न्यायिक परीक्षा में तीन साल की प्रैक्टिस के नियम को पिछली तारीख से लागू करने की चुनौती पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) को रिट याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में सिविल जज जूनियर डिवीज़न और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) परीक्षा के लिए तय की गई, तीन साल की प्रैक्टिस की अनिवार्य शर्त को पिछली तारीख से लागू करने के फैसले को चुनौती दी गई।
चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम ए. अंखड की डिवीज़न बेंच दो लॉ ग्रेजुएट और प्रैक्टिस कर रहे वकीलों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में MPSC द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जारी विज्ञापन संख्या 013/2026 को चुनौती दी गई। यह विज्ञापन सिविल जज (जूनियर डिवीज़न) और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के 286 पदों पर भर्ती के लिए जारी किया गया। इस विज्ञापन में परीक्षा में शामिल होने के लिए योग्यता की शर्त के तौर पर, बार में तीन साल की प्रैक्टिस को अनिवार्य बताया गया।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि यह विज्ञापन सुप्रीम कोर्ट के 20 मई 2025 को दिए गए फैसले 'ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम भारत संघ' के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए कम-से-कम तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त को फिर से लागू किया, लेकिन उसने साफ तौर पर यह भी कहा था कि यह शर्त भविष्य से लागू होगी और फैसले की तारीख से पहले शुरू हो चुकी चयन प्रक्रियाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जिस भर्ती प्रक्रिया की बात हो रही है, वह साल 2024 से जुड़ी है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतज़ार होने के कारण इसे कुछ समय के लिए रोक दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि MPSC ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई विशेष छूट (Protective Exception) के बावजूद, पहले से शुरू हो चुकी चयन प्रक्रिया पर योग्यता की शर्त को गलत तरीके से पिछली तारीख से लागू कर दिया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और MPSC को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 मई 2026 की तारीख तय की।
Case Title: Aditi Sanjaysingh Bais v. State of Maharashtra [Writ Petition No. 6532 of 2026]