Bhima-Koregaon Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 साल जेल में बिताने के बाद सुरेंद्र गाडलिंग को ज़मानत दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को वकील-कार्यकर्ता सुरेंद्र गाडलिंग को ज़मानत दी। गाडलिंग भीमा-कोरेगांव - एल्गार परिषद मामले में 6 जून, 2018 से जेल में बंद हैं। कोर्ट ने उनकी लंबी कैद को देखते हुए यह फ़ैसला सुनाया। इस मामले में नामज़द 16 लोगों में से वह आख़िरी व्यक्ति हैं जो अभी भी जेल में हैं।
जस्टिस अजय गाडकरी और जस्टिस कमल खाटा की डिवीज़न बेंच ने ओपन कोर्ट में आदेश सुनाते हुए गाडलिंग को सामान्य शर्तों पर ज़मानत दी। ये वही शर्तें हैं जो स्पेशल कोर्ट ने हनी बाबू जैसे अन्य सह-आरोपियों पर लगाई थीं।
बेंच ने कहा कि वह दिन में बाद में एक उचित आदेश पारित करेगी और उसे उपलब्ध कराएगी।
बेंच गाडलिंग द्वारा सीनियर एडवोकेट सुदीप पासबोला के ज़रिए दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस अपील में मुख्य रूप से गाडलिंग की लंबी कैद का ज़िक्र किया गया।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने, जिनकी मदद स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर चिंतन शाह कर रहे थे, इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने गाडलिंग के पिछले रिकॉर्ड, विशेष रूप से 2016 के सूरजगढ़ (गढ़चिरौली) आगज़नी मामले को उजागर किया। इस मामले में गाडलिंग पर आपराधिक साज़िश रचने और सूरजगढ़ खदानों से लौह अयस्क ले जा रहे 80 से ज़्यादा वाहनों (ट्रकों और मोटरसाइकिलों) में आग लगाने का आरोप है।
उस मामले में गाडलिंग को औपचारिक रूप से 18 मार्च, 2016 को गिरफ़्तार किया गया, जबकि वह भीमा-कोरेगांव - एल्गार परिषद मामले के संबंध में पहले से ही हिरासत में थे।
भले ही उन्हें ज़मानत मिल गई हो, लेकिन गाडलिंग अभी भी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि आगज़नी मामले में उनकी ज़मानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
Case Title: Surendra Gadling vs Union of India