उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पूरे प्रदेश में पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों की पहचान करने की प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करे। इसके बाद अगले तीन महीने के भीतर इन स्थानों की सूची प्रकाशित की जाए। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित ऐसे खुले स्थानों का संरक्षण किया जाना जरूरी है।

एक्टिंग चीफ जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह निर्देश रामनगर स्थित एमपी इंटर कॉलेज के खेल मैदान के व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित खेल मैदान का इस्तेमाल खेल गतिविधियों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए संबंधित जिलाधिकारी (DM) की पूर्व लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।

क्या था मामला?

यह जनहित याचिका रामनगर के एक निवासी ने दायर की थी, जिसने खुद को क्रिकेट खिलाड़ी बताते हुए कहा कि शहर में खेल गतिविधियों के लिए उपलब्ध एकमात्र मैदान का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुले स्थान (संरक्षण एवं विनियमन) अधिनियम, 1975 को लागू करने की मांग की थी, जो उत्तराखंड में भी लागू है।

याचिका में राज्य सरकार से अधिनियम के तहत पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों की सूची, उनके प्लान और नक्शे प्रकाशित करने की मांग की गई थी। साथ ही एमपी इंटर कॉलेज के मैदान को खेल गतिविधियों के लिए बहाल करने और वहां कथित असामाजिक गतिविधियों, नशीले पदार्थों की तस्करी तथा खुलेआम शराब पीने जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई।

नगर पालिका ने क्या दलील दी?

रामनगर नगर पालिका परिषद की ओर से पेश वकील ने बताया कि मथुरा दास प्रसादी लाल हिंदू इंटर कॉलेज को दी गई जमीन की लीज वर्ष 1995 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद जमीन राज्य सरकार में निहित हो गई।

नगर पालिका ने कहा कि राज्य की संपत्तियों के संरक्षक के रूप में उसे इस जमीन का प्रबंधन करने का अधिकार है।

इस दौरान 1975 के अधिनियम की धारा 7 का भी हवाला दिया गया, जिसके तहत स्थानीय निकायों को अपने स्वामित्व या नियंत्रण वाले पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों को साफ-सुथरी एवं उचित स्थिति में बनाए रखना होता है।

दशहरा पर रावण दहन के लिए भी मांगी गई थी अनुमति

सुनवाई के दौरान श्री रामलीला समिति, रामनगर के सचिव की ओर से एक अलग आवेदन भी पेश किया गया था। इसमें 20 अक्टूबर, 2026 को दशहरा के अवसर पर इसी मैदान में रावण का पुतला दहन करने की अनुमति मांगी गई थी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मैदान का इस्तेमाल खेल गतिविधियों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए जिलाधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता।

हालांकि, कोर्ट ने श्री रामलीला समिति को दशहरा कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति के लिए जिलाधिकारी, नैनीताल के समक्ष आवेदन करने की छूट दी।

हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

कोर्ट ने कहा कि उत्तराखंड सरकार के शहरी विकास सचिव 1975 के अधिनियम की धारा 3(1) के तहत पार्कों, खेल मैदानों और खुले स्थानों की पहचान करने की प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से छह महीने के भीतर पूरी करें।

इसके बाद धारा 3(4) के तहत इन स्थानों की सूची अगले तीन महीने के भीतर प्रकाशित की जाए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बीच संबंधित एमपी इंटर कॉलेज के खुले मैदान का इस्तेमाल खेल गतिविधियों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए जिलाधिकारी की पूर्व लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जाएगा।

इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका और लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।

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