पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में 3-4 सीनियर एडवोकेट मचा रहे हैं अराजकता: सुप्रीम कोर्ट ने जजों को मामले से अलग न होने की दी सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में एक पूर्व न्यायिक अधिकारी की सेवा से बर्खास्तगी से जुड़े मामले में लगातार हो रही जजों की स्वयं को अलग करने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि राज्य में तीन-चार तथाकथित सीनियर एडवोकेट अराजकता पैदा कर रहे हैं।
चीफ जस्टिस ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई के लिए दो जजों की खंडपीठ गठित की जाए। साथ ही उन्होंने जजों को यह सलाह भी दी कि किसी भी परिस्थिति में मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग न करें, चाहे कोई भी कैसी भी स्थिति पैदा करने की कोशिश करे।
सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहन की पीठ एक पूर्व न्यायिक अधिकारी द्वारा दायर स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की कई पीठें स्वयं को अलग कर चुकी हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि कुछ वकीलों द्वारा बार-बार जजों के अलग होने की स्थिति पैदा कर कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
याचिकाकर्ता को स्वयं बहस करने की सलाह देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा,
“मुझे पता है कि चार-पांच सीनियर एडवोकेट इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं। मैं इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहा हूं। तीन-चार तथाकथित सीनियर एडवोकेट अराजकता मचा रहे हैं। बेहतर होगा कि आप स्वयं ही अपनी पैरवी करें।”
जब याचिकाकर्ता ने बताया कि अब तक चार पीठें मामले से अलग हो चुकी हैं तब चीफ जस्टिस ने कहा,
“मैं जानना चाहूंगा कि वे जज कौन हैं। फिर मैं यह जांच करूंगा कि आखिर आप लोग किस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं।”
याचिकाकर्ता ने बताया कि सबसे पहले जस्टिस लिसा गिल ने स्वयं को मामले से अलग किया। इसके बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस ने फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनवाई से अलग होने का निर्णय लिया। बाद में जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस दीपक सिब्बल ने भी मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि पेंशन और सामान्य भविष्य निधि से संबंधित उसकी अर्जियों पर अब तक विचार नहीं किया गया।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह सुनिश्चित करेगा कि मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में ही हो।
चीफ जस्टिस ने कहा,
“मैं चीफ जस्टिस से पीठ गठित करने के लिए कहूंगा। यदि किसी ने कोई शरारत करने की कोशिश की तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। हम यहां से मामले की निगरानी करेंगे।”
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को किसी अन्य हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने से इनकार करते हुए निर्देश दिया कि एक्टिंग चीफ जस्टिस दो जजों की खंडपीठ गठित करें। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित जज किसी भी परिस्थिति में स्वयं को मामले से अलग न करें।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई 13 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में प्रतिदिन के आधार पर की जाए। फैसला सुरक्षित होने के बाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।