अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, सुरेश राठौर के खिलाफ दो FIR रद्द, दो पर जांच जारी

Update: 2026-06-05 09:20 GMT

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार FIR में से दो रद्द की, जबकि दो अन्य मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी।

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को जघन्य अपराध से जोड़कर उसकी छवि खराब करने का प्रयास गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

जस्टिस राकेश थपलियाल ने मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और ऑडियो सामग्री के प्रतिलेखों का अवलोकन किया।

अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर सामग्री प्रसारित करना गंभीर चिंता का विषय है।

अदालत ने टिप्पणी की,

"किसी व्यक्ति को जघन्य अपराध में शामिल बताकर उसकी छवि धूमिल करना, विशेषकर तब जब उस मामले का मुकदमा पूरा हो चुका हो और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित हो, अत्यंत गंभीर विषय है।"

पीठ ने आगे कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी अपराध से संबंधित कोई जानकारी या साक्ष्य है तो उसे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत करनी चाहिए। सोशल मीडिया किसी व्यक्ति की छवि खराब करने या निजी अथवा राजनीतिक उद्देश्य साधने का मंच नहीं है।

अदालत ने कहा,

"कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। सोशल मीडिया मंचों का उपयोग जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए होना चाहिए, न कि किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए।"

मामला अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ी कथित ऑडियो और वीडियो क्लिपों के सोशल मीडिया पर प्रसार से संबंधित है।

आरोप है कि सुरेश राठौर और सह-आरोपी उर्मिला सनावर ने कुछ सामग्री साझा कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम सहित अन्य लोगों को इस चर्चित हत्याकांड से जोड़ने का प्रयास किया।

हाईकोर्ट ने जिन दो FIR रद्द की, उनके संबंध में पाया कि उनमें लगाए गए आरोप पहले से दर्ज एक अन्य FIR के समान थे।

अदालत ने कहा कि उन मामलों के शिकायतकर्ता न तो कथित पीड़ित थे और न ही सीधे प्रभावित पक्ष, इसलिए समान आरोपों पर अलग-अलग FIR कायम नहीं रह सकतीं।

हालांकि, आरती गौर और दुष्यंत कुमार गौतम की ओर से दर्ज दो अन्य एफआईआर के मामले में अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

पीठ ने कहा कि इन शिकायतों में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध के तत्व दिखाई देते हैं और मामले की गहन जांच आवश्यक है।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो-ऑडियो सामग्री से यह जांचना जरूरी है कि क्या किसी राजनीतिक लाभ या अन्य उद्देश्य से किसी व्यक्ति को अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने का प्रयास किया गया।

पीठ ने कहा,

"किसी ऐसे जघन्य अपराध में किसी व्यक्ति को फंसाने की कोशिश, जिसका मुकदमा पहले ही समाप्त हो चुका हो, अत्यंत गंभीर विषय है। यह भी जांच का विषय है कि क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा या अन्य निहित उद्देश्य था।"

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की जांच जारी है और जांच अधिकारी सभी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। कथित ऑडियो क्लिप, मोबाइल फोन और आवाज के नमूने फोरेंसिक जांच के लिए चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई।

इन परिस्थितियों में हाइकोर्ट ने दो FIR रद्द करते हुए शेष दो मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी।

अदालत ने माना कि उपलब्ध सामग्री प्रथम दृष्टया जांच की मांग करती है और इस चरण पर उन मामलों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

Tags:    

Similar News