CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन: कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण समेत कई नेता-कार्यकर्ता जुटे; इस्तीफे की मांग
मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन हुआ। ये आरोप प्रदर्शनकारियों और आयोजकों की ओर से लगाए गए हैं; अपने आप में ये किसी तरह की अनियमितता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं।
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू रखे। पुलिस के अनुसार बिना अनुमति सभा, जुलूस, धरना, भाषण और नारेबाजी पर रोक थी। पुलिस ने यह भी कहा कि 3 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी।
शनिवार को प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर जुटने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटने के लिए कहा और कई लोगों को हिरासत में लिया। युवा संगठनों और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन जारी रखने का आह्वान किया। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन में शामिल होने की घोषणा की और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकार बताया।
इससे एक दिन पहले, 2 अक्टूबर को दिल्ली में 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। प्रदर्शन में कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव समेत कई राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। कुछ रिपोर्टों में दिल्ली भर में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या करीब 1,000 बताई गई है; अलग-अलग स्थानों के आंकड़ों में अंतर होने के कारण इन्हें जोड़कर एकल संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शन के संबंध में तीन FIR भी दर्ज की हैं। पुलिस के मुताबिक दो FIR संसद मार्ग थाने और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज हुई है। मामलों में सार्वजनिक सेवक के आदेश की कथित अवहेलना समेत BNS की धाराएं लगाई गई हैं।
प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और बैरिकेडिंग के कारण मध्य दिल्ली में यातायात और सार्वजनिक आवाजाही भी प्रभावित हुई थी।