Janhavi Gadkar Drunk Driving Case | विवादित ऑडी कार बेचने की इजाज़त देने के पक्ष में नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

Update: 2026-06-12 16:06 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (11 जून) को कहा कि वह शुरुआती तौर पर जान्हवी गडकर को अपनी ऑडी Q5 कार बेचने की इजाज़त देने के पक्ष में नहीं है। गडकर एक कॉर्पोरेट वकील हैं, जिन पर शराब पीकर गाड़ी चलाने का हाई-प्रोफाइल केस दर्ज है। उनकी कार जून 2015 में ईस्टर्न फ्रीवे पर एक टैक्सी से टकरा गई थी, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी।

सिंगल-जज जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि उस गाड़ी को बेचने की इजाज़त देना केस में मुख्य सबूत को 'नष्ट' करने जैसा होगा।

गौरतलब है कि गडकर की उस कार को बेचने की अर्ज़ी को ट्रायल कोर्ट ने 2 अगस्त 2023 को खारिज किया था, जिसके बाद उन्होंने गाड़ी बेचने की इजाज़त के लिए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

शुक्रवार शाम को हुई सुनवाई में गडकर के वकील अश्विन धूल ने कोर्ट को बताया कि कार का रखरखाव बहुत महंगा है, इसलिए उनकी क्लाइंट ने इसे बेचने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट से गाड़ी की कस्टडी मिलने के बाद उन्होंने कार की ज़रूरी मरम्मत करवाई और पेंट भी करवाया, इसलिए अब वह इसे बेचना चाहती हैं।

धूल ने कहा,

"गाड़ी की सबूत के तौर पर अहमियत कम हो गईं... मैंने गाड़ी को दोबारा पेंट वगैरह करवाया... लेकिन पंचनामा, तस्वीरें और एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट वगैरह के रूप में सबूत अभी भी कोर्ट के पास हैं।"

हालांकि, जस्टिस जामदार ने बताया कि गाड़ी गडकर के कब्ज़े में है और इस मामले में दो लोगों की जान गई थी और कुछ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यह बात धूल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देने के जवाब में कही गई, जिसके बारे में उनका दावा था कि वह विवादित गाड़ी को बेचने के उनके मामले का समर्थन करता है।

जस्टिस जामदार ने टिप्पणी की,

"सुप्रीम कोर्ट का कौन सा फैसला कहता है कि आप जाकर गाड़ी बेच सकते हैं... आप जिस आदेश का हवाला दे रहे हैं, वह सिर्फ़ इंश्योरेंस के मकसद से है, न कि आरोपी के गाड़ी बेचने के लिए... उन फैसलों का मकसद यह है कि गाड़ी पुलिस स्टेशन में नहीं पड़ी रहनी चाहिए..."

इसके अलावा, जज ने साफ़ किया कि वह दिल्ली हाईकोर्ट या इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसलों को नहीं मानेंगे, क्योंकि वह उन फैसलों से 'बाध्य' नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले का सख्ती से पालन करेंगे, जिसमें साफ़ तौर पर कहा गया कि ट्रायल के दौरान आरोपी उस गाड़ी को बेच सकता है, जिससे अपराध हुआ।

जस्टिस जामदार ने सुनवाई 17 जून तक टालते हुए कहा,

"सुप्रीम कोर्ट का मकसद इंश्योरेंस से जुड़ा है, न कि मुख्य सबूत को नष्ट करने से... आप जो मांग रहे हैं, उससे सबूत नष्ट हो जाएंगे... शुरुआती स्तर पर मैं आपको इसकी इजाज़त देने के पक्ष में नहीं हूं... फिर भी अगर आपके पास कोई ऐसा फ़ैसला है, जो आपके पक्ष में है तो उसे लेकर आएं; अगली सुनवाई में उस पर विचार किया जाएगा..."

हालांकि, जब एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने बताया कि पिछले 10 सालों से केस आगे नहीं बढ़ा, क्योंकि अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं तो जस्टिस जामदार ने थूल से कहा कि वे इस याचिका को वापस लेने के बारे में भी निर्देश लेकर आएं।

Case Title: Janhavi Ajit Gadkar vs State of Maharashtra (WP/6626/2024)

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