रेल हादसे में गर्भवती महिला की मौत पर गर्भस्थ शिशु के लिए अलग मुआवजा मिलेगा: गुजरात हाईकोर्ट

Praveen Mishra

8 May 2026 4:29 PM IST

  • रेल हादसे में गर्भवती महिला की मौत पर गर्भस्थ शिशु के लिए अलग मुआवजा मिलेगा: गुजरात हाईकोर्ट

    गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि 9 महीने का गर्भस्थ शिशु (foetus) भी कानून की नजर में “बच्चा” माना जाएगा और यदि किसी रेल दुर्घटना में गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो जाती है, तो उसके माता-पिता रेलवे अधिनियम के तहत अलग से मुआवजा पाने के हकदार होंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गर्भ में बच्चे की मौत को मां की मृत्यु से अलग स्वतंत्र दुर्घटना माना जाएगा।

    जस्टिस जेसी दोशी की अदालत एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें जयप्रकाश घासितेलाल अपनी 9 महीने की गर्भवती पत्नी के साथ ट्रेन में सफर कर रहे थे। भारी भीड़ के कारण उनकी पत्नी को डिब्बे के दरवाजे के पास खड़ा होना पड़ा। ट्रेन में झटका लगने से वह चलती ट्रेन से गिर गईं और अस्पताल ले जाते समय उनकी तथा गर्भस्थ शिशु दोनों की मौत हो गई।

    रेलवे ट्रिब्यूनल ने गर्भस्थ शिशु के लिए मुआवजा देने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई।

    हाईकोर्ट ने “Doctrine of Nasciturus” और विभिन्न भारतीय व विदेशी फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गर्भ में पल रहा बच्चा कई कानूनी उद्देश्यों के लिए जन्मा हुआ माना जाता है। अदालत ने कहा कि 9 महीने का गर्भस्थ शिशु हर दृष्टि से अस्तित्व में बच्चा है और उसकी मृत्यु के लिए अलग मुआवजा दिया जा सकता है।

    कोर्ट ने रेलवे ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द करते हुए पिता को गर्भस्थ शिशु की मौत के लिए ₹8 लाख मुआवजा और 15 अप्रैल 2018 से 9% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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