DEEPFAKE और मानहानिकारक पोस्ट के खिलाफ नितिन गडकरी को मुकदमा दायर करने की अनुमति, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी मंजूरी

Update: 2026-07-27 10:14 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट पर प्रसारित कथित DEEPFAKE, AI से तैयार तथा मानहानिकारक सामग्री के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दी। यह सामग्री उन्हें इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) नीति से जोड़ते हुए प्रसारित किए जाने का आरोप है।

जस्टिस अभय आहूजा की एकल पीठ ने गडकरी को X, मेटा, गूगल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दीवानी वाद दायर करने तथा कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने सहित उचित राहत मांगने की अनुमति प्रदान की।

गडकरी ने अपने अधिवक्ता संदीप एस. लड्डा के माध्यम से लेटर्स पेटेंट के प्रावधान के तहत हाईकोर्ट से अनुमति मांगी थी। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है, जब विवाद के कुछ तथ्य हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर उत्पन्न हुए हों।

प्रस्तावित वाद में गडकरी ने कहा कि वर्ष 2003 में केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को राष्ट्रीय नीति के रूप में शुरू किया। वर्ष 2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E-20) का लक्ष्य लागू किया गया, जिसका पूरा दायित्व पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास है। इस संबंध में मंत्रालय समय-समय पर आधिकारिक विज्ञप्तियां, बयान और स्पष्टीकरण भी जारी करता रहा है।

गडकरी ने कहा कि वह वर्ष 2014 से अब तक सड़क परिवहन मंत्री हैं और E-20 नीति बनाने या लागू करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। इसके बावजूद, कुछ अज्ञात लोगों ने सोशल मीडिया और इंटरनेट पर उनके नाम से झूठी, भ्रामक और डीपफेक सामग्री प्रसारित की, जिसमें उन्हें इस नीति के लिए जिम्मेदार बताया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि इन पोस्टों में यह भी झूठा और दुर्भावनापूर्ण दावा किया गया कि गडकरी और उनके परिवार के सदस्यों को ई-20 नीति से अनुचित आर्थिक लाभ मिला। इससे उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, हितों के टकराव, पद के दुरुपयोग और सरकारी अधिकारों के गलत इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोपों का संकेत देने की कोशिश की गई।

गडकरी ने अपनी याचिका में ऐसे 24 कथित मानहानिकारक पोस्ट का उल्लेख करते हुए अदालत से उन्हें हटाने का निर्देश देने की मांग की।

उन्होंने अदालत से कहा कि इस मुकदमे का उद्देश्य लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक बहस या सरकारी नीतियों की निष्पक्ष और सद्भावनापूर्ण आलोचना को रोकना नहीं है।

याचिका में कहा गया,

"मैं निष्पक्ष आलोचना, असहमति, बहस या सार्वजनिक जीवन तथा सरकारी नीतियों पर ईमानदार राय व्यक्त करने पर रोक नहीं चाहता। लेकिन संबंधित सामग्री प्रथम दृष्टया झूठी, मनगढ़ंत, दुर्भावनापूर्ण, अपमानजनक और मानहानिकारक है। डीपफेक सामग्री का उपयोग मेरी जानकारी, सहमति और अनुमति के बिना किया गया।"

गडकरी ने कथित मानहानि के लिए 11 करोड़ रुपये हर्जाने की भी मांग की।

मामले की नियमित सुनवाई अब जस्टिस आरिफ डॉक्टर की पीठ के समक्ष होने की संभावना है।

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