सुप्रीम कोर्ट ने 9 मार्च 2026 को गुरुग्राम में निर्माण स्थल पर हुए हादसे में सात मजदूरों की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और हरियाणा सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह नोटिस National Campaign Committee for Central Legislation on Construction Labour की याचिका पर जारी किया।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSH) Code के तहत निर्माण श्रमिकों के लिए विशेष सुरक्षा मानक निर्धारित किए जाने चाहिए। उन्होंने Bureau of Indian Standards (BIS) के मानकों के अनुरूप दिशा-निर्देश तय करने का सुझाव दिया।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि निर्माण कार्य का लाइसेंस जारी करने की शर्त के रूप में बिल्डरों से निर्माण श्रमिकों के लिए एक अलग Corpus Fund जमा कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि इसे वैधानिक दायित्व बनाया जाए तो इसका क्रियान्वयन आसान हो सकता है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने याचिकाकर्ता से नए नियमों और मौजूदा सुरक्षा प्रावधानों के बीच अंतर बताने वाला Comparative Chart दाखिल करने को कहा।

याचिका के अनुसार, 9 मार्च को गुरुग्राम के Signature Global City of Colours, Sidhrawali प्रोजेक्ट में निर्माणाधीन Sewage Treatment Plant के पास लगभग 30–40 फीट गहरी खुदाई के दौरान Retaining Wall गिर गई। मलबे और मिट्टी में दबने से सात मजदूरों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।

घटना के संबंध में BNS की धारा 105 और 125 के तहत FIR दर्ज की गई है। हालांकि, याचिका में केवल आपराधिक जांच के बजाय खुदाई की डिजाइन, मिट्टी की स्थिरता, Shoring व्यवस्था, Safety Audit, Risk Assessment, Engineering Approvals और Supervision सहित पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की गई है।

याचिका में केंद्र और राज्यों के लिए निर्माण स्थलों पर मौतों और गंभीर चोटों का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तैयार करने तथा समय-समय पर प्रकाशित करने के लिए एक समान तंत्र बनाने की भी मांग की गई है। साथ ही मृतक और घायल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें मुआवजा, चिकित्सा और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश मांगे गए हैं।

याचिका में Signature Global (India) Ltd., Balajee Infratech and Construction Pvt. Ltd. और सब-कॉन्ट्रैक्टर समेत अन्य पक्षों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। 

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