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अनुरोध पर स्थानांतरित सरकारी कर्मचारी नए पद पर मौजूदा वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
अनुरोध पर स्थानांतरित सरकारी कर्मचारी नए पद पर मौजूदा वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि किसी सरकारी कर्मचारी के अनुरोध पर किए गए स्थानांतरण को जनहित में स्थानांतरण नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने आगे कहा कि कोई कर्मचारी अपने पिछले पद के आधार पर वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि अनुरोध-आधारित स्थानांतरण पर वरिष्ठता फिर से स्थापित हो जाती है। कोर्ट ने कहा,“यदि किसी विशेष पद पर आसीन किसी सरकारी कर्मचारी का जनहित में स्थानांतरण किया जाता है, तो वह स्थानांतरित पद पर वरिष्ठता सहित अपनी मौजूदा स्थिति को अपने साथ रखता है। हालांकि, यदि किसी...

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका होगी सूचीबद्ध: सीजेआई ने दिया आश्वासन
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका होगी सूचीबद्ध: सीजेआई ने दिया आश्वासन

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ नकदी छिपाने के मामले में FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को सूचीबद्ध करने का आश्वासन दियादिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ उनके आधिकारिक परिसर में कथित तौर पर अवैध नकदी पाए जाने के मामले में FIR दर्ज करने की मांग वाली सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सीजेआई के समक्ष प्रस्तुत किया गया। मुख्य याचिकाकर्ता वकील मैथ्यूज जे नेदुम्परा ने सीजेआई संजीव खन्ना के समक्ष मामले का उल्लेख किया।सीजेआई ने...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लंबित मामलों पर वकील की अवमाननापूर्ण टिप्पणी को गंभीरता से लिया, इसे चीफ जस्टिस के पास भेजा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लंबित मामलों पर वकील की अवमाननापूर्ण टिप्पणी को गंभीरता से लिया, इसे चीफ जस्टिस के पास भेजा

आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक वकील की पीठ के प्रति अवमाननापूर्ण टिप्पणी को गंभीरता से लिया, जहां वकील ने लंबित मामलों में कथित वृद्धि पर टिप्पणी की थी और अपने मामले को किसी अन्य पीठ को ट्रांसफर करने की मांग की थी।वकील द्वारा की गई टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज दिया और आगे की सुनवाई के लिए कोई तारीख तय किए बिना इसे स्थगित कर दिया।जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने अपने आदेश में कहा,"अपीलकर्ता के वकील द्वारा दिए गए बयान के आलोक में...

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्णय का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग के स्तनों को पकड़ना, नाड़ा तोड़ना, रेप या रेप का प्रयास नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्णय का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग के स्तनों को पकड़ना, नाड़ा तोड़ना, रेप या रेप का प्रयास नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्णय का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करना बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के अपराध के अंतर्गत नहीं आता। मामले को आज जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता की ओर से भेजे गए पत्र के आधार पर संज्ञान लिया गया है, जो एनजीओ 'वी द वूमन ऑफ इंडिया' की संस्थापक भी हैं।अभियोजन पक्ष...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बार काउंसिल से अपने मुवक्किल की पैरवी करने वाले वकीलों के खिलाफ दायर शिकायतों पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बार काउंसिल से अपने मुवक्किल की पैरवी करने वाले वकीलों के खिलाफ दायर शिकायतों पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा

यह देखते हुए कि एक मां और बेटे ने एक वकील के खिलाफ शिकायत दर्ज की, जो उनकी बेटी/बहन के वैवाहिक विवाद में उनका प्रतिनिधित्व कर रहा था, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा (BCMG) को वकीलों के खिलाफ अनावश्यक रूप से शिकायत दर्ज करने और उन्हें रिट याचिकाओं में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं (मां और बेटे) द्वारा अपनी ही बेटी/बहन और उसके वकील के खिलाफ झूठी...

BRS विधायकों का कांग्रेस में शामिल होना | सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा- तेलंगाना विधानसभा स्पीकर को अयोग्यता पर समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए
BRS विधायकों का कांग्रेस में शामिल होना | सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा- तेलंगाना विधानसभा स्पीकर को अयोग्यता पर समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए

तेलंगाना में बीआरएस पार्टी के तीन विधायकों के सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में शामिल होने से संबंधित मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रथम दृष्टया राय व्यक्त की कि सुभाष देसाई बनाम महाराष्ट्र के राज्यपाल के प्रधान सचिव मामले में की गई कुछ टिप्पणियां याचिकाकर्ताओं के मामले को समर्थन देती हैं और संबंधित मुद्दे पर न्यायिक मिसालों के संबंध में तेलंगाना हाईकोर्ट (डिवीजन बेंच) की टिप्पणियां गलत थीं। सुभाष देसाई मामले में शिवसेना के विवाद से उत्पन्न मुद्दों पर विचार करते हुए, शीर्ष न्यायालय की संविधान पीठ...

सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में कोर्ट की अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाले 2019 के आदेश को वापस लिया
सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में कोर्ट की अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाले 2019 के आदेश को वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2019 के अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (TTZ) के भीतर गैर-वनीय और निजी भूमि पर पेड़ों को काटने के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता को हटा दिया गया था। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने कृषि वानिकी गतिविधियों के लिए पेड़ काटने की अनुमति की आवश्यकता से छूट मांगने वाली एक अर्जी पर विचार करते हुए यह आदेश पारित किया।इससे पहले कोर्ट ने आवेदक को नोटिस जारी कर पूछा था कि उस आदेश को वापस क्यों न लिया जाए, क्योंकि ऐसा लगता है कि...

दलितों के सामाजिक बहिष्कार संबंधी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी हरियाणा सरकार को चेतावनी
दलितों के सामाजिक बहिष्कार संबंधी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दी हरियाणा सरकार को चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा राज्य को चेतावनी दी कि अगर राज्य हरियाणा के भाटिया गांव में दलितों के कथित सामाजिक बहिष्कार की जांच करने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त समिति के साथ सहयोग नहीं करता है तो वह अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करेगा।इस मामले में दलित समुदाय से आने वाले याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि 2017 में हिसार जिले के हांसी तहसील के भाटिया गांव में उन पर सामाजिक बहिष्कार किया गया। कहा जाता है कि यह मुद्दा तब उठा जब दलित लड़कों के एक समूह पर पानी खींचने के लिए...

हाईकोर्ट जज के खिलाफ निराधार भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपराधिक अवमानना ​​के दोषी व्यक्ति पर लगा 2 हजार का जुर्माना
हाईकोर्ट जज के खिलाफ निराधार भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपराधिक अवमानना ​​के दोषी व्यक्ति पर लगा 2 हजार का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यक्ति को हाईकोर्ट जजों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के निराधार आरोप लगाते हुए 2016 में शिकायत भेजने के लिए न्यायालय की आपराधिक अवमानना ​​का दोषी ठहराया।उसकी शिकायत के अभिलेख और विषय-वस्तु को देखते हुए जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने पाया कि उसने जजों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के “तुच्छ और निराधार” आरोप लगाए, “बिना किसी आधार या साक्ष्य के” जो अधिनियम, 1971 की धारा 2(सी) के अनुसार “न्यायालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने और उसके अधिकार को कम करने” का प्रभाव डालते...

न्यायसंगत क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए न्यायालय एडमिशन के लिए आवश्यक पात्रता मानदंड में ढील नहीं दे सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
न्यायसंगत क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए न्यायालय एडमिशन के लिए आवश्यक पात्रता मानदंड में ढील नहीं दे सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायसंगत क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए न्यायालय प्रवेश के लिए आवश्यक पात्रता मानदंड में ढील नहीं दे सकता।यह याचिका न्यायालय द्वारा BAMS डिग्री के लिए प्रवेश सरेंडर करने के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई, जिसमें कहा गया कि अभ्यर्थी ने केवल एक बोर्ड से योग्यता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की। वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने पंजाब बोर्ड से बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण की तथा हिमाचल प्रदेश बोर्ड से अलग से जीवविज्ञान विषय उत्तीर्ण किया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम को भारतीय पर्यटक के नाम उत्कीर्ण स्वर्ण आभूषण को छोड़ने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम को भारतीय पर्यटक के 'नाम उत्कीर्ण' स्वर्ण आभूषण को छोड़ने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम डिपार्टमेंट को भारतीय पर्यटक के स्वर्ण कड़ा को छोड़ने का आदेश दिया, जिसे माली गणराज्य की यात्रा के बाद देश लौटने पर जब्त कर लिया गया था।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि आभूषण निजी वस्तु है, जैसा कि उस पर उसका पहला नाम उत्कीर्ण होने से स्पष्ट है। इस प्रकार उसे शुल्क से छूट दी गई।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने आदेश दिया कि आभूषण को चार सप्ताह के भीतर छोड़ दिया जाए।याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसे कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था और...

पति या पत्नी द्वारा आत्महत्या करने की धमकी देना और ऐसा करने का प्रयास करना क्रूरता है, तलाक लेने का आधार: बॉम्बे हाईकोर्ट
पति या पत्नी द्वारा आत्महत्या करने की धमकी देना और ऐसा करने का प्रयास करना क्रूरता है, तलाक लेने का आधार: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि पति या पत्नी द्वारा आत्महत्या करने की धमकी देना और यहां तक ​​कि ऐसा करने का प्रयास करना क्रूरता है और हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) के तहत तलाक लेने का आधार हो सकता है।जस्टिस आरएम जोशी ने महिला द्वारा दायर दूसरी अपील खारिज की, जिसने फैमिली कोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी थी, जिसने पति के पक्ष में तलाक का आदेश इस निष्कर्ष के साथ दिया था कि उसकी पत्नी ने उसके साथ क्रूरता की है।जज ने पति की दलीलों पर गौर किया कि उसकी पत्नी अक्सर उसे और उसके बुजुर्ग माता-पिता को...

BCI को AIBE के लिए अलग से ली जाने वाली फीस को चुनौती देने वाले वकील के प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश
BCI को AIBE के लिए अलग से ली जाने वाली फीस को चुनौती देने वाले वकील के प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) के लिए रजिस्ट्रेशन फीस के अलावा 3500 रुपये की अलग से फीस लेने को चुनौती देने वाले वकील के प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने को कहा।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल की खंडपीठ ने कहा,"यह न्यायालय मामले के गुण-दोष के आधार पर इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार करता है। प्रतिवादी-बार काउंसिल ऑफ इंडिया को निर्देश देता है कि वह याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्व पर विचार करे। इस आदेश की प्रति प्राप्त होने...

दिल्ली हाईकोर्ट ने CESTAT द्वारा वित्तीय अधिकार क्षेत्र से बाहर अपील पर विरोधाभासी आदेश देने पर की आलोचना
दिल्ली हाईकोर्ट ने CESTAT द्वारा वित्तीय अधिकार क्षेत्र से बाहर अपील पर विरोधाभासी आदेश देने पर की आलोचना

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में नई दिल्ली स्थित कस्टम्स, एक्साइज और सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (CESTAT) की कड़ी आलोचना की, क्योंकि उसने एक अपील में बार-बार विरोधाभासी आदेश पारित किए, जिसे वित्तीय अधिकार क्षेत्र न होने के कारण खारिज किया जाना चाहिए था।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "यह आदेश पूरी तरह से गलतियों की श्रृंखला को दर्शाता है, याचिका में एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति सामने आई है, जहां CESTAT ने अपने प्रारंभिक आदेश में की गई गलती को...

आतंकवाद का कोई सबूत नहीं, सिर्फ विरोध में शामिल होना UAPA का आधार नहीं: खालिद सैफी की जमानत के लिए दलील
'आतंकवाद का कोई सबूत नहीं, सिर्फ विरोध में शामिल होना UAPA का आधार नहीं': खालिद सैफी की जमानत के लिए दलील

यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के संस्थापक खालिद सैफी, जो 2020 दिल्ली दंगों की 'वृहद साजिश' मामले में आरोपी हैं, ने मंगलवार (25 मार्च) को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि उनके खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई आतंकवादी कृत्य किया या किसी आतंकवादी गतिविधि की साजिश रची।सैफी की ओर से पेश सिनियर एडवोकेट रेबेका जॉन ने दलील दी कि सार्वजनिक स्थान पर किसी विरोध स्थल पर मौजूद होना मात्र कठोर UAPA लगाने का आधार नहीं हो सकता।जॉन सैफी की जमानत याचिका पर बहस के दौरान जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस...

दिल्ली हाईकोर्ट ने जापानी टायर निर्माता BRIDGESTONE को ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में ₹34.41 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने जापानी टायर निर्माता 'BRIDGESTONE' को ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में ₹34.41 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में जापानी कंपनी ब्रिजस्टोन कॉर्पोरेशन के पक्ष में स्थायी निषेधाज्ञा जारी की है। यह आदेश एक ऐसी कंपनी के खिलाफ दिया गया है, जो ऑटोमोबाइल टायर और ट्यूब बनाने के लिए 'BRIMESTONE नाम का उपयोग कर रही थी, जो 'BRIDGESTONE के समान था।जस्टिस अमित बंसल ने ब्रिजस्टोन कॉर्पोरेशन को 34.41 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। उन्होंने पाया कि प्रतिवादी कंपनी एम/एस मर्लिन रबर ने अवैध रूप से इन नकल किए गए उत्पादों को बेचकर काफी आर्थिक लाभ कमाया।ब्रिजस्टोन...

बलात्कार मामले में 6 महीने की अस्थायी जमानत के लिए आसाराम बापू ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की, फैसला सुरक्षित
बलात्कार मामले में 6 महीने की अस्थायी जमानत के लिए आसाराम बापू ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की, फैसला सुरक्षित

गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार (25 मार्च) को आसाराम बापू द्वारा दायर उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने छह महीने की अस्थायी जमानत की मांग की थी। आसाराम बापू को 2013 के बलात्कार मामले में 2023 में एक सत्र न्यायालय द्वारा दोषी ठहराया गया था और वह उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जनवरी में उन्हें मेडिकल आधार पर 31 मार्च तक अंतरिम जमानत दी थी।सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस संदीप एन. भट्ट की खंडपीठ ने अपना फैसला...