420 करोड़ की कथित टैक्स चोरी का मामले: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी के खिलाफ 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत कार्रवाई पर लगाई रोक
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (8 जून) को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को निर्देश दिया कि वह उद्योगपति और रिलायंस ग्रुप के मालिक अनिल अंबानी के खिलाफ 'ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और टैक्स लगाने का कानून, 2015' (Black Money Act) के प्रावधानों के तहत कोई सख्त कार्रवाई न करे। यह मामला 420 करोड़ रुपये की कथित टैक्स चोरी से जुड़ा है।
जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की डिवीजन बेंच ने गौर किया कि अंबानी ने ब्लैक मनी एक्ट के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। उनके अलावा, कुछ अन्य याचिकाओं में भी इस कानून को चुनौती दी गई और उन पर सुनवाई होनी बाकी है।
जजों ने आदेश में कहा,
"जहां तक अंतरिम राहत की बात है, हम निर्देश देते हैं कि चूंकि असेसमेंट ऑर्डर पहले ही जारी हो चुका है और याचिकाकर्ता ने CIT(A) के समक्ष अपील दायर की है, इसलिए उक्त अपील पर आगे की कार्रवाई हो सकती है और उस पर आदेश पारित किए जा सकते हैं। हालांकि, हम स्पष्ट करते हैं कि इस रिट याचिका की सुनवाई और अंतिम निपटारे तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई (जैसे मुकदमा चलाना या जुर्माना लगाना) नहीं की जाएगी।"
गौरतलब है कि अंबानी ने 2022 में यह याचिका दायर की थी, जिसमें ब्लैक मनी एक्ट के तहत 'पिछली तारीख से लागू होने वाले आपराधिक प्रावधानों' (Retrospective Criminalisation) की वैधता को चुनौती दी गई। उन्होंने दावा किया कि IT डिपार्टमेंट उनके खिलाफ उन ट्रांज़ैक्शन के लिए कार्रवाई कर रहा है, जो 2006-2007 (यानी 1 जुलाई 2015 से लागू हुए BM एक्ट से 10 साल पहले) और 2012-13 के हैं।
इसलिए अंबानी की याचिका में उन्हें जारी किए गए इनकम टैक्स से जुड़े दो मुकदमों का नोटिस रद्द करने की मांग की गई। ये नोटिस दो स्विस बैंक अकाउंट में लगभग 814 करोड़ रुपये की रकम का खुलासा न करने और 420 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के आरोपों से संबंधित थे। हाईकोर्ट ने सितंबर 2022 में इन नोटिस पर रोक लगा दी।
ये 'कारण बताओ नोटिस' (show cause notices) 8 अगस्त 2022 को ब्लैक मनी एक्ट की धारा 50 और 51 के तहत जारी किए गए, जिनमें लगभग 420 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का आरोप लगाया गया। नोटिस को रद्द करने की मांग के अलावा, अंबानी ने BM Act की धारा 3(1) और धारा 50, 51, 59 और 72C की वैधता को भी चुनौती दी। इन धाराओं में कानून को पिछली तारीख से लागू करने की इजाज़त है, जिसे अंबानी ने संविधान के अनुच्छेद 14, 20 और 21 का उल्लंघन और अधिकार क्षेत्र से बाहर (अल्ट्रा वायर्स) बताया।
याचिका में कहा गया,
"BM Act के प्रावधान, जो 1 जुलाई 2015 से लागू हुए, उन्हें किसी ऐसी कथित अघोषित विदेशी संपत्ति की वैल्यू पर टैक्स लगाने के लिए पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता, जो 1 जुलाई 2015 को कानून लागू होने से पहले मौजूद रही हो।"
जनवरी 2023 में हाईकोर्ट ने अटॉर्नी जनरल को नोटिस जारी किया, क्योंकि अंबानी की याचिका में 'ब्लैक मनी एक्ट' की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई।
अब, बेंच ने IT विभाग को निर्देश दिया कि वह 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत अंबानी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करे। साथ ही बेंच ने उनकी याचिका को उन दूसरी रिट याचिकाओं के साथ जोड़ने का आदेश दिया, जिनमें भी इस एक्ट की वैधता को चुनौती दी गई और सभी याचिकाओं को अंतिम बहस के लिए सूचीबद्ध किया।
Case Title: Anil Dhirajlal Ambani vs Union of India (Writ Petition 5321 of 2022)