क्या स्थायी समिति सीनियर डेजिग्नेशन के लिए अस्वीकृत और स्थगित आवेदनों पर पुनर्विचार कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (4 अप्रैल) को दिल्ली हाईकोर्ट से पूछा कि क्या उसकी स्थायी समिति उन एडवोकेट का नए सिरे से मूल्यांकन करेगी, जिनके सीनियर डेजिग्नेशन के लिए आवेदन या तो अस्वीकृत कर दिए गए या स्थगित कर दिए गए।
जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुयान की खंडपीठ पिछले साल नवंबर में कथित अनियमितताओं के आधार पर 70 वकीलों को सीनियर डेजिग्नेशन देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट राजशेखर राव से मौखिक रूप से पूछा कि क्या इंदिरा जयसिंह मामलों में निर्णयों के अनुसार गठित स्थायी समिति अस्वीकृत और स्थगित उम्मीदवारों का पुनर्मूल्यांकन करेगी।
मामले की सुनवाई 15 अप्रैल के लिए स्थगित कर दी गई।
सुनवाई की शुरुआत में राव ने खंडपीठ को सूचित किया कि हाईकोर्ट का फुल कोर्ट अस्वीकृत और स्थगित आवेदनों पर पुनर्विचार कर सकता है, जैसा कि पिछली सुनवाई की तारीख पर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया। हालांकि, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि स्थायी समिति द्वारा किया गया प्रारंभिक मूल्यांकन भी अनुचित और दोषपूर्ण था। इस मोड़ पर खंडपीठ ने हाईकोर्ट से पूछा कि क्या स्थायी समिति के चरण से प्रक्रिया को फिर से किया जा सकता है।
जस्टिस ओक ने राव से पूछा,
"इसलिए आपको निर्देश लेना चाहिए कि अस्वीकृत उम्मीदवारों और स्थगित उम्मीदवारों के मामले में क्या प्रक्रिया स्थायी समिति द्वारा अंकन से शुरू से ही संचालित की जाएगी।"
राव ने सुझाव दिया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने अब इंदिरा जयसिंह निर्णयों में निर्धारित मानदंडों पर पुनर्विचार करने पर निर्णय सुरक्षित रखा है, इसलिए निर्णय सुनाए जाने तक नई प्रक्रिया को स्थगित किया जा सकता है। हालांकि जस्टिस ओक ने असहमति जताते हुए कहा कि प्रक्रिया उस समय मौजूद कानून के अनुसार की जानी चाहिए।
खंडपीठ को बताया गया कि नवंबर की स्थायी समिति का पुनर्गठन किया जाना है, क्योंकि तत्कालीन चीफ जस्टिस मनमोहन को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया और दूसरे जज जस्टिस यशवंत वर्मा को अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।
केस टाइटल- रमन उर्फ रमन गांधी बनाम रजिस्ट्रार जनरल, दिल्ली हाईकोर्ट