सुप्रीम कोर्ट ने संभल मस्जिद की दीवारों की सफेदी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को संभल जामा मस्जिद की बाहरी दीवारों की सफेदी करने का निर्देश दिया गया था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
यह आदेश संभल जिले के चंदौसी स्थित शाही जामा मस्जिद की बाहरी दीवारों की सफेदी के लिए ASI को निर्देशित करता है।
इस मस्जिद को लेकर एक मुकदमा दायर किया गया, जिसमें दावा किया गया कि यह एक हिंदू मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई।
याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से पेश एडवोकेट बरुण सिन्हा ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने ASI को मस्जिद की दीवारों की सफेदी करने का निर्देश देकर गलत फैसला दिया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी और कहा,
"हम वर्तमान याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। याचिका खारिज की जाती है।"
इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश
मार्च में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को संभल जामा मस्जिद की सफेदी एक सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया था। यह आदेश 1927 में मस्जिद प्रबंधन समिति और ASI के बीच हुए समझौते के अनुसार दिया गया था।
कोर्ट ने ASI से कहा कि वह केवल उन हिस्सों पर सफेदी करे जहां इसकी आवश्यकता हो। साथ ही, हाईकोर्ट ने मस्जिद प्रबंधन समिति को निर्देश दिया कि सफेदी का खर्च एक सप्ताह के भीतर ASI को वापस चुकाया जाए।
मस्जिद समिति ने रमज़ान महीने से पहले मस्जिद की सफेदी और सफाई की अनुमति मांगी थी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका लंबित है, जो संभल शाही जामा मस्जिद समिति ने ट्रायल कोर्ट के 19 नवंबर 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की है। इस आदेश में एडवोकेट कमिश्नर को मस्जिद का सर्वे करने का निर्देश दिया गया।
याचिका में दावा किया गया कि यह मुगलकालीन मस्जिद एक प्राचीन हिंदू मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई।
टाइटल: सतीश कुमार अग्रवाल बनाम प्रबंधन समिति, जामी मस्जिद संभल व अन्य
डायरी नंबर: 14755-2025