिलाफ हेट स्पीच नहीं थी।पीठ ने पुलिस से अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहते हुए टिप्पणी की, "पुलिस उपायुक्त द्वारा हलफनामा दायर किया गया है। हमें उम्मीद है कि वह बारीकियों को समझ गए हैं। क्या उन्होंने केवल जांच रिपोर्ट को पुन: पेश किया है या...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सीआरपीसी की धारा 482 - आपराधिक कार्यवाही महज इसलिए रद्द नहीं की जा सकती कि शिकायत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी द्वारा दर्ज की गई थी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत आपराधिक कार्यवाही महज इसलिए रद्द नहीं की जा सकती कि शिकायत एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी द्वारा दर्ज कराई गई थी।न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि यह तथ्य कि राजनीतिक प्रतिशोध के कारण शिकायत शुरू की गई हो सकती है, आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आधार नहीं है।पीठ ने रामवीर उपाध्याय द्वारा दायर याचिका को खारिज करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी ने अतिरिक्त जिला और...

अन्य नौकरियों में लगे व्यक्तियों को बार काउंसिल इस अंडरटेकिंग परप्रोविज़नल नामांकन दे सकता है कि एआईबीई पास करने के 6 महीने के भीतर वो नौकरी से इस्तीफा दे देंगे
अन्य नौकरियों में लगे व्यक्तियों को बार काउंसिल इस अंडरटेकिंग परप्रोविज़नल नामांकन दे सकता है कि एआईबीई पास करने के 6 महीने के भीतर वो नौकरी से इस्तीफा दे देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एमिकस क्यूरी के वरिष्ठ अधिवक्ता केवी विश्वनाथन द्वारा दिए गए इस सुझाव को स्वीकार कर लिया कि अन्य नौकरियों में लगे व्यक्तियों को संबंधित बार काउंसिल के साथ प्रोविज़नल रूप से नामांकन करने और अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है। एआईबीई पास करने के बाद, उन्हें यह तय करने के लिए 6 महीने की अवधि दी जा सकती है कि वे कानूनी पेशे में शामिल हों या अन्य नौकरी जारी रखें।कोर्ट ने कहा कि बीसीआई ऐसे व्यक्तियों को कानूनी प्रैक्टिस में शामिल होने के...

इस स्तर पर हम बिलकुल भी हस्तक्षेप नहीं करेंगे: सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली नवाब मलिक की याचिका खारिज की
"इस स्तर पर हम बिलकुल भी हस्तक्षेप नहीं करेंगे": सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली नवाब मलिक की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने मलिक की याचिका खारिज कर दी, जो बॉम्बे उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने उन्हें ईडी मामले में गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में अंतरिम राहत...

हमने एससी/ एसटी कर्मचारियों को कैडर के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने का फैसला किया है : बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
हमने एससी/ एसटी कर्मचारियों को "कैडर" के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने का फैसला किया है : बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

बिहार राज्य ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सरकारी कर्मचारियों को "कैडर" के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने का फैसला किया है।जस्टिस एल एन राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ के समक्ष एक आवेदन में ये प्रस्तुत किया गया है जिसमें पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सिविल अपील को वापस लेने की मांग की गई थी। इसमें कहा गया था कि राज्य द्वारा पारित 21 अगस्त, 2012 के प्रस्ताव को, जिसमें पदोन्नति में परिणामी वरिष्ठता को आरक्षण प्रदान किया गया था, कानूनी रूप...

जहांगीरपुरी विध्वंस: दुकान के मालिक ने जूस की दुकान को तोड़े जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, मुआवजे की मांग की
जहांगीरपुरी विध्वंस: दुकान के मालिक ने जूस की दुकान को तोड़े जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, मुआवजे की मांग की

दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके के जूस की दुकान के मालिक ने बुधवार को नई दिल्ली नगर निगम द्वारा उसकी दुकान को अनधिकृत रूप से तोड़ने का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया है।गौरतलब है कि जस्टिस नागेश्वर राव की अगुवाई वाली पीठ ने उक्त विध्वंस अभियान के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह मेयर को यथास्थिति आदेश के बारे में जानकारी दिए जाने के बाद हुए विध्वंस पर "गंभीर विचार" करेगी।पीठ ने जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा विभिन्न राज्यों में अधिकारियों के खिलाफ दायर एक अन्य याचिका...

एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत केसों में आरोपी पूरी तरह पेशी में छूट का दावा नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट
एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत केसों में आरोपी पूरी तरह पेशी में छूट का दावा नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई आरोपी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध से संबंधित मामले में पेश होने से पूरी छूट का दावा नहीं कर सकता है।इस मामले में, मजिस्ट्रेट ने एक चेक बाउंस मामले में आरोपी द्वारा दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि जब मामला मजिस्ट्रेट के सामने उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए सूचीबद्ध हो तो उसे सभी तारीखों पर छूट दी जाए।बाद में, उसकी पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए, सत्र न्यायालय ने निर्देश दिया कि अभियुक्त को...

आप सैनिक फार्म या गोल्फ लिंक में अनधिकृत निर्माण को छूना नहीं चाहते, लेकिन जहांगीरपुरी में गरीबों को निशाना बना रहे हैं : दुष्यंत दवे
"आप सैनिक फार्म या गोल्फ लिंक में अनधिकृत निर्माण को छूना नहीं चाहते, लेकिन जहांगीरपुरी में गरीबों को निशाना बना रहे हैं" : दुष्यंत दवे

वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि जहांगीरपुरी में अतिक्रमण विरोधी अभियान पाखंड से भरा है, क्योंकि केवल गरीबों की संपत्ति को निशाना बनाया जाता है और अमीरों और अभिजात वर्ग के अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती।दवे ने कहा,"यदि आप अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं तो आप सैनिक फार्म में जाएं। गोल्फ लिंक पर जाएं, जहां हर दूसरा घर अतिक्रमण है। आप उन्हें छूना नहीं चाहते, बल्कि गरीब लोगों को निशाना बनाना चाहते हैं।"वरिष्ठ वकील...

स्टालों और कुर्सियों को हटाने के लिए आपको बुलडोजर की आवश्यकता है?: सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी विध्वंस पर एनडीएमसी से पूछा
स्टालों और कुर्सियों को हटाने के लिए आपको बुलडोजर की आवश्यकता है?": सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी विध्वंस पर एनडीएमसी से पूछा

"स्टॉल, कुर्सियों, बेंच, बक्सों को हटाने के लिए, आपको बुलडोजर की आवश्यकता है?" सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम से नई दिल्ली के जहांगीरपुरी में उसके द्वारा चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के संबंध में पूछा।जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने एनडीएमसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा यह प्रस्तुत किए जाने के बाद सवाल उठाया कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी स्टाल, कुर्सी, बेंच आदि को सार्वजनिक सड़क पर रखा गया है, उन्हें...

अतिक्रमण पूरे भारत में एक गंभीर समस्या है, लेकिन मुद्दा यह है कि मुसलमानों को अतिक्रमण से जोड़ा जा रहा है: कपिल सिब्बल ने जहांगीरपुरी विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कहा
"अतिक्रमण पूरे भारत में एक गंभीर समस्या है, लेकिन मुद्दा यह है कि मुसलमानों को अतिक्रमण से जोड़ा जा रहा है": कपिल सिब्बल ने जहांगीरपुरी विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कहा

जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा अन्य राज्यों में आरोपियों के घरों को तोड़े जाने के खिलाफ दायर दूसरी याचिका में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दवे के बाद कुछ इस तरह दलीलें दीं। सिब्बल ने कहा,"अतिक्रमण पूरे भारत में एक गंभीर समस्या है, लेकिन मुद्दा यह है कि मुसलमानों को अतिक्रमण से जोड़ा जा रहा है।"न्यायमूर्ति राव ने पूछा,"कोई हिंदू संपत्ति प्रभावित नहीं हुई?"सिब्बल ने कहा,"कुछ अलग-अलग उदाहरण हैं। मेरी दलील है कि इस तरह की घटनाएं दूसरे राज्यों में भी हो रही हैं। जब जुलूस निकाले जाते हैं और...

मेयर को आदेश की सूचना के बाद विध्वंस पर गंभीरता से विचार करेंगे: सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी विध्वंस पर यथास्थिति के आदेश को अगले आदेश तक बढ़ा दिया
"मेयर को आदेश की सूचना के बाद विध्वंस पर गंभीरता से विचार करेंगे": सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी विध्वंस पर यथास्थिति के आदेश को अगले आदेश तक बढ़ा दिया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को दंगा प्रभावित जहांगीरपुरी इलाके में उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा शुरू किए गए विध्वंस अभियान के खिलाफ यथास्थिति के आदेश को अगले आदेश तक बढ़ा दिया। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिका में एनडीएमसी को नोटिस जारी किया और 2 सप्ताह के भीतर इसका जवाबी हलफनामा मांगा है।पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, "मेयर को सूचना दिए जाने के बाद हुए विध्वंस को हम गंभीरता से लेंगे।" पीठ ने जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा विभिन्न...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
बलात्कार के आरोपी को जमानत मिलने के बाद 'भैया इज बैक' बैनर लगाने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

बलात्कार के आरोपी की जमानत पर रिहाई का स्वागत करने के लिए लगाए गए बैनरों को गंभीरता से लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत को दी गई चुनौती वाली याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।पीठ को पिछली बार सूचित किया गया था कि आरोपी के जमानत पर रिहा होने के बाद "भैया इज बैक" बयान वाले बैनर लगाए गए थे।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमाना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ को आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने सूचित किया कि पोस्टर जमानत देने के आदेश के लगभग तीन महीने...

सिर्फ इसलिए कि डॉक्टर मरीज को नहीं बचा सके, उन्हें चिकित्सकीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सिर्फ इसलिए कि डॉक्टर मरीज को नहीं बचा सके, उन्हें चिकित्सकीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि डॉक्टर मरीज को नहीं बचा सके, उन्हें चिकित्सकीय लापरवाही के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अभय एस ओक की पीठ ने कहा, "डॉक्टरों से उचित देखभाल की उम्मीद की जाती है, लेकिन कोई भी पेशेवर यह आश्वासन नहीं दे सकता कि मरीज संकट से उबरने के बाद घर वापस आ जाएगा।"अदालत ने कहा कि दायित्व तभी आएगा जब (ए) या तो किसी व्यक्ति (डॉक्टर) के पास अपेक्षित कौशल नहीं है, जो अपने पास होने का दावा करता है; या (बी) उसने मामले में कौशल का उचित क्षमता...

हर पापी का एक भविष्य होता है: सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या मामले दोषी को दी गई मौत की सजा को कम किया
"हर पापी का एक भविष्य होता है": सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की बच्ची के बलात्कार और हत्या मामले दोषी को दी गई मौत की सजा को कम किया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चार साल की बच्ची से रेप और हत्या मामले में दोषी को दी गई फांसी की सजा को कम किया है।जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस. रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि निर्धारित अधिकतम सजा हमेशा अपराधी के अपंग मानस की मरम्मत के लिए निर्धारक कारक नहीं हो सकती है।ट्रायल कोर्ट ने आरोपी फिरोज को आईपीसी की धारा 302 के तहत मौत की सजा सुनाई थी और धारा 363 के तहत सात साल के कठोर कारावास और 2000 रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया था। आईपीसी की धारा 366 के तहत अपराध...

टीवी चैनलों में आपराधिक न्यायालयों के क्षेत्र में आने वाले मामलों पर बहस आपराधिक न्याय के प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप के समान : सुप्रीम कोर्ट
टीवी चैनलों में आपराधिक न्यायालयों के क्षेत्र में आने वाले मामलों पर बहस आपराधिक न्याय के प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप के समान : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टीवी चैनलों में आपराधिक न्यायालयों के क्षेत्र में आने वाले मामलों को छूने वाली बहस या चर्चा आपराधिक न्याय के प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप के समान होगी।जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने एक आपराधिक अपील पर फैसले में कहा कि अपराध से संबंधित सभी मामले और क्या कोई विशेष बात सबूत का एक निर्णायक टुकड़ा है, इसे एक टीवी चैनल के माध्यम से नहीं, बल्कि एक न्यायालय द्वारा निपटाया जाना चाहिए।अदालत चार आरोपियों द्वारा दायर आपराधिक अपीलों पर विचार कर रही थी, जिन्हें भारतीय...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
आरोपी के बयान का केवल वह हिस्सा जो साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत खोज की ओर ले जाता है, रिकॉर्ड किया जाए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिए एक फैसले में अभियोजन एजेंसी द्वारा साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के अनुसार तथ्यों की खोज की ओर ले जाने वाले बयान के हिस्से की बजाए अभियुक्त के पूरे बयान को दर्ज करने की प्रथा की आलोचना की।जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, "इस तरह के बयानों में न्यायालय के विवेक को प्रभावित करने और पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने की प्रत्यक्ष प्रवृत्ति हो सकती है। इस प्रथा को तुरंत रोका जाना चाहिए।"इस मामले में, आरोपी-अपीलकर्ताओं को भारतीय दंड संहिताकी धारा 396 ...