गुजरात हाईकोर्ट ने मुस्लिम मौलवी को ज़मानत दी, जिस पर धर्म परिवर्तन कराने और उम्र का सबूत जांचे बिना नाबालिग की शादी कराने का आरोप है। [2026 LiveLaw (Guj) 281]

आरोपी पर BNS की धाराओं 64(2)(i), 64(2)(m), 137(2), 87, 115(2), 351(3); POCSO एक्ट की धाराओं 4, 6, 17, 18; बाल विवाह निषेध अधिनियम की धाराओं 9 और 10; और गुजरात धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4A के तहत मामला दर्ज किया गया।

जस्टिस हसमुख डी. सुथार ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता (एक मौलवी) पर आरोप है कि उसने ID प्रूफ, उम्र या किसी अन्य दस्तावेज़ की जांच किए बिना पीड़िता का नाम बदला और शादी कराई। यह भी आरोप है कि उसने पीड़िता का धर्म परिवर्तन कराया।

हालांकि, कोर्ट ने पाया कि गंभीर यौन उत्पीड़न का कोई आरोप नहीं है।

कोर्ट ने यह भी देखा कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। याचिकाकर्ता का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह जून से जेल में है। घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 साल 3 महीने थी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष "उसकी हिरासत जारी रखने या बढ़ाने के लिए कोई ठोस कारण बताने में नाकाम रहा"।

कोर्ट ने इस बात पर भी विचार किया कि ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा और आरोपी को जेल में रखने का मतलब ट्रायल से पहले ही सज़ा देना होगा। ज़मानत से जुड़े इस स्थापित सिद्धांत कि "ज़मानत नियम है और जेल अपवाद है" और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने ज़मानत दी।

अदालत ने कहा,

"मामले के तथ्यों और परिस्थितियों और FIR में आवेदक पर लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए सबूतों पर विस्तार से चर्चा किए बिना, प्रथम दृष्टया अदालत की यह राय है कि यह मामला अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए आवेदक को नियमित ज़मानत देने के लिए उपयुक्त है।"

Case Title : MOLANA MOHAMMAD RAMZAN JANMOHAMMAD v/s STATE OF GUJARAT & ANR

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