पहली शादी से औपचारिक तलाक नहीं होने पर भी दूसरी पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
7 May 2026 5:30 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि पहली शादी से औपचारिक तलाक का डिक्री न होने के बावजूद दूसरी शादी में रह रही महिला को भरण-पोषण पाने का अधिकार मिल सकता है। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 में पत्नी शब्द की व्याख्या सामाजिक न्याय के उद्देश्य को ध्यान में रखकर उदार तरीके से की जानी चाहिए।
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार रखा, जिसमें पति को महिला को हर महीने 3 हजार रुपये भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।
पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि महिला कानूनी रूप से उसकी पत्नी नहीं है, क्योंकि उसने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाई और पहले पति से तलाक लिए बिना उससे विवाह कर लिया।
वहीं महिला की ओर से कहा गया कि वह अपने पहले पति के साथ केवल एक महीने तक रही थी। उसके बाद करीब 12 वर्षों तक उससे कोई संपर्क नहीं रहा। महिला ने यह भी कहा कि वर्तमान पति को शादी के समय इन सभी तथ्यों की पूरी जानकारी थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने मामले की विस्तार से जांच की थी और पाया था कि पति को महिला की पूर्व वैवाहिक स्थिति की जानकारी थी तथा दोनों खुले तौर पर पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे।
अदालत ने कहा,
“जब विवाह और पति-पत्नी की तरह साथ रहने का तथ्य स्वीकार किया गया तब महिला धारा 125 के तहत 'पत्नी' मानी जाएगी।”
कोर्ट ने एन. उषा रानी बनाम मूडुदुला श्रीनिवास मामला में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का भी हवाला दिया। उस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने पहली शादी से औपचारिक तलाक न होने के बावजूद दूसरी शादी में रह रही महिला को भरण-पोषण का अधिकार दिया था क्योंकि पति यह साबित नहीं कर पाया था कि उसे महिला की पहली शादी की जानकारी नहीं थी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125 सामाजिक न्याय का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को दर-दर भटकने और आर्थिक तंगी से बचाना है। इसलिए ऐसे कल्याणकारी कानूनों की सख्त तकनीकी व्याख्या कर महिलाओं के अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता।
इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने पति की याचिका खारिज की और फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

