Twisha Sharma Dowry Death Case: एमपी हाईकोर्ट ने गिरीबाला सिंह की ज़मानत अर्ज़ी पर अंतिम सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी बहू त्विशा शर्मा की दहेज हत्या के मामले में आरोपी रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह की नियमित ज़मानत अर्ज़ी पर अंतिम सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तारीख तय की।
जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए सुबह 10:30 बजे का समय निर्धारित किया।
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि त्विशा शर्मा के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने इस मामले की कार्यवाही को मध्य प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित (ट्रांसफर) करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल सेशन कोर्ट में चल रहे ट्रायल पर रोक लगाई और CBI, ट्विशा के पति समर्थ सिंह, तथा गिरीबाला को नोटिस जारी किया। त्विशा के पिता ने हाई कोर्ट में गिरीबाला सिंह की ज़मानत अर्ज़ी पर आपत्ति भी दर्ज कराई।
यह मामला त्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है। इस संबंध में शुरू में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 80(2) (दहेज हत्या), 85 (क्रूरता) और 3(5) (समान इरादा) के तहत, साथ ही दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत FIR दर्ज की गई।
इससे पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने गिरीबाला सिंह को अपनी नियमित ज़मानत अर्ज़ी में संशोधन करने का निर्देश दिया। गिरीबाला ने दावा किया कि CBI ने उनके खिलाफ दहेज हत्या का आरोप हटाया और उसकी जगह BNS की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment of Suicide) का आरोप लगाया।
हालांकि, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि CBI ने दहेज हत्या का आरोप नहीं हटाया है। इस अपराध की अभी भी जांच चल रही है। इसके बाद हाईकोर्ट ने ज़मानत अर्ज़ी में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप को शामिल करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन दहेज हत्या के आरोप को हटाने की मांग खारिज की।
बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। हाईकोर्ट में इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान, CBI को सिंह की ज़मानत अर्ज़ी पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया। इससे पहले, 15 मई को भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने सिंह को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी थी। राज्य सरकार और त्विशा के माता-पिता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद 27 मई को हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द की।
इसके बाद सिंह हिरासत में रहीं। भोपाल की अदालत ने 30 जून और 14 जुलाई को उनकी न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) की अवधि बढ़ाई थी।
अपनी नियमित जमानत याचिका में सिंह ने दावा किया है कि मृतका डिप्रेशन से जूझ रही थी और दहेज के लिए परेशान करने के आरोप झूठे हैं। उनकी याचिका में इस बात का भी जिक्र है कि ऐसा कोई लेन-देन नहीं हुआ, जिससे यह साबित हो कि उन्हें मृतका के माता-पिता से पैसे मिले थे। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया है कि उनके बेटे ने मृतका के खाते में 7.5 लाख रुपये ट्रांसफर किए।
Case Title : Giribala Singh v State of Madhya Pradesh