नागपुर फैक्ट्री ब्लास्ट केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने SBL Energy के MD-CEO समेत 5 को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने SBL Energy Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर, CEO और अन्य निदेशकों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला नागपुर के कटोल स्थित विस्फोटक निर्माण फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट से जुड़ा है, जिसमें 17 मजदूरों की मौत हो गई थी और 23 अन्य घायल हुए थे।
जस्टिस रजनीश व्यास की एकल पीठ ने संजय चौधरी (MD), आलोक चौधरी (CEO/Director), केदार पचापुत्रे (डिप्टी मैनेजर, सेफ्टी) और निदेशक आलोक अवधिया व श्रवण कुमार की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
अदालत ने कहा कि खतरनाक पदार्थों को बिना उचित सावधानी के संभालना कानूनन प्रतिबंधित है। मजदूरों को बिना किसी प्रशिक्षण के काम पर लगाना उन्हें गंभीर खतरे में डालना है। केवल यह तर्क कि कंपनी को विस्फोट और जांच के कारण नुकसान हुआ है, मानव जीवन की अहमियत को कम नहीं कर सकता।
अपने 42 पन्नों के आदेश में अदालत ने यह भी कहा कि कंपनी ने सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की और पूर्व में बताई गई कमियों को दूर नहीं किया। खतरनाक उद्योगों में लगातार वैधानिक नियमों का उल्लंघन, विशेषकर पूर्व चेतावनी के बावजूद, केवल लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी को जन्म देता है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि वर्ष 2024 में इसी फैक्ट्री में एक और विस्फोट हुआ था, जिसमें दो मजदूर घायल हुए थे। उस घटना के बाद Directorate of Industrial Safety and Health और Petroleum and Explosives Safety Organisation ने सुरक्षा खामियों को लेकर नोटिस जारी किया था, लेकिन कंपनी ने उन निर्देशों का पालन नहीं किया।
न्यायालय ने कहा कि आरोपियों ने इन खामियों को नजरअंदाज किया और यह दलील स्वीकार नहीं की कि उन्हें DISH की रिपोर्ट की जानकारी नहीं थी। अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में आरोपी का घटनास्थल पर मौजूद होना आवश्यक नहीं है।
हालांकि, अदालत ने स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक सत्यवती पराशर, रविंद्र पोखरा और मनोज प्रसाद को अग्रिम जमानत दे दी, क्योंकि वे कंपनी के दैनिक कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं थे और सत्यवती पराशर गंभीर बीमारी (स्टेज-3 कैंसर) से पीड़ित हैं।