बॉम्बे हाईकोर्ट ने पीएम आवास योजना के तहत 25,000 घरों के अलॉटमेंट पर लगी रोक हटाने से किया इनकार, अमीर आवेदकों की पात्रता पर उठाए सवाल
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (27 जुलाई) को नवी मुंबई में CIDCO द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) (PMAYU-2.0) के तहत बनाए गए लगभग 25,000 फ्लैटों के अलॉटमेंट पर लगी रोक हटाने से इनकार किया। ये फ्लैट कम आय वाले वर्ग (LIG) के लिए थे।
बता दें, इस साल मार्च में हाईकोर्ट ने अलॉटमेंट पर रोक लगाई। कोर्ट ने यह देखकर हैरानी जताई कि CIDCO ने सालाना 6 लाख रुपये से ज़्यादा कमाने वाले लोगों को भी LIG फ्लैटों के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने इस फैसले को 'गरीबों का मज़ाक' बताया था, क्योंकि इसमें 'साइकिल मालिक का मुकाबला मर्सिडीज़ मालिक से' कराया जा रहा था।
सोमवार को जब एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की डिवीज़न बेंच के सामने मामले की सुनवाई हुई तो CIDCO ने महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल डॉ. मिलिंद साठे के ज़रिए स्पष्ट किया कि 25,000 घरों में से सभी LIG ग्रुप के लिए नहीं थे।
एजी ने स्पष्ट किया कि इन 25,000 फ्लैटों में से केवल 15,000 आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) के लिए हैं और बाकी 10,000 घर उन लोगों के लिए हैं, जो EWS श्रेणी में नहीं आते हैं।
इस पर ACJ घुगे ने सवाल किया,
"क्या हम दोनों (जज) भी आवेदन कर सकते हैं?" और AG ने हाँ में जवाब दिया।
ACJ घुगे ने पूछा,
"लेकिन ये प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर हैं, है ना?"
इस पर AG ने फिर से 'हाँ' कहा।
इस जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए ACJ ने टिप्पणी की,
"बहुत अमीर लोगों के लिए PMAY के तहत घर? सच में?"
AG ने बताया कि जिन लोगों ने फॉर्म भरे थे, उन्हें कीमतें पता थीं और कम से कम पाँच विकल्प हैं (जिसमें फ्लैटों के रेट चार्ट और फ्लैटों का साइज़ भी शामिल है)। AG ने तर्क दिया कि कोई भी व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उन्हें अचानक फ्लैटों की कीमतों के बारे में बताकर चौंकाया गया।
इस पर ACJ घुगे ने जानना चाहा कि CIDCO फ्लैट्स की लॉटरी निकालने के बजाय उनकी 'नीलामी' क्यों नहीं कर रहा है, जबकि संभावित खरीदारों की कमाई की क्षमता पर कोई सीमा नहीं है। हालांकि, AG ने जवाब दिया कि PMAY के तहत घरों की नीलामी वैसे नहीं की जा सकती जैसे दूसरे मामलों में की जाती है।
ACJ घुगे ने सवाल किया,
"तो PMAY स्कीम क्या कहती है?"
इस पर AG ने जवाब दिया कि इसमें फ्लैट्स को तय कीमतों पर बेचने का प्रावधान है।
ACJ घुगे ने टिप्पणी की,
"तो किसे? अमीर लोगों को या गरीब लोगों को? नवी मुंबई के अलावा हमने ऐसी स्कीम कहीं नहीं देखी... क्या आप चाहते हैं कि हम जांचें कि यह स्कीम नवी मुंबई पर लागू होती है या नहीं? यह हमारी अंतरात्मा को झकझोर देती है... CIDCO PM आवास योजना के तहत घर बनाता है, जो उन लोगों के लिए होते हैं, जिनके सिर पर कोई छत नहीं है... CIDCO के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जिसके पास नवी मुंबई में पक्का घर नहीं है और जिसकी सालाना आय 6 लाख रुपये से ज़्यादा है, वह आवेदन कर सकता है, जिसका मतलब है कि जज, AG और कोई भी आवेदन कर सकता है।"
इस बीच बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील अभिनव चंद्रचूड़ को निर्देश दिया कि वे सुनवाई की अगली तारीख से पहले इस मामले में अपनी लिखित दलीलें जमा करें।
जब AG ने बेंच से आवंटन की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति मांगी तो ACJ घुगे ने मौखिक रूप से कहा,
"अब हम अंतिम दलीलें सुनेंगे और मामले पर अंतिम फैसला करेंगे। तब तक रोक जारी रहेगी।"
Case Title: Abheeshek Shashikant Israji v/s State of Maharashtra