स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

Update: 2026-03-27 11:38 GMT

सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की गई है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के 25 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वामी को प्रयागराज POCSO मामले में अग्रिम जमानत दी गई थी। यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है।

याचिकाकर्ता आशुतोष महाराज ने, AOR सौरभ अजय गुप्ता के माध्यम से, सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

हाईकोर्ट ने अपने 22 पन्नों के आर्डर में स्वामी को राहत देते हुए यह भी कहा था कि नाबालिग पीड़ितों का व्यवहार “असामान्य” प्रतीत होता है, क्योंकि उन्होंने कथित घटना की जानकारी अपने अभिभावकों के बजाय एक बाहरी व्यक्ति (सूचक) को दी।

इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य के उस तर्क को भी खारिज कर दिया था, जिसमें Section 29 POCSO Act के तहत आरोपी के खिलाफ वैधानिक अनुमान (presumption of guilt) की बात कही गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान आरोप तय होने से पहले, यानी प्री-अरेस्ट स्टेज पर लागू नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मामले में पुलिस को सूचना देने में 6 दिन की देरी हुई। आरोप है कि 18 जनवरी 2026 को पीड़ितों ने घटना की जानकारी दी थी, लेकिन सूचक ने 24 जनवरी तक पुलिस से संपर्क नहीं किया, यह कहते हुए कि वह “पूजा/यज्ञ” में व्यस्त था। हालांकि, इसी दौरान 21 जनवरी को उसने एक अन्य मामले में अलग आवेदन दायर किया था।

हाईकोर्ट ने मीडिया की भूमिका पर भी कड़ी आपत्ति जताई। FIR दर्ज होने के बाद कई हिंदी न्यूज चैनलों द्वारा नाबालिग पीड़ितों के इंटरव्यू लिए जाने को कोर्ट ने POCSO Act और Juvenile Justice Act के स्थापित नियमों का सीधा उल्लंघन बताया।

साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले के तथ्यों में “अधिक सतर्कता और सावधानी” की आवश्यकता है, क्योंकि एक महत्वपूर्ण संयोग सामने आया है। जिस दिन (18 जनवरी 2026) सूचक को कथित घटना की जानकारी मिली, उसी दिन आरोपी और स्थानीय प्रशासन के बीच मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान को लेकर विवाद भी हुआ था।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

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