फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन NDPS Act के तहत नहीं: पटना हाईकोर्ट ने तीन दोषियों की सजा रोकी

Update: 2026-04-10 06:09 GMT

पटना हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन जैसे पदार्थ मादक या मनोप्रभावी पदार्थों की श्रेणी में नहीं आते। इनके आधार पर NDPS Act के तहत सजा देना प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता। अदालत ने इसी आधार पर तीन दोषियों की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें अपील लंबित रहने तक जमानत देने का आदेश दिया।

यह मामला उन तीन आरोपियों से जुड़ा है, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने NDPS Act की धारा 21(ग) के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष की सजा और डेढ़ लाख रुपये जुर्माना लगाया। आरोप है कि उनके पास से भारी मात्रा में हेरोइन जैसा पदार्थ बरामद हुआ था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस अरुण कुमार झा की खंडपीठ ने पाया कि जब्त किए गए पदार्थ फेनोथियाज़ीन और प्रोमेथाज़ीन हैं, जिनका उल्लेख NDPS Act की सूची में नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार की वर्ष 2001 की अधिसूचना का भी हवाला दिया, जिसमें मादक और मनोप्रभावी पदार्थों की सूची दी गई लेकिन उसमें भी इन दोनों पदार्थों का नाम शामिल नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ये दोनों पदार्थ औषधि और प्रसाधन कानून के अंतर्गत आते हैं, जहां प्रोमेथाज़ीन को एंटीहिस्टामिनिक दवा के रूप में सूचीबद्ध किया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि औषधि और प्रसाधन कानून के तहत अपराध होने पर केवल औषधि निरीक्षक ही मामला दर्ज करने और गिरफ्तारी करने के अधिकारी होते हैं, पुलिस नहीं।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,

"प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि जब्त पदार्थ NDPS Act के दायरे में नहीं आते। इसलिए दोषसिद्धि और सजा का आदेश टिकाऊ नहीं प्रतीत होता।"

हालांकि, राज्य की ओर से यह तर्क दिया गया कि इन पदार्थों का इस्तेमाल मिलावट के रूप में किया जाता है ताकि मादक पदार्थ की मात्रा और प्रभाव बढ़ाया जा सके। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को सजा जारी रखने के लिए पर्याप्त नहीं माना।

अंततः हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों को दस-दस हजार रुपये के मुचलके पर जमानत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया और स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल सजा निलंबन के संदर्भ में है। अंतिम निर्णय अपील की सुनवाई के दौरान किया जाएगा।

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