उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जिम मालिक 'मोहम्मद दीपक' के खिलाफ चल रही जांच की स्थिति और उसे मिले 'दान' के ब्योरे मांगे
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जनवरी 2026 में कोटद्वार में हुई घटना से जुड़ी कई FIRs की जांच के संबंध में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस घटना में दीपक कुमार उर्फ 'मोहम्मद दीपक' शामिल था।
जस्टिस राकेश थपलियाल की बेंच ने याचिकाकर्ता (दीपक) को यह भी निर्देश दिया कि वह अब तक अपने बैंक खाते में जमा हुए 'दान' का स्पष्ट ब्योरा दे। यह निर्देश तब दिया गया, जब इस घटना का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया।
बता दें, यह मामला 26 जनवरी, 2026 को कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) में हुई एक घटना से जुड़ा है। इस घटना में कथित तौर पर बजरंग दल से जुड़ी भीड़ ने एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद का विरोध किया था, क्योंकि उसने अपनी दुकान के नाम में 'बाबा' शब्द का इस्तेमाल किया।
दीपक कुमार वहां का एक स्थानीय जिम मालिक है। उसने दुकानदार के समर्थन में बीच-बचाव किया था। एक वायरल वीडियो में कुमार को भीड़ का सामना करते हुए देखा गया, जिसमें वह पूछ रहा था, "यह दुकान 30 साल पुरानी है, क्या तुम इसका नाम बदलवाओगे?" जब उससे उसका नाम पूछा गया, तो उसने कहा, "मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।"
इस घटना के बाद कमल प्रसाद नाम के व्यक्ति की शिकायत के आधार पर दीपक और उसके साथी विजय रावत के खिलाफ FIR दर्ज की गई। FIR में आरोप लगाया गया कि 28 जनवरी को हुई झड़प के दौरान कुमार ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, एक मोबाइल फोन छीन लिया और उस समूह को धमकी दी।
इस FIR को चुनौती देते हुए दीपक ने हाईकोर्ट का रुख किया और अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने के साथ-साथ पुलिस सुरक्षा की मांग की। उसने दावा किया कि उसकी और उसके परिवार की जान को खतरा है। अपनी याचिका में उसने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की भी मांग की।
इस मामले की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने यह तर्क दिया कि जहां पुलिस ने 26 जनवरी की घटना को लेकर भीड़ के खिलाफ एक 'अनाम' FIR दर्ज की (हालांकि वीडियो सबूतों में व्यक्तियों की पहचान हो रही थी), वहीं उन्होंने दीपक कुमार के खिलाफ 'नामजद' FIR दर्ज की, ताकि उसके बीच-बचाव के लिए उसे परेशान किया जा सके।
हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई पुलिस सुरक्षा और विभागीय जांच के संबंध में संदेह व्यक्त किया।
जस्टिस थपलियाल ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि चूंकि एक FIR दर्ज की जा चुकी है, इसलिए पुलिस को मामले की जांच करने की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही ज़्यादा-से-ज़्यादा जांच की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी जा सकती है।
बेंच ने याचिका में किए गए उन दावों का भी संज्ञान लिया, जिनमें कहा गया कि याचिकाकर्ता के बैंक खाते में छोटी-छोटी रकम (₹100, ₹500) के रूप में 'दान' प्राप्त हुआ है।
"आप इस बारे में निर्देश प्राप्त करें कि आपके खाते में कितनी राशि जमा हुई," अदालत ने टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता को अब तक प्राप्त कुल धनराशि का खुलासा करने का निर्देश दिया।
इस पृष्ठभूमि में अदालत ने सरकारी वकील को निम्नलिखित मुद्दों पर विशिष्ट निर्देश प्राप्त करने का निर्देश दिया:
* अज्ञात व्यक्तियों (26 जनवरी की घटना) और दीपक कुमार के खिलाफ दर्ज FIRs में जांच की वर्तमान स्थिति।
* याचिकाकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई विशिष्ट शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई (या कार्रवाई न करने) के पीछे का कारण।
याचिकाकर्ता (दीपक) को भी अपने बैंक खाते में जमा हुए दान के संबंध में एक हलफनामा दायर करने का आदेश दिया गया।
मामले की अगली सुनवाई परसों (गुरुवार) होगी।