हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

Shahadat

9 May 2026 9:30 PM IST

  • हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

    देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (04 मई, 2026 से 08 मई, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

    CrPC की धारा 125 के तहत पहली पत्नी के भरण-पोषण के मामले में दूसरी पत्नी आवश्यक पक्षकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि CrPC की धारा 125 के तहत पहली पत्नी और बच्चों द्वारा शुरू की गई भरण-पोषण की कार्यवाही में दूसरी पत्नी न तो ज़रूरी पक्षकार है और न ही उचित पक्षकार। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी कार्यवाही को बेवजह उन सभी लोगों को शामिल करके नहीं बढ़ाया जा सकता, जो पति पर निर्भर होने का दावा करते हैं।

    जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने महिला द्वारा दायर अर्जी खारिज की, जिसमें उसने पहली पत्नी द्वारा अपने पति के खिलाफ दायर भरण-पोषण की पुनरीक्षण याचिका में खुद को पक्षकार बनाने की मांग की थी।

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    एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी श्रम न्यायाधिकरण के फैसलों को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एयर इंडिया के निजीकरण के बाद भी श्रम अदालत और औद्योगिक न्यायाधिकरण के फैसलों को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाइकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

    जस्टिस शैल जैन पूर्व एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस कर्मचारियों तथा कर्मचारी संगठनों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। इन याचिकाओं में केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण के उन आदेशों को चुनौती दी गई, जिनमें सेवा समाप्ति को अवैध मानने के बावजूद कर्मचारियों की बहाली के बजाय केवल आर्थिक मुआवजा दिया गया।

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    सिर्फ़ आरक्षित श्रेणी से होने से फ़ायदा नहीं मिलता, कट-ऑफ़ तारीख़ से पहले जाति प्रमाण पत्र जमा करना ज़रूरी है: झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि आरक्षण चाहने वाले उम्मीदवारों को भर्ती विज्ञापनों में बताई गई शर्तों का सख़्ती से पालन करना होगा, जिसमें कट-ऑफ़ तारीख़ के अंदर तय फ़ॉर्मेट में जाति प्रमाण पत्र जमा करना भी शामिल है। सिर्फ़ आरक्षित श्रेणी से होने से ही कोई उम्मीदवार ऐसे फ़ायदे का दावा करने का हक़दार नहीं हो जाता।

    चीफ़ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की एक डिवीज़न बेंच अपीलों के एक समूह की सुनवाई कर रही थी, जिसमें 20.12.2019 को सिंगल जज द्वारा दिए गए साझा फ़ैसले को चुनौती दी गई। उस फ़ैसले में अपीलकर्ताओं द्वारा दायर रिट याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया गया और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के उस फ़ैसले को सही ठहराया गया, जिसमें अपीलकर्ताओं की उम्मीदवारी को सामान्य श्रेणी के तहत माना गया।

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    सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में अमित शाह को मिली राहत बरकरार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मिली राहत को चुनौती देने वाली अंतरिम याचिका खारिज की। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका संभवतः किसी “राजनीतिक विरोधी” के इशारे पर दायर की गई हो सकती है। चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने 22 पुलिसकर्मियों को बरी किए जाने के फैसले को भी बरकरार रखा।

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    2026 CLAT-UG | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ाइनल आंसर-की बहाल की, मेरिट लिस्ट में बदलाव के सिंगल जज का निर्देश रद्द किया

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल फ़रवरी में सिंगल जज द्वारा दिए गए आदेश को रद्द किया। इस आदेश में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के कंसोर्टियम को कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) यूजी 2026 के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव करने का निर्देश दिया गया था।

    ऐसा करके जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की डिवीज़न बेंच ने वास्तव में 16 दिसंबर, 2025 को कंसोर्टियम द्वारा जारी की गई फ़ाइनल आंसर-की को बहाल किया। यह आंसर-की एक्सपर्ट कमेटियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों की समीक्षा करने के बाद जारी की गई थी।

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    रेल हादसे में गर्भवती महिला की मौत पर गर्भस्थ शिशु के लिए अलग मुआवजा मिलेगा: गुजरात हाईकोर्ट

    गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि 9 महीने का गर्भस्थ शिशु (foetus) भी कानून की नजर में “बच्चा” माना जाएगा और यदि किसी रेल दुर्घटना में गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो जाती है, तो उसके माता-पिता रेलवे अधिनियम के तहत अलग से मुआवजा पाने के हकदार होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गर्भ में बच्चे की मौत को मां की मृत्यु से अलग स्वतंत्र दुर्घटना माना जाएगा।

    जस्टिस जेसी दोशी की अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें जयप्रकाश घासितेलाल अपनी 9 महीने की गर्भवती पत्नी के साथ ट्रेन में सफर कर रहे थे। भारी भीड़ के कारण उनकी पत्नी को डिब्बे के दरवाजे के पास खड़ा होना पड़ा। ट्रेन में झटका लगने से वह चलती ट्रेन से गिर गईं और अस्पताल ले जाते समय उनकी तथा गर्भस्थ शिशु दोनों की मौत हो गई।

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    संशोधित हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत बेटी को बराबरी का हक: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बदली प्रारंभिक डिक्री

    आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि संशोधित हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 6 के तहत बेटी को पैतृक संपत्ति में बेटे के बराबर अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभाजन वाद में अंतिम डिक्री की कार्यवाही लंबित है और संपत्ति का वास्तविक बंटवारा नहीं हुआ है, तो प्रारंभिक डिक्री में संशोधन किया जा सकता है।

    जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस बालाजी मेडामल्ली की खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2005 में संशोधित धारा 6 के अनुसार बेटी भी सहभाजक संपत्ति में बेटे के समान अधिकार रखती है।

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    कब्रिस्तान में दफन अधिकार को लेकर दो मुस्लिम समुदायों का विवाद जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

    उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कब्रिस्तान में दफन अधिकार को लेकर दो मुस्लिम समुदायों के बीच विवाद जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारों को उचित दीवानी कार्यवाही या कानूनन उपलब्ध अन्य माध्यमों से स्थापित किया जा सकता है।

    चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ देहरादून के भनियावाला गांव स्थित एक कब्रिस्तान से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी।

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    पहली शादी से औपचारिक तलाक नहीं होने पर भी दूसरी पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि पहली शादी से औपचारिक तलाक का डिक्री न होने के बावजूद दूसरी शादी में रह रही महिला को भरण-पोषण पाने का अधिकार मिल सकता है।

    अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 में पत्नी शब्द की व्याख्या सामाजिक न्याय के उद्देश्य को ध्यान में रखकर उदार तरीके से की जानी चाहिए। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें पति को महिला को हर महीने 3 हजार रुपये भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।

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    परिवार द्वारा प्रॉपर्टी का इस्तेमाल करने से बहन को भाई की प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक नहीं मिल जाता, जब तक कि सेल डीड को चुनौती न दी जाए: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि परिवार के सदस्यों द्वारा किसी प्रॉपर्टी का सिर्फ़ इस्तेमाल करने से उस पर मालिकाना हक नहीं मिल जाता, खासकर तब जब मालिकाना हक साबित करने वाली रजिस्टर्ड सेल डीड को चुनौती न दी गई हो।

    एक महिला और उसके पति द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें उन्हें महिला के भाई की प्रॉपर्टी खाली करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने पाया कि उनका वहां रहना सिर्फ़ अनुमति पर आधारित था और इससे उन्हें कोई कानूनी हक नहीं मिल जाता।

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    बच्चे की देखभाल करने वाली नानी CrPC की धारा 125 के तहत नाबालिग की याचिका दायर कर सकती है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत नाबालिग बच्चे की ओर से भरण-पोषण की मांग करने वाली याचिका तब भी स्वीकार्य है, जब उसे बच्चे की नानी ने दायर किया हो—बशर्ते कि बच्चे की वास्तविक देखभाल वही कर रही हो।

    कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि याचिका की स्वीकार्यता को लेकर उठाई गई तकनीकी आपत्ति के पीछे एक गहरा मुद्दा छिपा है—कि क्या किसी नाबालिग के भरण-पोषण के वैधानिक अधिकार को केवल इसलिए खत्म किया जा सकता है, क्योंकि याचिका उसकी माँ ने दायर नहीं की।

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    23 आपराधिक मामले लंबित होने के बावजूद पासपोर्ट नवीनीकरण का अधिकार, विदेश यात्रा मौलिक अधिकार: राजस्थान हाईकोर्ट

    राजस्थान हाईकोर्ट ने 23 लंबित आपराधिक मामलों का सामना कर रहे 66 वर्षीय व्यक्ति को राहत देते हुए पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र देने से इनकार करने वाले कोटा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया।

    जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की पीठ ने कहा कि केवल लंबित आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को पासपोर्ट नवीनीकरण से वंचित कर विदेश यात्रा से रोकना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

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    गोद लेने के आदेश का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट को देना वैध, 2021 संशोधन बरकरार: बॉम्बे हाईकोर्ट

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम (JJ Act) में वर्ष 2021 में किए गए उस संशोधन को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया, जिसके तहत गोद लेने के आदेश जारी करने की शक्ति अदालतों से लेकर जिला मजिस्ट्रेट को सौंप दी गई।

    जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने कहा कि केवल मंच बदलने से संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होता और यह संशोधन गोद लेने की प्रक्रिया को अधिक त्वरित एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया गया।

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    अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अपनी पसंद का प्राचार्य चुनने का पूर्ण अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

    मध्यप्रदेश ने कहा है कि अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों (minority aided educational institutions) को अपने संस्थान का प्रमुख चुनने का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार पर कोई भी प्रतिबंध संविधान के Article 30(1) का उल्लंघन होगा।

    जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस आनंद सिंह बहारावत की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी अल्पसंख्यक संस्थान का प्रबंधन योग्य व्यक्ति को प्राचार्य या हेडमास्टर नियुक्त करने का फैसला करता है, तो अदालत उस निर्णय की उचितता या प्रक्रिया की जांच नहीं कर सकती।

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    सिविल सेवकों को 'माननीय' लिखने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संप्रभु कार्यों का निर्वहन करने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों को प्रत्येक आधिकारिक संचार में माननीय संबोधन दिया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सांसद, मंत्री, जज तथा अन्य ऐसे संवैधानिक पदाधिकारी इस सम्मानसूचक संबोधन के हकदार हैं जबकि किसी भी रैंक के सिविल सेवक इस विशेष संबोधन के पात्र नहीं हैं।

    जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी नाराजगी या पारिवारिक परिचय के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी को उसके वैधानिक सम्मानसूचक संबोधन से वंचित नहीं किया जा सकता।

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    जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट एक्ट और पंचायती राज एक्ट में बिल्डिंग रेगुलेशन को लेकर कोई टकराव नहीं: हाईकोर्ट

    जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट एक्ट, 1970 और जम्मू-कश्मीर पंचायती राज एक्ट, 1989, के बीच बिल्डिंग बनाने की परमिशन और उनके उल्लंघन के मामले में कोई टकराव नहीं है।

    कोर्ट ने फैसला दिया कि अगर कोई इलाका किसी ऐसे 'नोटिफाइड एरिया' का हिस्सा है, जिसके लिए जम्मू-कश्मीर लेक्स कंज़र्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (LCMA) बनाई गई तो सिर्फ़ LCMA के पास ही बिल्डिंग बनाने की परमिशन देने और यह पक्का करने का अधिकार क्षेत्र है कि ऐसी परमिशन के बिना या उसके उल्लंघन में कोई कंस्ट्रक्शन न हो।

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