ट्रायल में देरी के आधार पर 22 किलो गांजा रखने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

Praveen Mishra

6 May 2026 9:29 PM IST

  • ट्रायल में देरी के आधार पर 22 किलो गांजा रखने के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (5 मई) को लगभग 22 किलोग्राम गांजा रखने के आरोपी एक व्यक्ति को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपी एक वर्ष से अधिक समय से जेल में है और अब तक ट्रायल में एक भी गवाह का परीक्षण नहीं हुआ है, जिससे मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं दिखती।

    जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने आरोपी को विवेकाधीन राहत देते हुए जमानत प्रदान की। आरोपी के खिलाफ NDPS Act की धारा 8(c), 20(b)(ii)(c) और 29(1) के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले में वाणिज्यिक मात्रा (commercial quantity) में गांजा बरामद होने के कारण हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

    सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी एक साल से अधिक समय से हिरासत में है और अब तक ट्रायल कोर्ट में एक भी गवाह का बयान दर्ज नहीं हुआ है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप तय हो चुके हैं, लेकिन अब तक गवाहों की जांच शुरू नहीं हुई है। ऐसे में अदालत आरोपी के पक्ष में अपना विवेकाधीन अधिकार इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।

    अदालत ने संकेत दिया कि यदि आरोपी को जमानत नहीं दी जाती, तो उसके त्वरित सुनवाई के अधिकार (Right to Speedy Trial) का उल्लंघन होगा।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में State of Punjab v. Sukhwinder Singh @ Gora मामले में यह भी स्पष्ट किया था कि केवल ट्रायल में देरी NDPS Act के मामलों में जमानत का आधार नहीं हो सकती, खासकर जब मामला commercial quantity से जुड़ा हो। कोर्ट ने कहा था कि अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई का अधिकार NDPS Act की धारा 37 में निर्धारित कठोर शर्तों को दरकिनार नहीं कर सकता।

    धारा 37 के अनुसार, जमानत देने से पहले अदालत को यह संतुष्टि दर्ज करनी होती है कि आरोपी प्रथम दृष्टया दोषी नहीं है और जमानत पर छूटने के बाद वह कोई अपराध नहीं करेगा।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story