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राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 174 से 177-A: बंदोबस्त प्रविष्टियों की विधिक और सिंचित भूमि पर किराया वृद्धि
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 174 से 177-A: बंदोबस्त प्रविष्टियों की विधिक और सिंचित भूमि पर किराया वृद्धि

राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 ग्रामीण भूमि प्रशासन और बंदोबस्त व्यवस्था को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। इस अधिनियम की धाराएं 174 से लेकर 177-A तक बंदोबस्त प्रविष्टियों की कानूनी मान्यता, बंदोबस्त की अवधि, उसके समय से पहले समाप्त होने की परिस्थितियां, अस्थायी राहत और सिंचाई सुविधा मिलने पर किराया वृद्धि से संबंधित हैं। इन धाराओं का अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार भूमि उपयोग, किराया निर्धारण, और किसानों के अधिकारों की सुरक्षा में कैसे संतुलन बनाती है।धारा 174 — बंदोबस्त...

इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील और यौन सामग्री के प्रसारण से जुड़े अपराध और दंड: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67, 67A, 67B और 67
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील और यौन सामग्री के प्रसारण से जुड़े अपराध और दंड: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67, 67A, 67B और 67

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 को भारत सरकार ने डिजिटल दुनिया में बढ़ते आर्थिक, सामाजिक और कानूनी व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए लागू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता देना था, जिससे इंटरनेट आधारित संचार और व्यापार को एक वैधानिक आधार प्राप्त हो सके। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, इंटरनेट का दुरुपयोग बढ़ता गया और इस अधिनियम में नए संशोधन करने की आवश्यकता महसूस हुई।खासकर, इंटरनेट के ज़रिए अश्लील सामग्री का आदान-प्रदान, बच्चों के यौन शोषण से...

विलंबित फ्लैट डिलीवरी के लिए घर खरीदार का मुआवजा पाने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने की सिद्धांतों की व्याख्या
विलंबित फ्लैट डिलीवरी के लिए घर खरीदार का मुआवजा पाने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने की सिद्धांतों की व्याख्या

ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) बनाम अनुपम गर्ग और अन्य के मामले में हाल ही में दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देरी या डिलीवरी न होने की स्थिति में डेवलपर्स को पीड़ित घर खरीदारों को ब्याज सहित मूल राशि वापस करनी चाहिए, लेकिन खरीदारों द्वारा अपने घरों के वित्तपोषण के लिए लिए गए व्यक्तिगत ऋण पर ब्याज का भुगतान करने के लिए उन्हें उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।निर्णय में न्यायालय ने बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम सिंडिकेट बैंक [(2007) 6 एससीसी 711] पर भी पुनर्विचार...