दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार के MLA राजू कुमार सिंह की सज़ा पर रोक लगाने से इनकार किया। उन्हें नए साल की पूर्व संध्या पर एक पार्टी में जश्न के दौरान फायरिंग से हुई एक महिला की मौत के मामले में 'गैर-इरादतन हत्या' (Culpable Homicide not Amounting to Murder) के लिए चार साल की जेल की सज़ा सुनाई गई।

जस्टिस मनोज जैन ने कहा कि मामले के "सतही विश्लेषण" से सबूतों को समझने में कोई स्पष्ट गड़बड़ी या बड़ी गलती नहीं दिखी, जिसके आधार पर सज़ा पर रोक लगाई जा सके।

कोर्ट ने कहा,

"और तो और, उनका पिछला रिकॉर्ड भी साफ़ नहीं है। उन पर कई मामलों में शामिल होने का आरोप रहा है। बेशक, कई मामलों में उन्हें बरी भी किया गया, लेकिन ऐसा नहीं है कि उनका रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग हो। ऊपर की गई चर्चा को देखते हुए सज़ा के आदेश पर रोक लगाने की मौजूदा अर्ज़ी खारिज की जाती है।"

सिंह को आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दो महीने की जेल की सज़ा भी सुनाई गई और मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट ने इस साल जुलाई में ही उनकी सज़ा पर रोक लगाई, लेकिन बाद में उन्होंने सज़ा (दोषसिद्धि) पर भी रोक लगाने की मांग की।

यह मामला 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की दरमियानी रात का है, जब शहर के मंडी गांव में रोज़ फार्म हाउस पर नए साल की पूर्व संध्या की पार्टी चल रही है। यह फार्म हाउस सिंह के भाई का है। मृतक महिला अपने पति और बेटी के साथ पार्टी में शामिल हुई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सिंह और उनके सुरक्षा गार्ड के पास हथियार थे और वे जश्न में फायरिंग कर रहे थे। गार्ड ने हवा में दो बार गोली चलाई, जबकि सिंह ने चार से पांच राउंड फायरिंग की।

आरोप है कि करीब चार-पांच मिनट बाद एक और राउंड फायरिंग हुई, जो कथित तौर पर अकेले सिंह ने की थी। इसके तुरंत बाद महिला डांस फ्लोर पर बेहोश मिली और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां गोली लगने से हुई चोट के कारण उसकी मौत हो गई। शुरुआत में सिंह पर IPC की धारा 302 और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत आरोप लगाए गए। आखिरकार उन्हें IPC की धारा 304 पार्ट-II और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी ठहराया गया।

सज़ा पर रोक लगाने की मांग करते हुए सिंह के वकील ने तर्क दिया कि इस सज़ा के कारण 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 8(3) के तहत उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

यह बताया गया कि सिंह बिहार के साहिबगंज से मौजूदा विधायक हैं और उनका कार्यकाल अभी लगभग चार साल बाकी है। सज़ा बरकरार रहने से उनकी सदस्यता और भविष्य के चुनावों में भाग लेने की उनकी योग्यता पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों का सही मूल्यांकन किया और पाया कि दूसरे राउंड की फायरिंग के दौरान केवल सिंह ही गोली चला रहे थे।

अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि अहम समय पर केवल सिंह को ही हथियार का इस्तेमाल करते देखा गया और जिस जगह पीड़ित महिला गिरी थी, वह जगह और जहां सिंह मौजूद थे, वे एक-दूसरे के बहुत करीब थे।

कोर्ट ने कहा,

"इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि गोली सीधे उसे लगी या किसी चीज़ से टकराकर (रिकोशे होकर) लगी। असल बात यह है कि चोट सीधे तौर पर अपीलकर्ता द्वारा की गई कथित फायरिंग का नतीजा थी।"

इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि सिंह कथित तौर पर शराब के नशे में थे और उन्होंने हथियार का इस्तेमाल किया। उन्होंने जश्न में फायरिंग (सेलिब्रेटरी फायरिंग) की थी, जबकि उन्हें अपनी इस हरकत के नतीजों का अच्छी तरह पता था।

जज ने कहा,

"यह कोर्ट इस बात से भी वाकिफ है कि तीन अन्य आरोपियों पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया गया। हालांकि यह आरोप साबित नहीं हो सका, लेकिन इस पहलू का भी विस्तार से विश्लेषण किया जाना ज़रूरी है।"

कोर्ट ने अपराध की प्रकृति और सिंह के आपराधिक इतिहास पर भी गौर किया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां शुरुआती हैं और अपील के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं मानी जाएंगी।

Case Title : RAJU KUMAR SINGH v. THE STATE (NCT OF DELHI)

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