ब्लैकलिस्टिंग के 'कारण बताओ नोटिस' के खिलाफ कोई रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती': पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि ब्लैकलिस्टिंग की कार्यवाही शुरू करने वाले 'कारण बताओ नोटिस' को आम तौर पर अनुच्छेद 226 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस बात को दोहराया कि जिस अधिकारी के पास अंतिम फैसला लेने की शक्ति है, वह प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी उतना ही सक्षम है।
जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की एक डिवीज़न बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में 17.03.2026 को इंजीनियर-इन-चीफ-सह-रजिस्टरिंग अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए एक 'कारण बताओ नोटिस' को चुनौती दी गई थी। इस नोटिस में टेंडर प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर गलत जानकारी देने के आरोप में याचिकाकर्ता को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव रखा गया था।
यह विवाद एक सड़क को चौड़ा करने और उसे मजबूत बनाने के लिए निकाले गए एक टेंडर से जुड़ा था। इस टेंडर में याचिकाकर्ता को शुरू में तकनीकी रूप से योग्य घोषित किया गया और बाद में वह सबसे कम बोली लगाने वाले (L-1) के रूप में सामने आया। हालांकि, दोबारा मूल्यांकन करने पर अधिकारियों ने पाया कि याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर अपनी मौजूदा प्रतिबद्धताओं (कामों) के बारे में गलत जानकारी दी थी। इसके चलते उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया और उसके खिलाफ ब्लैकलिस्टिंग की कार्यवाही शुरू कर दी गई।
'कारण बताओ नोटिस' को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यह अस्पष्ट है, अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इसके समर्थन में कोई ठोस विवरण मौजूद नहीं है। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य मुद्दा यह तय किया कि क्या यह नोटिस अधिकार क्षेत्र संबंधी त्रुटि, अस्पष्टता, या किसी पूर्व-निर्धारित फैसले से ग्रस्त है, जिसके कारण फैसले से पहले के चरण में ही इसमें हस्तक्षेप करना आवश्यक हो।
इस चुनौती को खारिज करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई, क्योंकि याचिकाकर्ता ने अभी तक 'कारण बताओ नोटिस' का कोई जवाब नहीं दिया।
Case Title: Rai Raj Construction Pvt. Ltd. v. State of Bihar.