हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जूनियर अधिकारियों को प्रमोट करने के एससी कॉलेजियम के प्रस्ताव के खिलाफ न्यायिक अधिकारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
हिमाचल प्रदेश के न्यायिक अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसमें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए एससी कॉलेजियम की हालिया सिफारिश को चुनौती दी गई।
यह याचिका इस शिकायत के साथ दायर की गई कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के जज के तौर पर प्रमोशन के लिए जूनियर अधिकारियों के नामों की सिफारिश की गई।
मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए एक वकील ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के सामने कहा,
"यह मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति से जुड़ा है। मेरे विचार किए जाने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है। कॉलेजियम ने प्रमोशन के लिए केंद्र सरकार को मुझसे जूनियर अधिकारियों के नामों की सिफारिश की है। मैं मामले को तत्काल लिस्ट करने का अनुरोध कर रहा हूं।"
CJI सूर्यकांत मामले को लिस्ट करने के लिए सहमत हो गए।
यह याचिका धर्मशाला फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा ने दायर की।
3 जून को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाई कोर्ट में प्रमोशन के लिए न्यायिक अधिकारियों चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल के नामों की सिफारिश की थी।
2024 में हिमाचल प्रदेश में कार्यरत दो जिला जजों ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की। उन्होंने तर्क दिया कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में प्रमोशन के लिए नामों की सिफारिश करते समय उनकी योग्यता और वरिष्ठता को नजरअंदाज किया। सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार की और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से उनके नामों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया।
Case : ARVIND MALHOTRA v. HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH | Diary no. 36875/2026