अस्पतालों को पीड़ितों को त्वरित मेडिकल सुविधा देने और पुलिस को सूचना देने की कानूनी बाध्यता : धारा 397, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की धारा 397 एक महत्वपूर्ण प्रावधान (Provision) है, जो सभी अस्पतालों—चाहे वे सरकारी हों या निजी—को यह अनिवार्य (Mandatory) करता है कि वे कुछ गंभीर अपराधों के पीड़ितों (Victims) को तुरंत और मुफ्त चिकित्सा सुविधा (Medical Treatment) प्रदान करें। इसके अलावा, अस्पतालों को पुलिस को भी इस घटना की जानकारी तुरंत देनी होगी।
यह प्रावधान उन मामलों में बहुत महत्वपूर्ण है, जहां किसी अपराध के कारण पीड़ित को शारीरिक क्षति (Physical Injury) हुई है। यह न्याय प्रणाली को पीड़ित-केंद्रित (Victim-Centric) बनाता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 – Right to Life and Personal Liberty) के अनुरूप है, जो जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।
धारा 397 का दायरा और लागू होने की स्थिति (Scope and Applicability of Section 397)
धारा 397 के अंतर्गत सभी प्रकार के अस्पताल आते हैं, चाहे वे:
• केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा संचालित हों
• राज्य सरकार (State Government) द्वारा संचालित हों
• स्थानीय निकायों (Local Bodies) द्वारा प्रबंधित हों
• निजी व्यक्तियों या संगठनों (Private Individuals or Organizations) द्वारा संचालित हों
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों को चिकित्सा सहायता प्राप्त करने में कोई बाधा न हो और उन्हें तत्काल इलाज मिले।
किन अपराधों के पीड़ितों को उपचार मिलेगा? (Offences Covered Under Section 397)
यह धारा उन पीड़ितों पर लागू होती है जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) की निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत अपराधों का शिकार हुए हैं:
• धारा 64 – गंभीर चोट (Grievous Hurt)
• धारा 65 – खतरनाक हथियारों या साधनों से चोट पहुँचाना (Hurt by Dangerous Weapons or Means)
• धारा 66 – खतरनाक हथियारों या साधनों से गंभीर चोट (Grievous Hurt by Dangerous Weapons or Means)
• धारा 67 – एसिड अटैक (Acid Attack) और एसिड फेंकने के प्रयास (Attempt to Throw Acid)
• धारा 68 – जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना (Endangering Life or Personal Safety)
• धारा 70 – हिंसा से जुड़े यौन अपराध (Sexual Offences Involving Violence)
• धारा 71 – नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध (Sexual Offences Against Minors)
• धारा 124(1) – शोषण, क्रूरता या जीवन को खतरे में डालने से जुड़े अपराध (Exploitation, Cruelty, or Endangerment of Life)
इसके अलावा, यह धारा POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम, 2012 के तहत आने वाले निम्नलिखित अपराधों पर भी लागू होती है:
• धारा 4 – बाल यौन शोषण (Penetrative Sexual Assault)
• धारा 6 – गंभीर बाल यौन शोषण (Aggravated Penetrative Sexual Assault)
• धारा 8 – यौन हमला (Sexual Assault)
• धारा 10 – गंभीर यौन हमला (Aggravated Sexual Assault)
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर हिंसा या यौन अपराधों के पीड़ितों को बिना किसी देरी के चिकित्सा सहायता प्राप्त हो।
पीड़ितों को तुरंत चिकित्सा सहायता देना अनिवार्य (Mandatory Medical Treatment for Victims)
धारा 397 स्पष्ट रूप से कहती है कि अस्पतालों को तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान करनी होगी, जिसमें प्राथमिक उपचार (First Aid) और आवश्यक चिकित्सा उपचार (Medical Treatment) बिना किसी शुल्क (Free of Cost) के शामिल हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
• कोई भी अस्पताल भुगतान न होने के आधार पर इलाज से इनकार नहीं कर सकता।
• कोई भी औपचारिकता (Procedural Formalities) आपातकालीन इलाज में देरी नहीं कर सकती।
• पुलिस अनुमति (Police Approval) की आवश्यकता नहीं होगी, यानी पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने से पहले भी इलाज किया जाएगा।
उदाहरण (Illustration)
एक महिला पर एसिड अटैक किया जाता है और वह गंभीर रूप से झुलस जाती है। अगर अस्पताल उसे यह कहकर भर्ती करने से इनकार कर दे कि पहले पुलिस शिकायत दर्ज करवानी होगी या इलाज का भुगतान करना होगा, तो यह धारा 397 का उल्लंघन (Violation of Section 397) होगा। अस्पताल पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
इसी प्रकार, अगर कोई बच्चा यौन शोषण का शिकार होता है और उसे अस्पताल लाया जाता है, तो डॉक्टरों को तुरंत इलाज देना होगा और पुलिस रिपोर्ट की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।
पुलिस को सूचना देना अनिवार्य (Mandatory Reporting to Police)
जब कोई अस्पताल किसी पीड़ित का इलाज करता है, तो उसे तुरंत पुलिस को इसकी सूचना देनी होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
• अपराध को समय पर दर्ज किया जाए।
• जांच (Investigation) बिना किसी देरी के शुरू हो सके।
• चिकित्सा साक्ष्य (Medical Evidence) को संरक्षित किया जाए।
उदाहरण (Illustration)
यदि किसी निजी अस्पताल में यौन हिंसा की शिकार महिला का इलाज किया जाता है, तो अस्पताल को तुरंत पुलिस को सूचित करना होगा, ताकि जांच शुरू हो सके। अगर अस्पताल ऐसा नहीं करता, तो वह कानूनी रूप से उत्तरदायी (Legally Liable) होगा।
अन्य संबंधित प्रावधानों से तुलना (Comparison with Related Provisions)
धारा 396 – पीड़ित मुआवजा योजना (Victim Compensation Scheme)
जहां धारा 397 पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सहायता देने पर केंद्रित है, वहीं धारा 396 उनके लिए आर्थिक मुआवजे (Financial Compensation) की व्यवस्था करती है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई दुष्कर्म पीड़िता को इलाज मिलता है, तो वह धारा 396 के तहत सरकार से पुनर्वास के लिए मुआवजा भी मांग सकती है।
धारा 395 – जुर्माने की राशि से मुआवजा (Compensation from Fine)
धारा 395 के तहत अदालत आरोपी से जुर्माना वसूलकर उसे पीड़ित को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दे सकती है। धारा 395 और धारा 397 मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि पीड़ित को उपचार और वित्तीय सहायता दोनों मिले।
अस्पतालों के लिए गैर-अनुपालन के परिणाम (Consequences of Non-Compliance by Hospitals)
अगर कोई अस्पताल धारा 397 के तहत अपने कर्तव्यों का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ निम्नलिखित कार्रवाई हो सकती है:
• आपराधिक मुकदमा (Criminal Liability) – अगर इलाज से इनकार करने से पीड़ित की हालत बिगड़ती है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो अस्पताल प्रशासन पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है।
• लाइसेंस निलंबन (License Suspension) – निजी अस्पतालों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
• प्रशासनिक कार्रवाई (Administrative Action) – सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों और कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
धारा 397, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 एक महत्वपूर्ण कानून है, जो यह सुनिश्चित करता है कि अपराध के पीड़ितों को तत्काल और मुफ्त चिकित्सा सहायता मिले। यह प्रावधान विशेष रूप से उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां देरी से इलाज पीड़ित की जान को खतरे में डाल सकता है।
इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी सख्ती से लागू किया जाता है और आम जनता इसके बारे में कितनी जागरूक होती है। यदि इस प्रावधान को सही तरीके से लागू किया जाए, तो यह अपराध पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।