भीषण गर्मी में बिना शेड बस का इंतजार कराना गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन: बॉम्बे हाईकोर्ट

Update: 2026-05-14 12:48 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि नागरिकों को भीषण गर्मी, बारिश या अन्य खराब मौसम में बिना शेड और बैठने की व्यवस्था के सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।

जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की खंडपीठ ने नागपुर शहर में बस स्टॉप की खराब स्थिति अतिक्रमण और यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी एक मराठी समाचार रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था।

अदालत ने कहा,

“बस स्टॉप पर बुनियादी ढांचे की कमी केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संवैधानिक शासन की विफलता को दर्शाती है। जब नागरिकों को बिना शेड और बैठने की सुविधा के खराब मौसम में इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है, तब राज्य प्रभावी रूप से उन्हें गरिमापूर्ण जीवन से वंचित करता है।”

खंडपीठ ने कहा कि स्टूडेंट, सीनियर सिटीजन, दिहाड़ी मजदूर और कार्यालय जाने वाले बड़ी संख्या में लोग रोजाना शहर की बस सेवा पर निर्भर हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और उचित योजना के अभाव में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अदालत ने विशेष रूप से मेडिकल स्क्वायर से क्रीड़ा स्क्वायर और राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज प्रतिमा से बेसा रोड तक के इलाके का उल्लेख किया। अदालत के अनुसार यह शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है लेकिन यहां कोई निर्धारित बस स्टॉप या उचित यात्री सुविधा नहीं है।

अदालत ने कहा कि मेडिकल स्क्वायर के पास एक पेट्रोल पंप के निकट बसें नियमित रूप से रुकती हैं लेकिन वहां यात्रियों के लिए न तो शेड है, न बैठने की व्यवस्था और न ही बस स्टॉप का कोई संकेतक बोर्ड।

इसके अलावा, अदालत ने सीताबर्डी से बेसा स्क्वायर मार्ग पर स्थित स्वामी समर्थ मानेवाड़ा रोड बेसा बस स्टॉप का भी जिक्र किया। अदालत ने पाया कि यह बस स्टॉप सड़क के एक कोने में स्थित है, जिसके कारण यात्रियों को वह आसानी से दिखाई नहीं देता और लोग सड़क किनारे अन्य स्थानों पर खड़े होकर बस का इंतजार करते हैं।

अदालत ने कहा कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर कई दुकानदारों, विक्रेताओं और वाहन मालिकों ने बस स्टॉप पर अतिक्रमण कर लिया। जबकि नगर निगम और यातायात पुलिस शहर में नियमित अभियान चलाते हैं, इस स्थान की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

खंडपीठ ने विशेष रूप से विदर्भ क्षेत्र में अप्रैल और मई के दौरान पड़ने वाली भीषण गर्मी का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में बस स्टॉप और यात्री सुविधाओं का महत्व और बढ़ जाता है।

समाचार रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों को गंभीर मानते हुए अदालत ने मामले को स्वतः जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया।

इसके बाद अदालत ने नागपुर नगर निगम के आयुक्त को निर्देश दिया कि वह पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाएं और नागपुर शहर में बस स्टॉप ढांचे तथा यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करें।

हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त को चार महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट अदालत के रजिस्ट्रार के समक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया।

इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने स्वतः जनहित याचिका का निपटारा किया।

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