E-20 पेट्रोल नीति से जुड़े कथित डीपफेक मामले में नितिन गडकरी के 11 करोड़ रुपये के मानहानि वाद पर 5 अगस्त को होगी सुनवाई

Update: 2026-07-28 08:32 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री और सीनियर भाजपा नेता नितिन गडकरी की ओर से दायर 11 करोड़ रुपये के मानहानि वाद की सुनवाई 5 अगस्त तक स्थगित की।

इस वाद में गडकरी ने सोशल मीडिया और इंटरनेट से E-20 पेट्रोल नीति से जोड़ने वाली कथित मानहानिकारक और डीपफेक सामग्री हटाने की मांग की।

गडकरी का कहना है कि सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित इस सामग्री से उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इसी आधार पर उन्होंने 11 करोड़ रुपये हर्जाने की भी मांग की।

गडकरी की ओर से एडवोकेट संदीप एस. लड्डा ने यह वाद दायर किया।

मामले की सुनवाई जस्टिस आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ के समक्ष हुई।

सुनवाई के दौरान गूगल की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें अभी तक वाद की प्रति प्राप्त नहीं हुई।

इसके बाद हाईकोर्ट ने गडकरी की ओर से पेश अधिवक्ता को सभी प्रतिवादियों को वाद की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त के लिए तय की।

पूरा मामला

इससे पहले 27 जुलाई को जस्टिस अभय आहूजा ने नितिन गडकरी को एक्स, मेटा, गूगल और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मानहानि का दीवानी वाद दायर करने की अनुमति दी थी।

वाद में गडकरी ने कहा कि वर्ष 2003 में केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू किया और वर्ष 2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E-20) का लक्ष्य लागू किया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरी नीति का दायित्व पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के पास है।

गडकरी ने अदालत को बताया कि वह वर्ष 2014 से सड़क परिवहन मंत्री हैं और ई-20 नीति के निर्माण या उसके क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। इसके बावजूद कुछ अज्ञात लोगों ने सोशल मीडिया पर कथित डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री प्रसारित कर उन्हें इस नीति के लिए जिम्मेदार बताया और उनके खिलाफ अपमानजनक तथा मानहानिकारक आरोप लगाए।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि इन पोस्टों में बिना किसी आधार के यह दावा किया गया कि गडकरी और उनके परिवार को ई-20 नीति से अनुचित आर्थिक लाभ मिला, जिससे उनके खिलाफ भ्रष्टाचार भाई-भतीजावाद, हितों के टकराव और पद के दुरुपयोग जैसे आरोपों का संकेत देने की कोशिश की गई।

गडकरी ने अदालत के समक्ष ऐसे 24 कथित मानहानिकारक पोस्ट का उल्लेख करते हुए उन्हें हटाने का निर्देश देने की मांग की।

याचिका में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वाद का उद्देश्य सरकारी नीतियों पर निष्पक्ष आलोचना, असहमति या सार्वजनिक बहस को रोकना नहीं है।

उनका कहना है कि विवादित सामग्री प्रथम दृष्टया झूठी, मनगढ़ंत, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक है तथा उनकी जानकारी या अनुमति के बिना डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर उनके व्यक्तित्व का दुरुपयोग किया गया।

Tags:    

Similar News