3 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली को बताया 'चौंकाने वाला'

Update: 2026-03-23 11:58 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हरियाणा में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले की जांच को लेकर पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताई और जांच की प्रक्रिया को “चौंकाने वाला” तथा असंवेदनशील बताया।

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारी को 25 मार्च को पूरे रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।

मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस शिकायत पर भी गंभीर चिंता जताई कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बच्ची का बयान आरोपियों की मौजूदगी के पास (close proximity) में दर्ज किया। कोर्ट ने गुरुग्राम की सत्र अदालत को निर्देश दिया कि वह संबंधित मजिस्ट्रेट से इस संबंध में स्पष्टीकरण प्राप्त करे।

“बेहद परेशान करने वाली स्थिति”

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के माता-पिता द्वारा दाखिल हलफनामे से यह संकेत मिलता है कि बच्ची का परीक्षण और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया बेहद परेशान करने वाले तरीके से की गई।

सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग

यह याचिका बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर की गई थी, जिसमें हरियाणा पुलिस की जांच पर असंतोष जताते हुए मामले की जांच सीबीआई या विशेष जांच दल (SIT) से कराने की मांग की गई।

“पुलिस का रवैया असंवेदनशील”

याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि जांच अधिकारी माता-पिता पर एफआईआर वापस लेने का दबाव बना रही थी। उन्होंने बताया कि बच्ची का बयान ऐसे समय लिया गया जब आरोपी पास में मौजूद थे, जबकि कानून के अनुसार ऐसा नहीं होना चाहिए।

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा,

“यह बेहद चौंकाने वाला है कि पुलिस इस तरह असंवेदनशील व्यवहार कर रही है, खासकर एक महानगर में, जहां एक आघात झेल रही बच्ची के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है।”

“एफआईआर दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य”

कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि पुलिस अधिकारी माता-पिता से पूछ रहे थे कि वे क्या करना चाहते हैं। सीजेआई ने कहा कि एफआईआर दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है और उन्हें कानून की बुनियादी समझ होनी चाहिए।

महिला आईपीएस अधिकारियों की जानकारी मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के महाधिवक्ता से हरियाणा में कार्यरत महिला आईपीएस अधिकारियों के नाम भी प्रस्तुत करने को कहा।

बच्चे को बार-बार घुमाने पर नाराज़गी

कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि बच्ची को कई दिनों तक पुलिस स्टेशन, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, मजिस्ट्रेट कोर्ट और अस्पताल के बीच बार-बार ले जाया गया, जिससे उसे और मानसिक आघात पहुंचा।

दिशानिर्देश बनाने की मांग

वरिष्ठ अधिवक्ता रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह ऐसे मामलों में संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करे।

मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।

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