अगर रजिस्ट्री ने फ़ाइल खो दी तो बख्शा नहीं जाएगा: वकील की शिकायत पर CJI सूर्यकांत ने अपनाया कड़ा रुख
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने बुधवार को एक शिकायत पर कड़ा रुख अपनाया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने एक केस फ़ाइल खो दी है, जिससे एक ज़रूरी मामले को रजिस्टर करने और कोर्ट के सामने लिस्ट करने में रुकावट आ रही है।
यह मुद्दा वकील शुभी शिवानी जयदीप ने उठाया। उन्होंने बेंच को बताया कि 8 जून को दायर की गई स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) अभी तक रजिस्टर नहीं की गई।
वकील ने कहा,
"SLP 8 जून को दायर की गई थी, लेकिन रजिस्ट्री ने इसे अभी तक रजिस्टर नहीं किया। हमने रजिस्ट्रार को एक पत्र लिखा। ऐसा लगता है कि केस फ़ाइल रजिस्ट्री की तरफ़ से खो गई है और इसी वजह से इसे कोर्ट के सामने लिस्ट नहीं किया गया।"
तुरंत दखल की मांग करते हुए वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह रजिस्ट्री को फ़ाइल खोजने, मामले को फिर से रजिस्टर करने और इसे तुरंत लिस्ट करने का निर्देश दे।
जवाब में CJI ने आरोप पर चिंता जताई और कहा कि अगर रजिस्ट्री ने सच में कोई फ़ाइल खो दी है तो इसकी गहरी जांच होनी चाहिए।
CJI ने कहा,
"अगर रजिस्ट्री ने फ़ाइल खो दी है तो यह बहुत गंभीर मामला है। अगर हमारी रजिस्ट्री ज़रूरी मामलों में फ़ाइलें खो रही है तो क्या आपको लगता है कि मैं सिर्फ़ लिस्टिंग का निर्देश देकर मामला छोड़ दूंगा? मुझे कुछ और भी करना होगा। कृपया मुझे पूरी जानकारी दें। मैं इस लापरवाही की जांच करना चाहता हूं कि इसके पीछे क्या कारण है।"
वकील ने कोर्ट को बताया कि रजिस्ट्री को कई बार पत्र देने के बावजूद (जिसमें एक पत्र पिछले दिन भी दिया गया था) अभी तक कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद CJI ने वकील के 'एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड' (AOR) से कहा कि वे तुरंत घटना की पूरी जानकारी देते हुए एक औपचारिक शिकायत दर्ज करें।
CJI ने कहा,
"अपने AOR से कहें कि वे आज ही मुझे शिकायत दें। मैं उपलब्ध हूं। आप मुझे चैंबर में शिकायत दे सकते हैं, आप मुझे मेरे घर पर शिकायत दे सकते हैं। मुझे पूरी जानकारी दें कि यह कैसे हुआ।"
चीफ जस्टिस ने संकेत दिया कि वह खुद शिकायत और केस फ़ाइल के खोने की परिस्थितियों की जांच करेंगे।
CJI ने पहले भी रजिस्ट्री के कामकाज पर असंतोष जताया है। मई में उन्होंने यहां तक कह दिया कि रजिस्ट्री का रवैया "खराब" है, क्योंकि कई अधिकारी खुद को "सुपर चीफ जस्टिस" समझने लगे हैं। यह बात तब कही गई, जब CJI ने देखा कि रजिस्ट्री एक प्रतिवादी को नोटिस जारी करने के आदेश का पालन करने में नाकाम रही है।
एक और मामले में फरवरी 2026 में CJI ने कहा कि रजिस्ट्री के कामकाज की "गहराई से जांच" होनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने देखा कि एक जैसे मामले अलग-अलग बेंचों के सामने लिस्ट किए गए।