पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा रोकने हेतु केंद्रीय बल तैनाती की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने को कहा

Update: 2026-05-04 07:18 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद संभावित हिंसा रोकने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार किया और याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट जाने को कहा।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष हुई।

याचिकाकर्ता संगठन सनातन संस्था की ओर से सीनियर एडवोकेट वी. गिरि ने दलील दी कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद व्यापक हिंसा हुई थी और इस बार भी वैसी स्थिति की आशंका है।

उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करने और स्थिति की निगरानी के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में पर्यवेक्षण समिति गठित की जाए।

हालांकि, पीठ ने कहा कि इस प्रकार की राहत के लिए याचिकाकर्ता को पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए।

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से उपस्थित सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने भी कहा कि मतगणना पूर्ण होने और परिणाम घोषित होने के बाद आयोग की भूमिका समाप्त हो जाती है।

इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा,

“राज्य का राजनीतिक कार्यपालिका इस पर निर्णय लेगी।”

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जोड़ा,

“हमें उम्मीद है कि वे समझेंगे कि कानून-व्यवस्था उनका विषय है।”

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उसने मूल याचिका पहले ही दायर कर रखी है और वर्तमान प्रार्थना अंतरिम आवेदन के माध्यम से की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट अपने रुख पर कायम रहा।

खंडपीठ ने कहा कि संगठन की मुख्य याचिका 11 मई को सूचीबद्ध है और उसी निर्धारित तिथि पर उस पर सुनवाई की जाएगी।

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