जस्टिस गौतम पटेल के परिवार को धमकियां: बार एसोसिएशन ने SIT जांच के लिए हाईकोर्ट में दायर की याचिका
दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक नेता के बारे में फैसला सुनाने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गौतम पटेल और उनके परिवार को मिली धमकियों और उन पर हुए हमलों की निंदा करने के कुछ दिनों बाद बॉम्बे बार एसोसिएशन (BBA) ने कोर्ट से दखल और जज व उनके परिवार की सुरक्षा के लिए निर्देश देने की मांग करते हुए PIL दायर की।
खबरों के अनुसार, जस्टिस पटेल और उनके परिवार को पिछले 10 महीनों से धमकियां मिल रही हैं। यह मामला 23 अप्रैल, 2024 को सुनाए गए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें जज ने कहा था कि सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ही दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख (53वें दाई-अल-मुतलक) और सही उत्तराधिकारी हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जज की पत्नी को मुंबई में और उनकी बेटी को लंदन में (जहां वह रहती हैं) धमकी भरे पत्र मिले। इन पत्रों में परिवार को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई कि अगर जस्टिस पटेल ने YouTube वीडियो के जरिए अपना फैसला "वापस" नहीं लिया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। जज की बेटी अदिति पटेल पर लंदन की सड़कों पर एक नकाबपोश व्यक्ति ने हमला भी किया था।
इस मामले का संज्ञान लेते हुए BBA ने 8 जून को अपने अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील नितिन ठक्कर के माध्यम से एक बयान जारी किया।
BBA ने अपने बयान में कहा,
"एसोसिएशन किसी जज या उनके परिवार के सदस्यों को उनके न्यायिक कार्यों के निर्वहन के कारण धमकाने, डराने, परेशान करने, उन पर हमला करने या उन्हें निशाना बनाने की किसी भी कोशिश की कड़ी निंदा करता है। ऐसी खबरें कि जस्टिस पटेल के परिवार के एक सदस्य को इनमें से किसी घटना के दौरान शारीरिक चोट लगी, इस मामले को विशेष रूप से चिंताजनक बनाती हैं और अधिकारियों का गंभीर ध्यान आकर्षित करती हैं।"
अब BBA ने एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया (AAWI) और बॉम्बे इनकॉर्पोरेटेड लॉ सोसाइटी (BILS) के साथ मिलकर हाई कोर्ट में PIL दायर की। इसमें कोर्ट से आग्रह किया गया कि वह इस घटना का संज्ञान ले और उन्हें मिली गंभीर धमकियों को देखते हुए इस कोर्ट के रिटायर्ड जज और उनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के लिए संबंधित पक्षों को उचित निर्देश जारी करे।
PIL में कहा गया,
"ये हमले और धमकियां न्यायपालिका की आज़ादी पर सीधा हमला हैं। इनका मकसद उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की सुनवाई कर रहे जजों को डराना भी हो सकता है, जिससे न्याय प्रक्रिया में दखल पड़ता है।"
PIL में महाराष्ट्र पुलिस, CBI और NIA के अधिकारियों को मिलाकर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने की मांग की गई।
PIL में कहा गया,
"जज अक्सर खतरनाक अपराधियों, आतंकवादियों और प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हैं। पर्याप्त सुरक्षा से बदले की कार्रवाई या दबाव को रोका जाता है, जिससे यह पक्का होता है कि फ़ैसले सिर्फ़ कानून और तथ्यों पर आधारित हों। इस मामले में जस्टिस पटेल के अप्रैल 2024 के सिंगल जज वाले फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की गई और यह डिवीज़न बेंच के सामने विचाराधीन है। इसलिए जस्टिस पटेल और उनके परिवार के सदस्यों को भेजी गई धमकी भरी चिट्ठियों में की गई मांगें (अपने फ़ैसले को वापस लेने वाला वीडियो जारी करने की) इस मामले में अपील की सुनवाई कर रहे जजों को भी डराने या धमकाने की दबाव बनाने वाली चाल लगती हैं।"
इस PIL का ज़िक्र एक्टिंग चीफ़ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की डिवीज़न बेंच के सामने किया गया। बेंच ने इस पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है और इसे जल्द ही सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा।